Sunday, April 06, 2014

भाजपा में पैसा कहाँ से आ रहा है यह मत पूछो .. भ्रष्टाचार को लेकर दो मुंही राजनीति

पं दीनदयाल उपाध्याय, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेताओ वाली भारतीय जनता पार्टी की कटनी जिला इकाई  को इस बात से तकलीफ होती है कि उनसे धन के स्रोतो के बारे में क्यों पूछा जाता है वैसे तो भाजपा से प्रधानमंत्री पद के दावेदार नरेंद्र मोदी देश भर को  भ्रष्टाचार से मुक्त कर देने की बात कर रहे है लेकिन उनकी पार्टी के मीडिया प्रभारी  लाखो रुपये के खर्च पर पूछे जा रहे सवालो से ही तिलमिला जाते है, सुचिता, पारदर्शिता की बात  भाजपा फिर किस मुंह से कर रही है या सिर्फ कटनी जिला इकाई का ही हिसाब किताब रहस्मय है. सूत्रो के अनुसार जब से कांग्रेस के धनबली नेता संजय  पाठक भाजपा में आये है तब से पार्टी का सारा खर्च पानी वही कर रहे है, १ अप्रेल को कटनी में मुख्यमंत्री की सभा में लगवाये गए टेंट सहित एक सैकड़ा बसो,कारो से भर कर लाई गई भीड़ से लेकर समाचार पत्रो को भाजपा से जारी किये गए सभी विज्ञापनो का खर्च  भी संजय पाठक ने उठाया है, शहर की आम जनता इसे  भाजपा की दो मुंही राजनीति बता रही है जिसमे एक तरफ तो भाजपा भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी बड़ी बाते करती नजर आ रही है वही दूसरी तरफ लाखो रुपये खर्च कौन से धन से किया जा रहा है इसपर पूछे गए सवाल उसे नागवार गुजर रहे है, क्या सत्ता मिलने के बाद भाजपा ऐसे ही क्रियाकलापो को पर्दे के पीछे रख कर देश में  राज करेगी ?         


कटनी -  बार बार अपने बयान बदलते बदलते आखिरकार संजय पाठक  भाजपा में शामिल हो ही गए, ३१ मार्च को भोपाल में पांच रुपये मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के हाथ में देकर वे विधिवत भाजपा के सदस्य बन गए. अब उनकी राजनितिक हैसियत  भाजपा में सिर्फ नेता या कार्यकर्ता भर की न होकर मुख्यमंत्री के छोटे भाई के जैसे होगी, कटनी में १ अप्रेल को आयोजित एक चुनावी सभा में बड़े भाई छोटे भाई का आत्मीय मिलन सब देख ही चुके है  अभी तक ऐसा सौभाग्य कटनी के किसी भाजपा नेता या कार्यकर्ता को शायद ही मिला हो.
संजय पाठक के कांग्रेस छोड़ने  और ना ना कर अपना डीएनए बदलते हुए भाजपा में शामिल होने से कई महत्वपूर्ण सवाल भी खड़े हो गए है . एक तरफ तो  आज चुनावो में भाजपा भ्रष्टाचार और कांग्रेस मुक्त भारत की बात कर रही है तो दूसरी तरफ भाजपा संजय पाठक के खिलाफ पूर्व से अपनी ही कही बातो पर  सरासर मिट्टी डालते हुए उनसे युक्त होती ही नजर आ रही है, मतलब जिससे मुक्त होना है उसी में युक्त हो जाओ. सूत्रो के अनुसार यह सिर्फ एक सौदेबाजी है  है, बदले में पार्टी का खर्च संजय पाठक द्वारा उठाया जायेगा.  
कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद क्या करना है इसपर संजय पाठक ने कांग्रेस कार्य कर्ताओ से रायशुमारी की बात कही थी लेकिन सूत्र बताते है सिर्फ आम जनता में भ्रम फैलाने के लिया था जबकि वास्तविकता में सब कुछ पहले से ही तय था, कांग्रेस सूत्रो के अनुसार वन भूमि पर अवैध खनन को लेकर कई मामले  न्यायालयो में लंबित है, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में भी खनन  व्यापार से जुड़े  मामले लंबित है, सूत्रो की बात पर यकीन किया जाए तो पर्दे के पीछे का सच शुद्ध व्यवसायिक है और इसमें कई जनों का निजी हित जुड़ा हुआ है. अभी से स्थानीय भाजपा के सभी खर्चे उठाये आज रहे है
इस पूरे नाटकीय क्रम में कांग्रेस की छवि भाजपा से बेहतर नजर आई है कांग्रेस अगर चाहती तो संजय पाठक की मान लेती लेकिन ऐसा नहीं किया. इससे आम जनता के बीच यह सन्देश गया कि कांग्रेस धनबल और बाहुबल के आगे नहीं झुकी बल्कि भाजपा उनके घर खुद ही लेने  पहुँच गई. भाजपा द्वारा  संजय पाठक के प्रति दिए गए पिछले बयानों और की गई राजनीति से आम जनता अच्छी तरह से वाकिफ है लेकिन  वर्त्तमान में हो रही गल बहलियो को देखकर आम जनता का  सिर चकरघन्नी की तरह ही घूम रहा है और सब कुछ अच्छी तरह से वह समझ भी रही है कि असली माजरा क्या है  
 




Friday, April 04, 2014

कांग्रेस युक्त होती भाजपा .. वन भूमि पर अवैध खनन की अपनी बात ही भूली

कटनी - बार बार अपने बयान बदलते बदलते आखिरकार संजय पाठक  भाजपा में शामिल हो ही गए, ३१ मार्च को भोपाल में पांच रुपये मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के हाथ में देकर वे विधिवत भाजपा के सदस्य बन गए. अब उनकी राजनितिक हैसियत  भाजपा में सिर्फ नेता या कार्यकर्ता भर की न होकर मुख्यमंत्री के छोटे भाई के जैसे होगी, कटनी में १ अप्रेल को आयोजित एक चुनावी सभा में बड़े भाई छोटे भाई का आत्मीय मिलन सब देख ही चुके है  अभी तक ऐसा सौभाग्य कटनी के किसी भाजपा नेता या कार्यकर्ता को शायद ही मिला हो.
सतना में नरेंद्र मोदी के पास मुख्यमंत्री शिवराज  सिंह चौहान ले गए थे संजय पाठक को, गौरतलब है कि भाजपा से प्रधान मंत्री पद के दावेदार नरेंद्र मोदी देश से भ्रष्टाचार ख़त्म करने की बात कर रहे है लेकिन कर्नाटक में येदुरप्पा उनके कारण ही भाजपा में वापस आ पाये, यहाँ भी संजय पाठक की कम्पनियो पर  वन भूमि पर ५ हजार करोड़ रुपये के अवैध खनन के गम्भीर आरोप है और यह आरोप पिछले दशको में खुद भाजपा ही लगाती रही है.   
संजय पाठक के  कांग्रेस छोड़ने  और ना ना कर अपना डीएनए बदलते हुए भाजपा में शामिल होने से कई महत्वपूर्ण सवाल भी खड़े हो गए है . एक तरफ तो  आज चुनावो में भाजपा भ्रष्टाचार और कांग्रेस मुक्त भारत की बात कर रही है तो दूसरी तरफ भाजपा संजय पाठक के खिलाफ पूर्व से अपनी ही कही बातो पर  सरासर मिट्टी डालते हुए उनसे युक्त होती ही नजर आ रही है . इससे तो यही समझ में आता है जिससे मुक्त होना है उसी में युक्त हो जाओ.  सूत्रो के अनुसार मध्य प्रदेश में मिशन २९ ऐसे ही पूरा करने का प्लान है 
कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद क्या करना है इसपर संजय पाठक ने कांग्रेस कार्य कर्ताओ से रायशुमारी की बात कही थी लेकिन सूत्र बताते है सिर्फ आम जनता में भ्रम फैलाने के लिया था जबकि वास्तविकता में सब कुछ पहले से ही तय था, कांग्रेस सूत्रो के अनुसार वन भूमि पर अवैध खनन को लेकर कई मामले  न्यायालयो में लंबित है, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में भी खनन  व्यापार से जुड़े  मामले लंबित है, सूत्रो की बात पर यकीन किया जाए तो पर्दे के पीछे का सच शुद्ध व्यवसायिक है और इसमें कई जनों का निजी हित जुड़ा हुआ है.

इस पूरे नाटकीय क्रम में कांग्रेस की छवि भाजपा से बेहतर नजर आई है कांग्रेस अगर चाहती तो संजय पाठक की मान लेती लेकिन ऐसा नहीं किया. इससे आम जनता के बीच यह सन्देश गया कि कांग्रेस धनबल और बाहुबल के आगे नहीं झुकी बल्कि भाजपा उनके घर खुद ही लेने  पहुँच गई. भाजपा द्वारा  संजय पाठक के प्रति दिए गए पिछले बयानों और की गई राजनीति से आम जनता अच्छी तरह से वाकिफ है लेकिन  वर्त्तमान में हो रही गल बहलियो को देखकर आम जनता का  सिर  चकरघन्नी की तरह ही घूम रहा है,