Thursday, April 30, 2015

प्ले स्कूल का प्ले .. समाज शर्मसार

क्या किसी प्ले स्कूल का काम यह होना चाहिए कि वह अपने यहां पढने सीखने आने वाले मासूम बच्चों की माताओं को वह नचाये   और उनके बीच में फिल्मी नृत्यों की स्पर्थाए आयोजित करे ? कितने लोग इस बात का समर्थन करते है और कितने नही यहां यह विषय नही है, विषय के प्रति हमे ख़ुद समझदार होना पड़ेगा नही तो हमारी गलतियों और नजरंदाजी का फायदा उठाने वाले जगह जगह भरे हुए है. जिनका काम बच्चों को शिक्षा देने का है वह उनकी माताओं को थिरकना सिखाने लगे तो लोग भी सोचने को मजूबर हो जाते है कि इसके पीछे आख़िर असल माजरा क्या है, पहली नजर से देखने में इसमे कोई खराबी नही है ऐसा कुछ जनों का मत भी हो सकता है लेकिन उनकी संख्या भी कम नही है जो इसके पीछे कुछ अलग ही उद्देश्य देख समझ रहे है, हाल के दिनों में समाज के बीच में फिर कुछ ऐसी घट्नाये घटी है जिन्हें समाज के लोग उचित नही ठहरा रहे है . वर्तमान युग में देह प्रेम किसी से छुपा नही है, बहुत से लोगो की नजरों में गंदगी भरी रहती है, यहां ग़लत फायदा उठाने वाले भी मौके की ताक में रहते है इसके बावजूद अगर हम नजरंअंदाजी और लापरवाही भरा रवैया ही अपनाते रहे तो अपनी गलतियों का दोष फिर किसे देंगे ? क्या कुछ वर्ष पहले के कटु अनुभवों से हमने कुछ नही सिखा ? कौन नही जानता जब समाज को अप्रिय स्थितियों से गुजरना पढ़ा था. उस समय तो बहुत कुछ पर ध्यान देने की बात कही गई थी लेकिन आज फिर वैसी ही कमियों से ग़लत फायदा उठाया जा रहा है जिसके दूरगामी परिणाम अच्छे तो हरगिज ही नही होंगे. वर्तमान में भौतिक वाद के आगे सब कुछ बौना हो गया है  

कटनी - समाज के प्रति अपनी जवाबदेही समझते हुए जिस तरह से प्रबल सृष्टि के सामने लोगो ने अपने विचार रखे है और कुछ बातों को सामने उजागर किया है वह सचमुच बहुत गंभीर है और उसपर समाज का जागरूक होना भी बेहद जरूरी है, बात एकदम साफ़ है  हाल के दिनों में ग़लत कामों वाली  मानसिकता स्पष्ट सामने आई है जिससे ग़लत प्रभाव बढ़ा है इससे कौन इनकार कर सकता है ? मनोरंजन के खेल वाले जाल बिछे हुए है, लोग अपने काम - धंधों  में व्यस्त है, खर्च के लिए पैसे भी बेशुमार है फिर कोई चाहे कही जाए, जाते जाते कुछ हो जाए शर्मसार फिर समाज ही होता है. यह समय है उन्हें पहचाने का जो भेड़ की खाल में छुपे हुए है, जरूरत है मंसूबों को पहचानने की क्योंकि फिर शर्मिंदा न होना पड़े. सब कुछ पूरे होशो हवास से देखना समझना होगा  ऐसे माहौल में जब बच्चों को नैतिकता समझदारी सिखाना छोड़ टी वीं की दुनिया जैसे गैर जरूरी चकाचोंध से स्कूली कमरों को भर दिया जायेगा तो भविष्य फिर कैसे सँवरेगा ? हाल के दिनों में नाबलिग बच्चों के गंभीर अपराध किसने नही देखे है वह भी ऐसे की रूह कँपा दे. फिर जैसे जैसे समय गुजरता है हम पिछला सब कुछ भूल जाते है तब तक जब कोई नया दिलो को झकझोर देने वाला हादसा हमारे सामने नही आता है. लोग समझदार है उन्हें समझदारी से काम लेना ही होगा   

" मेरी जानकारी अनुसार प्ले स्कूल में बच्चों की माताओं को तंग कपड़ों में नृत्य कराकर उनका अपमान किया गया है और यह समाज के लिए भी अशोभनीय है, स्कूल शिक्षा का मन्दिर होता है जिनका काम संस्कार देना होता है ना कि छोटे बच्चों की माताओं को बुलाकर नृत्य कराना "

झम्मटमल ठारवानी 
वरिष्ठ समाजसेवी
 
" समाज के प्रति कुछ लोग जानते बूझते ग़लत हरकते कर रहे है और यह गैर बर्दाश्त है, समाज के लोगो को भी जागरूक होना ही पडेगा "

श्याम पंजवानी  
पूर्व पार्षद एवं समाजसेवी

   

ध्वनि प्रदूषण पर दर्ज होगा आपराधिक प्रकरण


राज्य शासन जन जागरूकता के लिए करेगा प्रचार प्रसार


भोपाल :भारतीय दंड संहिता की धारा 268 एवं 209 ध्वनि प्रदूषण के विरुद्ध सक्षम अधिकारियों को कार्यवाही के अधिकार देती है। मध्यप्रदेश कोलाहल नियंत्रण अधिनियम में भी ध्वनि विस्तारक यंत्र और ऐसे अन्य उपकरणों से होने वाले प्रदूषण की शिकायत के निवारण के लिये प्रक्रिया निर्धारित है। उच्च न्यायालय ने अपने पारित आदेश में अपेक्षा की है कि विद्यार्थियों एवं युवाओं में ध्वनि प्रदूषण के कारण होने वाली समस्याओं के संदर्भ में सूचना संचार माध्यमों से व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाये। राज्य शासन ने उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के संबंध में सभी जिला कलेक्टर को विद्यार्थियों एवं युवाओं में ध्वनि प्रदूषण के कारकों एवं उनसे उत्पन्न होने वाली समस्याओं के संबंध में विभिन्न संचार माध्यम से प्रचार-प्रसार करवाने के निर्देश दिये हैं। इनमें नुक्कड़ नाटक, संगोष्ठी, विज्ञापन, एफ एम रेडियो पर वार्ता, रिडल्स (पहेली) आदि शामिल हैं।


त्योहार, धार्मिक एवं सामाजिक समारोह आदि में ध्वनि विस्तारक यंत्रों के माध्यम से होने वाले ध्वनि प्रदूषण से नागरिकों विशेषकर वृद्ध एवं कमजोर व्यक्तियों तथा विद्यार्थियों को होने वाली परेशानियों के संबंध में जनहित याचिका उच्च न्यायालय जबलपुर में लगाई गई थी । विगत 6 जनवरी को उच्च न्यायालय द्वारा पारित निर्णय में उल्लेखित किया गया है कि ध्वनि प्रदूषण की समस्या बड़ी बन गई है। इसका सबसे अधिक प्रभाव मानव पर ही पड़ता है। अत्याधिक ध्वनि के प्रभाव से श्रवण शक्ति, आंशिक या पूर्ण बहरापन, रक्त दाब बढ़ना, हृदय की धड़कन तेज होना, पाचक रसों के निर्माण में कमी आना, अनिद्रा आदि स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ उत्पन्न हो जाती हैं। तेज ध्वनि शारीरिक के साथ मानसिक स्वास्थ्य पर असर डालती है। अनिद्रा से मानव कार्य-क्षमता पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।

Monday, April 13, 2015

पुलिस ने पकड़ा क्रिकेट सट्टा, कई बड़े सटोरियों के नाम

  
1 करोड़ 36 लाख की पकड़ी बुकिग 

कटनी - पुलिस को क्रिकेट सट्टा पकड़ने में एक बड़ी कामयाबी हासिल हुई है साथ ही कुछ बड़े नाम भी उजागर किए गए है, 12 अप्रेल को पुलिस को मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई कि पोस्ट आफिस गली कटनी में बाबू सिंधी के मकान में सबसे उपर की मंजिल पर बने कमरे में कुछ व्यक्ति आई.पी.एल.क्रिकेट की बुकिंग कर रहे हैं, तत्काल सूचना से वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया गया जिसपर पुलिस अधीक्षक गौरव राजपूत द्वारा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रामेश्वर यादव के निर्देशन तथा नगर पुलिस अधीक्षक बी.पी.सिंह के मार्गदर्शन व कोतवाली थाना प्रभारी एस.पी.सिंह बघेल के नेतृत्व में विशेष टीम गठित कर कार्यवाही करने के निर्देश दिये गये। 
पुलिस ने जब स्वतंत्र गवाहों के  समक्ष मौके पर दबिश दी तो विनोद बजाज पिता ढालू मल बजाज उम्र 32 वर्ष, राजेश बजाज पिता ढालूमल बजाज उम्र 29 वर्ष, सुमित पिता शंकरलाल बजाज उम्र 21 वर्ष सभी निवासी पोस्ट आफिस के सामने रघुनाथ गंज तथा हेमंत पिता धर्मदास बजाज निवासी नगिना मस्जिद के सामने कटनी, प्रशांत पाण्डेय पिता प्रमोद पाण्डेय उम्र 24 वर्ष निवासी मदन मोहन चैबे वार्ड, अभिषेक थाॅमस पिता प्रफुल्ल थॅामस उम्र 23 वर्ष साकिन एम.जी.एम. स्कूल के पास गुप्तेश्वर जबलपुर द्वारा मोबाइल एवं लेपटाप के माध्यम से क्रिकेट सट्टा की बुकिंग की जा रही थी। आरोपियों के पास से कुल 12 मोबाइल, 1 लेपटाप, 1 टी.व्ही. 1 केल्कुलेटर, तथा नगद 17480 रूपये बरामद किये गये एवं बुकिंग रजिस्टर जब्त किये गये। लेपटाॅप में दिनांक 12.04.2015 को दिल्ली व राजस्थान के मध्य खेले जा रहे मैच में बुकिंग की राशि 1,36,48,770 रूपये पाई गई। आरोपियों को गिरफ्तार कर सट्टा अधिनियम के तहत कार्यवाही की गई है। लेपटाॅप में क्रिकेट के साफटवेयर के अवलोकन के दौरान पूर्व के लगभग 50 से अधिक मैचों की बुकिंग का डाटा भी मिला है। साॅफ्टवेयर में फीड सभी व्यक्तियों के सबंध में सघनता से पूछताछ की जा रही है। 
बड़ी बुकिंग करने वालों में मनोज पयासी, संजय गिरी, बुटकी सरावगी, झब्बर जैन, मधु वर्मा, सिनोद सोनी, मन्टू गुप्ता, स्वतंत्र खम्परिया, रजनी कांत गुप्ता , संदीप मंगलानी, विकास संगतानी सभी कटनी वासियों के नाम सामने आये हैं तथा आरोपियों ने जबलपुर के डिम्पी से सट्टे के रेट व लाईन लेना बताये हैं जिसके संबंध में साक्ष्य संकलित किये जा रहे है। साक्ष्य संकलन के पश्चात कार्यवाही की जावेगी।

            उपरोक्त कार्यवाही के दौरान थाना प्रभारी एस.पी.सिंह बघेल, उप निरीक्षक अजय सिंह, उप निरीक्षक श्वेता सिंह, स.उ.नि. लेख सिंह, प्र.आर. कबीर, संध्या बिछिय, आरक्षक विभांशु कोरी, रामेश्वर सिंह, प्रकाश , मयंक धानका, अंजनी पाठक, नितिन जायसवाल, विपिन जायसवाल, महिला आरक्षक रचना चैधरी की सराहनीय भूमिका रही है। पुलिस अधीक्षक द्वारा टीम के सभी सदस्यों के पुरस्कृत करने की घोषणा की है।