Thursday, March 06, 2014

प्रदूषण बोर्ड की जाँच रिपोर्ट पर कार्यवाही नही, प्रशासन के लिए जनहित महत्वपूर्ण या कुछ और ..

रिहायश के लिए आरक्षित पुनर्वास भूमि के खाली पड़े बड़े भूखंडों पर अवैध कब्जा कुछ ख़ास लोगो ने ही किया है पुनर्वास की 12 शीटों की जाँच की जाए तो साफ़ साफ़ नजर आ जायेगा कि जितने भी बड़े बड़े भूखंड खाली थे उनपर अवैध कब्जा पुनर्वास विभाग की मिलीभगत से पूर्व में किया गया था अन्यथा यह कैसे हो सकता था जितना बड़ा भूखंड उतना ही ख़ास जनों का कब्जा, माधव नगर में यह घोर असमानता है कि कुछ लोग किराये अथवा छोटे से घर में रहते है और कुछ लोगो के पास लाखो वर्गफुट भूमि पर अवैध कब्जा है और रहने के लिए बड़े आलीशान बंगले भी बना रखे है, इनका कोई सामाजिक सरोकार नही कि इनके अवैध बने उद्योगों- धर्मकाँटों में आने जाने वाले भारी वाहनों से जन सामान्य को कितना कष्ट होता होगा. आधा दर्जन स्कूल में पड़ने वाले बच्चों को कितना खतरा उठना पड़ता होगा, माधव नगर और इस क्षेत्र से गुजरने वाला बड़ा वर्ग यहा स्थापित अवैध उद्योगों में चौबीस घंटे प्रवेश कर रहे भारी वाहनों के   चलते धूल - ध्वनि प्रदूषण का बड़े स्तर पर शिकार है, प्रदूषण का स्तर जनसामान्य के लिए खतरनाक स्तर पर पहुँच चुका है, म प्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इसकी जांच कर कार्यवाही करने का पत्र नगर निगम आयुक्त और यातायात पुलिस को लिखा है बावजूद इसके जनहित  में कार्यवाही करने किसी जिम्मेदार विभाग में नीयत ही दिखाई नहीं देती   


20 फरवरी को नगर निगम आयुक्त और यातायात पुलिस को मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा कार्यवाही करने को लिखा गया पत्र  
कटनी - पुनर्वास भूमि पर अवैध मिलें - धर्मकाँटे जवाबदार अधिकारियों की मिलीभगत से तन गई, इनमें चौबीस घंटे भारी वाहनों के प्रवेश ने आम नागरिकों का जीना दूभर कर रखा है, प्रदूषण विभाग ने 11 फरवरी को संत कंवरराम वार्ड शनि चौक की जाँच में वायु प्रदूषण जाँच में प्रदूषण का स्तर अत्यधिक पाया है, प्रदूषण बोर्ड के निर्धारित मानकों के अनुसार 100 माइक्रोग्राम प्रतिघन मीटर प्रदूषण 24 घंटे में होना चाहिए जबकि यहां 2 घंटे में ही 312-12 माइक्रोग्राम प्रतिघन मीटर डस्ट प्रदूषण की पुष्टि बोर्ड अपनी रिपोर्ट में कर चुका है इसके बावजूद यहां के लोगो के लिए कोई कदम नही उठाया गया है जबकि इसी मुद्दे पर 25 फरवरी को जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की बैठक यह निर्देश दिए गए थे कि चावला चौक, ग्राम पंचायत चौराहा और कुम्हार मोहल्ले में बैरियर लगाकर भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित किया जाए, गौरतलब है कि प्रदूषण का कारण घनी बस्ती की सड़क के बीच दौड़ रहे भारी वाहन, ट्रक ट्रैक्टर आदि है

स्कूल और रिहायशी क्षेत्र होने के बावजूद भारी वाहनों पर प्रतिबंध नही
कार्यवाही नही होने से खड़े हो रहे कई सवाल

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में साफ़ तौर पर बताया गया है कि माधवनगर के क्षेत्र में स्कूल व रिहायशी क्षेत्र स्थापित है, परवेशीय वायु गुणवत्ता सुधार के लिए खराब पड़ी सड़क में सुधार की आवश्यकता है एवं भारी वाहनों को वैकल्पिक मार्ग चलाया जाए जिससे स्थिति में सुधार हो, लेकिन प्रशासन ने जनहित में अभी तक कोई कदम नही उठाया है जिससे कई सवाल खड़े हो रहे है कि कही  प्रशासन जनहित को तिलांजली देकर किसी के दबाव में तो नही आ गया है