Thursday, November 28, 2013

राष्ट्रीय मेगा लोक अदालत - अधिक से अधिक प्रकरणो के निराकरण के प्रयास किये जायें- श्री शरण जिला एवं सत्र न्यायाधीश


कटनी / आगामी 30 नवम्बर 2013 को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय मेगा लोक अदालत की तैयारियों संबंधी बैठक जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री राम प्रकाश शरण की अध्यक्षता एवं कलेक्टर श्री अशोक कुमार सिंह के विशिष्ट आतिथ्य में आज दोपहर 2 बजे जिला एवं सत्र न्यायालय कक्ष में संपन्न हुई । 
जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा उपस्थित सभी विभाग प्रमुखो को उक्त आयोजन में अधिकाधिक सहभागिता निवाहने हेतु निर्देशित किया । आपने सभी विभागों के  अधिकारियों से कहा कि वे विभागों के अधिक से अधिक प्रकरण पूर्ण कराकर समझौता कराकर निराकण कराये । सभी विभागों के निराकृत /समझौता होने वाले प्रकरणो की संख्या सूची कल 29 नवम्बर 2013 को दोपहर 2 बजे तक अनिवार्य रुप से इस कार्यालय में भिजवायी जाए । 
कलेक्टर श्री अशोक कुमार सिंह ने इस अवसर पर जानकारी देते हुये बताया कि जिला प्रशासन की ओर से राजस्व , सामाजिक न्याय , महिला एवं बाल विकास विभाग , शिक्षा विभाग , जिला पंचायत सहित अन्य सभी विभागों के प्रकरणो की सूची कल दोपहर तक प्रेषित की जावेगी । उक्त सभी विभागों को  राष्ट्रीय मेगा लोक अदालत में अधिकाधिक सहयोग प्रदान कर प्रकरणो का निराकरण कराने हेतु आज दोपहर कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित बैठक में निर्देशित किया गया है । इस आयोजन हेतु डिप्टी कलेक्टर श्री ओ.पी. सनोडियां को कोआर्डिनेटर बनाया गया है । 
पुलिस अधीक्षक श्री राजेश हिंगेणकर द्वारा भी पुलिस विभाग से संबंधित अधिकाधिक प्रकरणों के निराकरण कराने संबंधी प्रयासो की जानकारी दी गई । 
इस अवसर पर विशेष न्यायधीस श्रीमती राधा सोनकर , श्री आशुतोष मिश्रा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट , श्री सुनील मिश्रा रजिस्ट्रार जिला न्यायालय , न्यायिक मजिस्ट्रेट गण प्रथम श्रेणी सर्व श्री आर.के.सिंह , श्री आशीष ताम्रकार , श्री कपिल नारायण भारद्वाज सहित वन , विद्युत मंडल , नगर निगम , जिला पंचायत , सहित अन्य विभागों के अधिकारीगण उपस्थित थे । 

Friday, November 22, 2013

इसके कारण नेहरू जी, इन्दिरा जी का पूरा प्लस साफ़ हो जाता है ..

कटनी  -   " हिंदुस्तान में प्रधानमंत्री कौन सबसे अच्छे हुए ? तो कोई नेहरू जी का नाम लेता है, कोई इन्दिरा जी, तो कोई किसी और का नाम लेता है. मै उनको कहता हूँ आप एक एक कर सभी प्रधानमंत्रीयों के कार्यकाल का विशलेषण करिये और मैंने इसका विस्तार से विचार किया है क्योंकि मैंने सभी प्रधानमंत्रीयों के शासन को देखा है, कोई ऐसा नही जिसको नही देखा. यह ठीक है कि आरंभिक वर्षो में पत्रकार के नाते देखा, आगे चलकर 1970 के बाद पार्लियामेंट में तब से लेकर एक सांसद  के रुप में देखा और सबको देखने के बाद में हमेशा कहा करता हूँ कि नेहरू जी का नाम बहुत बड़ा है, लेकिन नेहरू जी कार्यकाल में जो अच्छे काम हुए, जिनको प्लस कहा जा सकता है और जो कमियां रही, जिनको माइनस कहा जा सकता है. उसके आधार पर उनकी अगर बैलेंस शीट निकाली जाए तो उस बैलेंस शीट में जितना प्लस है वो सब एक 1962 के चीन के हमले के कारण जिसमे चीन पर ग़लत विश्वास करना, चीन के मुकाबले अपनी सेना को सतर्क तैयार न रखना और कृष्ण मेनन जैसे एक व्यक्ति को देश का रक्षा मंत्री बना देना बहुत बड़ी गलती थी और इस माइनस के सामने पूरा प्लस साफ़ हो जाता है, बैलेंस शीट साफ़ हो जाती है. 
उसी प्रकार इन्दिरा जी बहुत अच्छी प्रधानमंत्री थी, एक बात बहुत बड़ी उन्होंने की जब पाकिस्तान ने हम पर हमला किया तो ऐसी बुरी पराजय दी, हमारी सेना के बल पर न केवल बुरी पराजय दी बल्कि पाकिस्तान के दो हिस्से करवाकर बंगलादेश को स्वतंत्र बना दिया जो एक प्लस पॉइंट है लेकिन यह प्लस पॉइंट होते हुई भी कोई इस बात को भूल नही सकता कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उनके चुनाव को अवैध घोषित किया और कहा कि उन्होंने भ्रष्टाचार के द्वारा रायबरेली का चुनाव जीता है और कानून के हिसाब से चुनाव अवैध है. उनको संसद का सदस्य होने का अधिकार नही. कोर्ट ने जब यह घोषणा कि तो इन्दिरा जी की प्रतिक्रिया यह हुई कि उन्होंने हिदुस्तान में इमरजेंसी लगा दी और जितने भी लोग यह माँग कर रहे थे कि श्रीमती गाँधी को इस्तीफा देना चाहिए सबको अन्दर डाल दिया, जयप्रकाश नारायण, चंद्रशेखर और अटल बिहारी वाजपेयी जेल भेजे गए. कुल मिलाकर इमरजेंसी के काल में एक लाख दस हजार लोग जेल में डाले गए जिसमे बहुत सारे पत्रकार भी थे यह एक धब्बा हमारे लोकतंत्र पर बन गया, 19 महीने का समय लोकतंत्र को ग्रहण लग गया था " 

 (  22 नवंबर / म प्र / कटनी में भाजपा प्रत्याशी संदीप जायसवाल के समर्थन में आयोजित चुनावी सभा को संबोधित करते भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी )           

Wednesday, November 20, 2013

हम नही कहते लोगों से सुना है .. कठिन डगर है भैया की ..

चुनाव के मौसम में बहुत सी ऐसी बातें जिनपर वैसे तो पर्दा डला रहता है खुलकर सामने आ ही जाती है चुनाव लड़ने वाले वालों के लिए कई बातें फैलाई भी जाती है. यहा तक तो समझ में आता है लेकिन भैया के बारे में जो बताया सुनाया गया है वह इनके चुनाव से जुड़ा नही बल्कि पूर्व में बहु प्रचारित उन बातों से है जिनकी लोग कहते है अब अपने आप ही हवा निकल गई . चुनाव की टिकटें घोषित होने के बाद से ही कुछ लोग उछलते हुए बताते है कि जो व्यक्ति अपने आप को प्रदेश स्तर का नेता समझने लगा था, इनके लोग इन्हे अगला मुख्यमंत्री तक कहने लगे थे, बातें तो और भी सामने आई कि भैया कम से कम 32 टिकट दूसरों को भी दिलवा देंगे लेकिन जब अपने गृह नगर में इनके किसी समर्थक को लाख चाहने के बावजूद टिकट नही मिली तो शहर के कुछ लोग उछलने- चौकने लगे कि देखो देखो भ्रम जाल टूट गया माया जाल बिखर गया. पर हमे तो इसमे कुछ भी विशेष नही लगा क्योंकि राजनीति की तो यह श्रंगार  सामग्री है जिनके दम पर सजा सँवरा दिखा जा सकता है, भैया अभी चुनाव के मैदान में संघर्ष कर रहे है, दूसरी तरफ़ मामा को भी रहम नही आ रहा, वह भी मैदान मारने में कोई कसर नही छोड़ रहे, राह कठिन है भैया की लेकिन डटे है  कोई दूसरी न सही अपनी सीट बचालो भैया, मैदान में न रहोगे तो सचिन बिन क्रिकेट सून जैसा हो जायेगा.       

Sunday, November 17, 2013

आ गई मतदाता की बारी ...


पाँच साल बाद फिर वह दिन नजदीक आ गया है जिस दिन मतदाताओं से मिलें मतो के आधार पर प्रत्याशियों को मिलीं हार जीत से  राजनैतिक दल अपनी सरकार बनायेंगे और पाँच साल तक प्रदेश की सता पर काबिज रहेंगे. हर बार की तरह इस बार भी राजनैतिक दलों ने अपनी अपनी उपलब्धि गिनाने में कोई कसर नही छोड़ी है लेकिन मतदाता किसपर अपना भरोसा जतायेंगे यह सिर्फ़ वही जानता है. प्रदेश में पिछले 10 वर्षों से भाजपा की सरकार काबिज है और यह सता उसे अपनी योग्यताओ के बदले नहीं बल्कि काँग्रेस शासन काल में जन्मी अव्यवस्थाओ के चलते मिली है. वर्ष 2008 में हुए चुनावों में प्रदेश की जनता ने पुनः शिवराज सिंह चौहान पर ही भरोसा कर उसे सत्ता तक पहुँचाया है, इससे पहले 2003 में उमा भारती के नेतृत्व में सरकार बनी थी लेकिन बाद में उमा भारती को हाशिये पर डाल दिया गया और उनकी स्थिति आज भी वैसे ही है. भाजपा में आज शिवराज सिंह चौहान के अलावा कोई दूसरा चेहरा ही नही है हालाँकि इस बार शिवराज सिंह चौहान के लिए भी 2008 जैसी स्थिति नही है. बीते कार्यकाल में कई बातें ऐसी सामने आई जिसके चलते अब स्वर्णिम मध्यप्रदेश का नारा उतनी मज़बूती से नही कहा जाता 

 
 

कटनी - जिले की मुडवारा सीट मुख्यतः शहरी सीट है जिसपर जनता ने पिछले 10 वर्षो से भाजपा के विधायक को बिठाया है लेकिन भाजपा हर बार अपने ही विधायक को बदलती रही है . वर्ष 2008 में अलका जैन को बदलकर इस सीट से राजू पोद्दर को चुनाव में प्रत्याशी बनाया गया क्योंकि अलका जैन की स्थिति 2008 में अच्छी नही बताई जा रही थी, कुछ इसी तरह इस बार राजू पोद्दर पर भाजपा भरोसा नही कर पाई और कुछ समय पहले ही भाजपा में आए संदीप जायसवाल को प्रत्याशी बनाया है, जैसे ही इनकी टिकट  घोषित हुई भाजपा के पुराने नेता चमनलाल आनंद, रामचंद तिवारी, सुकिर्ति जैन एकजुट संदीप जायसवाल का विरोध जताने लगे थे, चमनलाल आनंद ने निर्दलीय प्रत्याशी बनकर चुनाव लड़ने का मन बनाया लेकिन बाद में उन्होंने अपना नाम वापस ले लिया  था, अब भाजपा से संदीप जायसवाल और काँग्रेस से फिरोज अहमद समेत इस सीट से कुल 11 प्रत्याशी अपना भाग्य आजमा रहे है लेकिन सीधी टक्कर काँग्रेस और भाजपा की ही बताई जा रही है 

शहर की आम समस्याओं से इन्हे नही मतलब 

कटनी शहर की घोर अराजक यातायात व्यवस्था हो या जगह जगह बिकने वाली अवैध शराब हो या गांजा हो, अब तो पूरे जिले में स्मैक जैसा घातक नशा भी पूरी तरह से पैर जमा चुका है. चुने हुए जनप्रतिनिधियों को इससे कोई मतलब नही की इसके दूरगामी भीषण परिणाम क्या होंगे ? जिला अथवा पुलिस प्रशासन की इस ओर लापरवाही का इन्होंने कभी विरोध नही किया . अब पुनः चुनाव का दिन नजदीक आ गया है, आम जनता को भी अपने वोट की भूमिका का महत्व समझते हुए अपने आस पास हो रहे अवैध कामों ओर जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों द्वारा निभाई गई निष्क्रिय भूमिका को देखते हुए ऐसा जनप्रतिनिधि चुनना चाहिए जो सही मायनों में इस शहर के कुरूप होते चेहरे को सुधार सकने की ईमानदार नीयत ओर माद्दा रखता हो सिर्फ़ थोथी बातों में आकर या भावनाओं में बहकर वोट देने से हम अपना भविष्य दाँव पर नही लगा सकते    



इस बार विधानसभा चुनावों में जिले में कुल मतदाताओं की संख्या 8 लाख 18 हजार 291 है, जिसमे पुरुष मतदाता 4 लाख 28 हजार 171, महिला मतदाता 3 लाख 90 हजार 98, व अन्य कुल 22 है . सर्वाधिक मतदाता मुडवारा में 211403 जिसमे पुरुष 110333 महिला 101062 व अन्य 8 है, बड़वारा में मतदाता 207050 जिसमे पुरुष 108574 महिला 98472 व अन्य 4 है, बहोरीबंद   में मतदाता 204787 जिसमे पुरुष 106587 महिला 98191 व अन्य 9 है, सबसे कम मतदाता विजयराघवगढ़ में कुल 195051 है जिसमे पुरुष 102677 महिला 92373 व अन्य 1 है .   

जिले में 80 प्रतिशत मतदान का लक्ष्य  

जिला निर्वाचन अधिकारी अशोक कुमार सिंह के बताया कि इस बार ज्यादा से ज्यादा मतदान करवाने पर बल दिया जा रहा है जिससे कम से कम 80 प्रतिशत मतदान प्रतिशत जिले में हासिल किया जा सके, स्वीप प्लान के जरिये ज्यादा से ज्यादा मतदान के लिए मतदाताओं को प्रेरित किया जायेगा, पहली बार फोटो युक्त मतपर्ची का उपयोग किया जायेगा जिले के मतदाताओं को पर्ची बाँटने का काम प्रत्येक मतदान केन्द्र के बीएलओ को दिया गया है, घर घर जाकर पर्ची पहुँचाने का कार्य शुरू किया जा चुका है, इस लिस्ट का एक सेट प्रत्येक मतदान केन्द्र के बीएलओ के पास मतदान के दिन उपलब्ध रहेगा, पर्ची पाने से वंचित रह गए मतदाता यहा संपर्क कर सकते है . मतदाता  इस पर्ची का उपयोग मत देते समय परिचय पत्र के रुप में भी कर सकेंगे. इस बार मतदान केंद्रों से 100 मीटर की दूरी पर बीएलओ बैठेंगे जो मतदाता की मदद कर सकेंगे, ऐसे में राजनैतिक दलों के स्टालो की कोई खास जरूरत नही रह जाती उनके लिए 200 मीटर की दूरी मतदान केंद्रों से निर्धारित की गई है हालाँकि बाद में आयोग से निर्देश आने यह निर्देश बदला भी जा सकता है. आगे उन्होंने बताया कि ऐसी जगह जहा मतदाताओं को मतदान न करने प्रभावित किया जा सकता है उन स्थानों पर सीसीटीवीं कैमरे की मदद ली जायेगी. कुल मिलाकर निर्वाचन आयोग के निर्देशों के चलते यह चुनाव पीछे हो चुके चुनावों से सख्त चुनाव माना जा रहा है और यह सही भी लगता है . प्रत्याशियों ओर दलों के नेताओं को हर कदम फूँक फूँक कर रखना पढ़ रहा है ओर इसमे फाय्दा लोकतंत्र का ही हुआ है. धीरे धीरे चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी ओर जवाबदेही से भरपूर हो चली है जिला निर्वाचन अधिकारी के अनुसार आने वाले समय में यह भी होगा जब मतदाता अपने द्वारा दिए गए मत की प्रिंट भी पा सकेगा.                  



Sunday, November 10, 2013

मुडवारा सीट पर कांग्रेसी काँग्रेस के खिलाफ, भाजपाई भाजपा के खिलाफ

कटनी  - मुडवारा विधानसभा सीट जीतने के लिए काँग्रेस को अभी और लंबा इंतज़ार करना पड़ सकता है और इस इंतज़ार के लिए काँग्रेस ख़ुद जिम्मेदार जान पढ़ती है, मुडवारा सीट के लिए काँग्रेस ने फिरोज अहमद को मैदान में उतारा है जबकि जानकार गंगाराम कटारिया, विजेन्द्र मिश्र या सुनील मिश्रा में से किसी को प्रत्याशी बनाये जाने की बात मान चल रहे थे, लेकिन काँग्रेस ने अल्पसंख्यक  कोटे के चलते फिरोज अहमद को टिकट दिया जिसका विरोध ख़ुद काँग्रेस के लोगो में रहा है यहां तक कि अल्पसंख्यक वर्ग के किसी दूसरे व्यक्ति को टिकट देने की बात भी सामने आई थी लेकिन काँग्रेस ने सभी संभावनाओं को दरकिनार कर फिरोज अहमद को ही टिकट देने का मन बना लिया था, हो सकता है काँग्रेस इस सीट से अल्पसंख्यक वर्ग को टिकट देकर आस पास की विधानसभा सीटों पर इस वर्ग से बढ़त बनाना चाहती हो, पिछली दो बार से भाजपा मुडवारा सीट जीतती आ रही है इसके बावजूद किसी सक्रिय चेहरे को सामने न करना और सिर्फ़ अल्पसंख्यक कोटे का दाँव चलना यही कह रहा है कि काँग्रेस का निशाना यह सीट पाना नही बल्कि अन्य सीटों पर अल्पसंख्यक वर्ग से वोटो की बढ़त बनाना है  

संजय पाठक की नही चली 

मुडवारा सीट से टिकट पाने काँग्रेस अध्यक्ष करन सिंह चौहान भी लालायित थे और ऐसा माना जा रहा था कि इस सीट पर संजय पाठक अपने समर्थक नेताओं में से किसी को प्रत्याशी बनवा सकते है लेकिन काँग्रेस ने एकमात्र फिरोज अहमद का नाम ही शुरू से ही फाइनल कर रखा था, संजय पाठक समर्थक काँग्रेस अध्यक्ष करन सिंह चौहान, नगर निगम अध्यक्ष वेंकट खंडेलवाल और पार्षद पति अरुण कनौजिया भोपाल जाकर फिरोज अहमद को टिकट न दिए जाने की वकालत भी कर आए थे. काँग्रेस से जुड़े कुछ सिंधी समाज के लोग भी ग्रामीण काँग्रेस अध्यक्ष गंगाराम कटारिया को टिकट दिए जाने की माँग संजय पाठक के बंगले जाकर कर आए थे, उन्हें आश्वासन मिला कि ऊपर यह बात कही जायेगी लेकिन काँग्रेस ने संजय पाठक की किसी बात पर ही तवज्जो नही दी, संजय पाठक अपने दम पर सिर्फ़ अपने लिए ही विजयराघवगढ़ सीट से टिकट ला पाये है जहां इस बार उनकी स्थिति भी काँटे की टक्कर की बताई जा रही है

इस बार भी कांग्रेसी ही काँग्रेस को निपटा देंगे 

काँग्रेस से जुड़े सिंधी समाज के कुछ लोग गंगाराम कटारिया को टिकट दिलाये जाने के लिए संजय पाठक के पास गए थे, इसे लेकर समाज के लोगो में यह चर्चा होती रही कि ये लोग वाकई में गंभीर होते तो कम से कम भोपाल जाकर वरिष्ठ काँग्रेस नेताओं के समक्ष यह माँग जोरदार ढंग से करते. समाज के ही लोग इसे अनमने ढंग से की गई सिर्फ़ औपचारिकता भर मानते है. इस बार भी टिकट न मिलने से दुखी गंगाराम कटारिया काँग्रेस प्रत्याशी के विरोध में अपने ग्रामीण अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे चुके है, संजय पाठक के बाकी समर्थकों की भी यही स्थिति है इसलिए काँग्रेस फिर इस बार उसी स्थिति में खड़ी दिखाई दे रही है जहां विरोधी पार्टियों से ज्यादा कांग्रेसी ही काँग्रेस को निपटाने लामबंद होते दिख रहे है  

भाजपा में भी फूट पड़ गई  

पिछली बार 30 हजार से अधिक वोटों से जीतने वाले गिरिराज किशोर राजू पोद्दर को इस बार टिकट देने के नाम पर भाजपा के हाथ पाँव फूल रहे थे, कटनी विकास प्राधिकरण अध्यक्ष ध्रुव प्रताप सिंह को टिकट देना तो आत्मघाती कदम सिद्ध होता ऐसे में भाजपा को सिर्फ़ पूर्व महापौर रहे संदीप जायसवाल ही ऐसा चेहरा नजर आया जो यह सीट बचा सकता था, संदीप जायसवाल एक सक्रिय और लोकप्रिय नेता के रुप में भी अपनी पहचान बना चुके थे लेकिन भाजपा वाले अब इनका विरोध कर रहे है, भाजपा नेता चमनलाल आनंद तो अब निर्दलीय प्रत्याशी के रुप में चुनावी मैदान में उतर चुके है