Saturday, December 29, 2012

यहाँ कानून का भय नहीं



नागरिकों  में कानून के प्रति विश्वास पैदा करना आवश्यक  
माधव नगर (कटनी - म प्र ) - आधी रात हो  या दिन  दहाड़े  शराबियों का हुडदंग वर्तमान में  अक्सर नजर आ  जाता है , चलती सडकों पर  गाली - गलौज  आम बात हो गई है   , अजनबी - अंजान व्यक्तियों की भरमार  पूछताश     करने  वाला कोई नहीं  .अधूरे नम्बरों वाले वाहन, बिना नंबर प्लेट की सडको पर भागती जेसीबी  मशीने या  दिन रात भागते डम्फर . यह कोई एक दिन की बात नहीं यहाँ रोजाना की  बात है यह सबकुछ दिख जायेगा  माधव नगर थाना  क्षेत्र अंतर्गत , पुलिस की बीट व्यवस्था नाम मात्र की बनकर रह गई है   . पिछले कुछ वर्षो  में अभूतपूर्व  परिवर्तन सा महसूस होता दिख रहा है माधव नगर में.  क्षेत्र के आस पास कई वैध अवैध  कालोनियाँ भी तन  गई  है और इसमें  कौन कौन लोग बस गए है यह उस कालोनी के लोग भी ठीक से नहीं जानते होंगे ऐसे में इस बात की सम्भावना और भी बढ़ जाती है कि कुछ न कुछ  गलत हो रहा है तो जरुरी नहीं की जिम्मेदार जन को इसकी खबर भी हो . अभी कुछ समय पहले ही मानसरोवर कालोनी में पुलिस ने मुखबिरी के आधार  पर एक गांजा सप्लायर को बरगंवा में सप्लाई  देते हुए पकड़ा था पुलिस की इसमें किरकिरी भी हुई थी कि यह सब  काफी दिनों से चलता रहा था . माधव नगर  से जुडी हुई कालोनियाँ  सीमा व्रती क्षेत्र में है इसलिए बाहर से आकर यहाँ चुपचाप अपना अवैध  धन्धा  चलाने वाले यहाँ बिलकुल नहीं होंगे इस बात की सम्भावना से इंकार तो कतई भी नहीं किया जा सकता . पुलिस   विभाग की इस ओर सुस्ती और लापरवाही  किसी दिन  क्षेत्र की कानून व्यवस्था पर ही भारी न पढ़ जाये  इसलिए पुलिस  से इस बात की अपेक्षा बढ़ जाती  है कि  समय रहते आवश्यक कदम जरुर उठाये  जायेंगे जिससे आम नागरिको का कानून के प्रति विश्वास मजबूत हो सके  

Thursday, December 27, 2012

अपना आरोप दूसरे के मत्थे थोपेंगे शंकरलाल विश्वकर्मा ?



जिस दिन से पुलिस ने  खनिज व्यापारी शंकरलाल विश्वकर्मा द्वारा किये गये 250 करोड़ रुपये  मूल्य के  बाक्साईट  अवैध उत्खनन का मामला उजागर किया है उस दिन से खनिज  विभाग ने जैसे  इस मामले पर चुप्पी सी साध ली है  बीएसएनएल  टेलीफोन एक्सचेंज  के पास तथा माधव नगर थाने के ठीक पीछे राधादेवी शर्मा नामक महिला की बाक्साईट खदान का वर्ष 1992 से नवीनीकरण ही नहीं हुआ  था और न ही इस खदान को कोई एनओसी प्राप्त थी लेकिन  मजे की बात देखिये खदान में उत्खनन लगातार जारी था और बाकायदा खनिज विभाग  इसका पिट पास जारी करता  रहा था , इससे जहाँ शासन को करोड़ो का नुक्सान हुआ है वही इसका सीधा फायदा किसने किसने उठाया होगा इसे एक गाँव में रहने वाला ग्रामीण भी अच्छी तरह से समझ सकता है . राधा देवी शर्मा को इस  खदान का आवंटन 1972 से लेकर 1992 तक ही हुआ था जबकि उत्खनन का काम विश्वकर्मा बंधू ही करते आयें है . इसकी पुख्ता जानकारी पुलिस अधीक्षक राजेश हिन्गंकर को जब मिली तो उन्होंने माधव नगर थाने के टी आई अखिल वर्मा को निर्देश देकर खनिज  उत्खनन में लिप्त तीन हिइवा डम्फर और  चार आदमियों को अवैध बाक्साईट  सहित पकड़ा इसके साथ ही जिले भर में खनिज चोरों की  वाहनों सहित  धरपकड़ शुरू हो गयी थी 

कटनी - शंकरलाल विश्वकर्मा की गिरफ़्तारी के बाद से खनिज विभाग सारी जवाबदारी पुलिस पर सौप कर  अपने आप को अन्जान बता रहा है  अगर अवैध उत्खनन की बात गलत है   तो विभाग क्यों  नहीं इस सम्बन्ध में अपना पक्ष आम   जनता के सामने  रखता है ? क्यों  वह 250  करोड़ के इस घोटाले पर  चुप्पी साधे   हुए है ? विभाग की चुप्पी से  अपने  आप ही 250 करोड़ के अवैध उत्खनन की बात की  पुष्टि   एक प्रकार से हो जाती है . पुलिस ने  भी शुरूआती  सक्रियता दिखाने के बाद तथा खनिज विभाग से मिल रहे असहयोग की वजह से अपने हाथ भी बांध रखे है , दोनों विभागों की इस खींचतान से अवैध उत्खनन कर्ताओं की फिर से मौज हो उठी है , माधव नगर क्षेत्र से गुजरने वाले डम्फर वैध खनिज लेकर जा रहे है  या अवैध यह आम नागरिको की समझ से परे है . शासन के नियमानुसार खनिजो का  परिवहन करने  वाले वाहनों का रजिस्ट्रेशन नंबर तथा उससे सम्बंधित खनिज खदान  की जानकारी खनिज विभाग को उपलब्ध करानी रहती है जिससे यह पता चल सके कि  निर्धारित खदान से खनिज सिर्फ निर्धारित किये गए वाहन ही  लेकर जायेंगे .इस मामले में भी विभाग विशेष रूचि नहीं ले रहा जिससे यह पता नहीं  चलता   कि  परिवहन किया जा रहा खनिज वैध है या अवैध . शंकरलाल विश्वकर्मा वाला मामला बेहद संगीन मामला है  इसने  खनिज विभाग की भूमिका पर कई सवाल खड़े कर दिए  है 

दूसरे  के मत्थे अपराध थोपने की जुगत में शंकरलाल विश्वकर्मा 

सूत्रों के अनुसार पहले गिरफ़्तारी तथा बाद में जमानत मिल जाने के बाद शंकरलाल विश्वकर्मा अब  यह चाहते है कि  राधादेवी  शर्मा का एक रिश्तेदार अवैध उत्खनन का मामला अपने ऊपर ले जिससे वह  खुद  को इस मामले से बरी  करवा ले , इसके बदले सारा खर्च और ऊपर से एक बड़ी रकम दिए जाने की बात भी  आम चर्चा भी गरम हो उठी है   इस सम्बन्ध में शंकरलाल विश्वकर्मा से उनका पक्ष जानने जब फ़ोन पर संपर्क किया गया तो उन्होंने मीटिंग में व्यस्त होने की बात कही  और कोई जवाब नहीं दिया  

Friday, December 14, 2012

15 दिसंबर को न्यायालीन लंबित मामले सुलझाने लोक अदालत, ज्यादा से ज्यादा नागरिक उठाये लाभ


कटनी - आम आदमी को कोर्ट कचहरी में लंबित मामलो से छुटकारा दिलाने के लिए 15 दिसंबर को   लोक अदालत वृहद स्तर पर लगायी जाएँगी ,लोकअदालत में  आपसी समझोते के आधार पर फैसला लिया जायेगा और इस फैसले के विरूद्ध कही अपील भी नहीं की जा सकेंगी , जिन भी पक्षकारो के मामले लंबित है चाहे उन्हें नोटिस नहीं भी मिले है वे भी इस लोक अदालत का लाभ उठा सकते है . दिनांक 15 दिसंबर को आयोजित वृहद लोक अदालत में आम नागरिक ज्यादा से ज्यादा लाभ प्राप्त कर सके इसी  उद्देश्य को लेकर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती कनकलता सोनकर द्वारा आज इस बात की जानकारी पत्रकारों को दी गयी , इस  वृहद लोक अदालत के परिप्रेक्ष्य में माननीय अध्यक्ष / जिला एवं सत्र-न्यायाधीश श्रीमती कनकलता सोनकर द्वारा  23 खंडपीठों का गठन करने संबंधी दिशा निर्देश जारी कर दिए गए है । उक्त खण्डपीठें न्यायालय एवं तहसील परिसर में कार्यरत रहेंगी । दोनों ही परिसरों में एक-एक लोकअदालत   पूछताछ   केन्द्र स्थापित किए गए है, जिनमें पक्षकार आकर लोकअदालतों की खंडपीठों एवं उनसे संबंधी अन्य जानकारी प्राप्त कर सकतें है  

विद्युत अधिनियिम संबंधी मामले खंडपीठ क्रमांक 4, पीठासीन अधिकारी - श्री उमेश श्रीवास्तव तृतीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश के खंडपीठ रहेंगे। अन्य न्यायालीन प्रकरणों संबंधी खंडपीठ न्यायालय में ही कार्यरत रहेंगी। उपभोक्ता मामलों की खंडपीठ, खंडपीठ क्रमांक 2 पीठासीन अधिकारी श्री डी0एन0शुक्ला उपभोक्ता फोरम में स्थित होगी । तहसील परिसर में राजस्व की तीन खंडपीठो सहित नगरनिगम, बैंक, श्रमविभाग, सहकारिता तथा पुलिस परामर्श केन्द्र की खंडपीठें भी कार्यरत रहेंगी । माननीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा आम जन से अधिक से अधिक संख्या में वृहद लोकअदालत में भाग लेकर समझौतों के माध्यम सें मामलों को निपटाने की अपील की गई है । गौरतलब है कि इस बार पूरे जिले में काफी व्यापक प्रचार प्रसार किया गया है जिसका उद्देश्य आम नागरिको को इसकी  जानकारी पहुंचा कर उन्हें आपसी समझोते के तहत मामले निपटाने प्रोत्साहित करना है  

Friday, December 07, 2012

किसान बेहाल दलाल मालामाल कांग्रेस का महाआन्दोलन मिशन 2013 का चुनावी दिखावा



अंग्रेजो के ज़माने से चले आ रहे भूमि अधिग्रहण कानून की वजह से आज भी हमारे देश के  किसानो को तथाकथित विकास के नाम पर जब चाहे उजाढ़ दिया जाता  है . पूंजीपति  उद्योगपति  पहले तो सरकारों को निवेश करने के नाम  पर झांसे में लेकर सरकारों से ही अपने तथाकथित उद्योग के लिए भूमि अधिग्रहण करवाती है और प्रभावित होने वालो को मुआवजा देने का दंभ भरा जाता है , मात्र कुछ लाख रुपये मुआवजा  देकर किसानो को हमेशा के लिए खेती से दूर ही कर दिया जाता है , कटनी जिले के बुजबुजा डोकरिया  गाँव में वेलस्पन पॉवर प्लांट के लिए जिनसे शासन भूमि लेना चाहता है उसमे से कई तो पूर्व में बाणसागर परियोजना के लिए विस्थापित किये जा चुकें है , सभी जानते है आज भी  बाणसागर परियोजना  पूरी नहीं हो पाई है . पॉवर प्लांट लगवा कर शासन की लालफीताशाही  उनसे महँगी बिजली खरीद कर आम उपभोक्ताओं को देती है . फायदा सिर्फ पूंजीपति उद्योगपतिओं , दलालों  को ही पहुँचता है , किसान भूमिहीन होकर विस्थापित होता जा रहा है , सरकारे विकास का ढिंढोरा पीट रहीं  है , विपक्ष सिर्फ राजनीती करता है.    2 दिसंबर को कांग्रेस के राष्ट्रीय , प्रदेशीय नेताओ की फ़ौज ने अपनी पूरी ताकत झोंक कर विजयराघवगढ़ एवं बरही तहसील के डोकरिया ,  बुजबुजा के किसानो के नाम पर अपनी राजनीती चमकाने की कोशिश  की है . 

वेलस्पन एनर्जी नाम की कंपनी यहाँ 11 हजार करोड़ की लागत से 1980 मेगावाट बिजली उत्पादन का  प्लांट लगाने जा रही है और प्रशासन इसके लिए शासन के आदेशानुसार भूमि अधिग्रहण कर रहा है , डोकरिया बुजबुजा के  कई किसान अपनी जमीन कंपनी को नहीं देना चाहते और इसका विरोध वह गाँव में चिता पर बैठ कर कर रहे है . किसानो के समर्थन में   कुछ संगठन और कुछ क्षेत्रीय  दल  है जबकि भाजपा पूरी तरह से कंपनी के पक्ष में है क्योकि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान  ने कंपनी के साथ पावर प्लांट स्थापना पर एमओयू पर हस्ताक्षर कर रखे है . कंपनी के पक्ष में सांसद जितेन्द्र सिंह बुंदेला और विजयराघवगढ़ विधयक संजय पाठक भी है यह  अलग बात है कि कांग्रेस द्वारा किये गए किसानो के कथित समर्थन  में  अपने आप को किसानो के पक्ष में दिखाने की संजय पाठक की मज़बूरी रही है,  जबकि विधायक पाठक  ने खुद कटनी कलेक्टर को एक पत्र कंपनी के समर्थन में पत्र क्रमांक 1361 द्वारा दिनांक 16 नवम्बर 2010 को लिखा है . पत्र में उन्होंने कंपनी का विरोध करने वालो को असामाजिक तत्त्व और मौकापरस्त बताया है , हालाँकि  इस बार खुद कांग्रेस यहाँ अपनी राजनैतिक रोटियां सेंकने आ पहुंची  इधर प्रदेश सरकार  ने स्पष्ट किया है प्लांट के लिए सिर्फ उन किसानो से ही भूमि ली जाएगी जो अपनी मर्जी से भूमि देना चाहते है , किसानो से  जोर जबरदस्ती की बात कर कांग्रेस जनता को गुमराह करना चाहती है . वेलस्पन कंपनी  कहती है कि उसके प्लांट को  राजनीती का शिकार न बनाया जाये       

वेलस्पन  कंपनी के हमदर्द कांग्रेस के इसी  इसी क्षेत्र  से विधायक संजय पाठक ही नजर आ रहे है.  पावर प्लांट से आम जनता और किसानो  का भला हो न हो इनका भला अवश्य होता दिख रहा है ,  इसपर कई सवाल पिछले दिनों संजय पाठक द्वारा बुलाई गयी पत्रकारवार्ता में सामने भी आये थे लेकिन जवाब  गोल मोल ही सामने आया था . जानकारी अनुसार मलेशिया में संजय पाठक ने कोयला खदाने ले रखी  है जिसका कोयला बाद में वह इसी प्लांट को बेचेंगे , प्लांट की अभी नीव नहीं डली है और कई फायदे अभी से पाठक परिवार की झोली में जाते दिखाई दे रहे है ऐसे में पिछले दिनों कांग्रेस द्वारा  आयोजित किये गए महाआन्दोलन कितना किसानो के पक्ष में निष्पक्ष कारगर साबित  होगा यह देखने वाली बात होगी . विजयराघवगढ़ - बरही क्षेत्र का बच्चा बच्चा भी प्लांट को संजय पाठक से जोड़कर देख रहा है .
  एक वर्ग पॉवर प्लांट के लिए भूमि अधिग्रहण  के विरोध को किसानो के समर्थन में न देखकर  इस पर अलग ही नजरिया रखता है , खुद विजयराघवगढ़ क्षेत्र के विधायक संजय पाठक 11 हजार करोड़ की लागत  से 2000 मेगावाट की इस बिजली परियोजना को जिले की अब तक की सबसे बड़ी परियोजना मानते है , विधायक पाठक का मानना  है कि इसके स्थापित होने से प्रत्यक्ष और अपत्यक्ष रूप से पांच हजार लोगों को रोजगार  और  व्यवसाय के अवसर प्राप्त होंगे साथ ही प्रदेश के विद्युत् उत्पादन में भारी वृधि होगी , प्लांट का विरोध करने वालो को मौकापरस्त तथा उनसे सतर्क रहने की आवश्यकता  वह जिला कलेक्टर को पत्र के माध्यम से दो साल पहले ही जाता चुके है यहाँ तक कि जिले के अन्य स्थानों पर स्वीकृत नए  उद्योगों की स्थापना में  अगर   व्यवधान पैदा हो रहे है तो उन्हें भी अपने विधानसभा क्षेत्र में स्थानांतरित करने की बात वह कलेक्टर को लिख चुके है ऐसे में कांग्रेस पार्टी द्वारा किया गया महानदोलन का मकसद यहाँ पूरी तरह से विफल होता दिख रहा है जब उंसी क्षेत्र के उनके अपने विधायक ही कंपनी के समर्थन में पूरी तरह से खड़े है को कांग्रेस का यह आन्दोलन सिर्फ चुनावी ही कहा जा सकता है