Saturday, December 29, 2012

यहाँ कानून का भय नहीं



नागरिकों  में कानून के प्रति विश्वास पैदा करना आवश्यक  
माधव नगर (कटनी - म प्र ) - आधी रात हो  या दिन  दहाड़े  शराबियों का हुडदंग वर्तमान में  अक्सर नजर आ  जाता है , चलती सडकों पर  गाली - गलौज  आम बात हो गई है   , अजनबी - अंजान व्यक्तियों की भरमार  पूछताश     करने  वाला कोई नहीं  .अधूरे नम्बरों वाले वाहन, बिना नंबर प्लेट की सडको पर भागती जेसीबी  मशीने या  दिन रात भागते डम्फर . यह कोई एक दिन की बात नहीं यहाँ रोजाना की  बात है यह सबकुछ दिख जायेगा  माधव नगर थाना  क्षेत्र अंतर्गत , पुलिस की बीट व्यवस्था नाम मात्र की बनकर रह गई है   . पिछले कुछ वर्षो  में अभूतपूर्व  परिवर्तन सा महसूस होता दिख रहा है माधव नगर में.  क्षेत्र के आस पास कई वैध अवैध  कालोनियाँ भी तन  गई  है और इसमें  कौन कौन लोग बस गए है यह उस कालोनी के लोग भी ठीक से नहीं जानते होंगे ऐसे में इस बात की सम्भावना और भी बढ़ जाती है कि कुछ न कुछ  गलत हो रहा है तो जरुरी नहीं की जिम्मेदार जन को इसकी खबर भी हो . अभी कुछ समय पहले ही मानसरोवर कालोनी में पुलिस ने मुखबिरी के आधार  पर एक गांजा सप्लायर को बरगंवा में सप्लाई  देते हुए पकड़ा था पुलिस की इसमें किरकिरी भी हुई थी कि यह सब  काफी दिनों से चलता रहा था . माधव नगर  से जुडी हुई कालोनियाँ  सीमा व्रती क्षेत्र में है इसलिए बाहर से आकर यहाँ चुपचाप अपना अवैध  धन्धा  चलाने वाले यहाँ बिलकुल नहीं होंगे इस बात की सम्भावना से इंकार तो कतई भी नहीं किया जा सकता . पुलिस   विभाग की इस ओर सुस्ती और लापरवाही  किसी दिन  क्षेत्र की कानून व्यवस्था पर ही भारी न पढ़ जाये  इसलिए पुलिस  से इस बात की अपेक्षा बढ़ जाती  है कि  समय रहते आवश्यक कदम जरुर उठाये  जायेंगे जिससे आम नागरिको का कानून के प्रति विश्वास मजबूत हो सके  

Thursday, December 27, 2012

अपना आरोप दूसरे के मत्थे थोपेंगे शंकरलाल विश्वकर्मा ?



जिस दिन से पुलिस ने  खनिज व्यापारी शंकरलाल विश्वकर्मा द्वारा किये गये 250 करोड़ रुपये  मूल्य के  बाक्साईट  अवैध उत्खनन का मामला उजागर किया है उस दिन से खनिज  विभाग ने जैसे  इस मामले पर चुप्पी सी साध ली है  बीएसएनएल  टेलीफोन एक्सचेंज  के पास तथा माधव नगर थाने के ठीक पीछे राधादेवी शर्मा नामक महिला की बाक्साईट खदान का वर्ष 1992 से नवीनीकरण ही नहीं हुआ  था और न ही इस खदान को कोई एनओसी प्राप्त थी लेकिन  मजे की बात देखिये खदान में उत्खनन लगातार जारी था और बाकायदा खनिज विभाग  इसका पिट पास जारी करता  रहा था , इससे जहाँ शासन को करोड़ो का नुक्सान हुआ है वही इसका सीधा फायदा किसने किसने उठाया होगा इसे एक गाँव में रहने वाला ग्रामीण भी अच्छी तरह से समझ सकता है . राधा देवी शर्मा को इस  खदान का आवंटन 1972 से लेकर 1992 तक ही हुआ था जबकि उत्खनन का काम विश्वकर्मा बंधू ही करते आयें है . इसकी पुख्ता जानकारी पुलिस अधीक्षक राजेश हिन्गंकर को जब मिली तो उन्होंने माधव नगर थाने के टी आई अखिल वर्मा को निर्देश देकर खनिज  उत्खनन में लिप्त तीन हिइवा डम्फर और  चार आदमियों को अवैध बाक्साईट  सहित पकड़ा इसके साथ ही जिले भर में खनिज चोरों की  वाहनों सहित  धरपकड़ शुरू हो गयी थी 

कटनी - शंकरलाल विश्वकर्मा की गिरफ़्तारी के बाद से खनिज विभाग सारी जवाबदारी पुलिस पर सौप कर  अपने आप को अन्जान बता रहा है  अगर अवैध उत्खनन की बात गलत है   तो विभाग क्यों  नहीं इस सम्बन्ध में अपना पक्ष आम   जनता के सामने  रखता है ? क्यों  वह 250  करोड़ के इस घोटाले पर  चुप्पी साधे   हुए है ? विभाग की चुप्पी से  अपने  आप ही 250 करोड़ के अवैध उत्खनन की बात की  पुष्टि   एक प्रकार से हो जाती है . पुलिस ने  भी शुरूआती  सक्रियता दिखाने के बाद तथा खनिज विभाग से मिल रहे असहयोग की वजह से अपने हाथ भी बांध रखे है , दोनों विभागों की इस खींचतान से अवैध उत्खनन कर्ताओं की फिर से मौज हो उठी है , माधव नगर क्षेत्र से गुजरने वाले डम्फर वैध खनिज लेकर जा रहे है  या अवैध यह आम नागरिको की समझ से परे है . शासन के नियमानुसार खनिजो का  परिवहन करने  वाले वाहनों का रजिस्ट्रेशन नंबर तथा उससे सम्बंधित खनिज खदान  की जानकारी खनिज विभाग को उपलब्ध करानी रहती है जिससे यह पता चल सके कि  निर्धारित खदान से खनिज सिर्फ निर्धारित किये गए वाहन ही  लेकर जायेंगे .इस मामले में भी विभाग विशेष रूचि नहीं ले रहा जिससे यह पता नहीं  चलता   कि  परिवहन किया जा रहा खनिज वैध है या अवैध . शंकरलाल विश्वकर्मा वाला मामला बेहद संगीन मामला है  इसने  खनिज विभाग की भूमिका पर कई सवाल खड़े कर दिए  है 

दूसरे  के मत्थे अपराध थोपने की जुगत में शंकरलाल विश्वकर्मा 

सूत्रों के अनुसार पहले गिरफ़्तारी तथा बाद में जमानत मिल जाने के बाद शंकरलाल विश्वकर्मा अब  यह चाहते है कि  राधादेवी  शर्मा का एक रिश्तेदार अवैध उत्खनन का मामला अपने ऊपर ले जिससे वह  खुद  को इस मामले से बरी  करवा ले , इसके बदले सारा खर्च और ऊपर से एक बड़ी रकम दिए जाने की बात भी  आम चर्चा भी गरम हो उठी है   इस सम्बन्ध में शंकरलाल विश्वकर्मा से उनका पक्ष जानने जब फ़ोन पर संपर्क किया गया तो उन्होंने मीटिंग में व्यस्त होने की बात कही  और कोई जवाब नहीं दिया  

Friday, December 14, 2012

15 दिसंबर को न्यायालीन लंबित मामले सुलझाने लोक अदालत, ज्यादा से ज्यादा नागरिक उठाये लाभ


कटनी - आम आदमी को कोर्ट कचहरी में लंबित मामलो से छुटकारा दिलाने के लिए 15 दिसंबर को   लोक अदालत वृहद स्तर पर लगायी जाएँगी ,लोकअदालत में  आपसी समझोते के आधार पर फैसला लिया जायेगा और इस फैसले के विरूद्ध कही अपील भी नहीं की जा सकेंगी , जिन भी पक्षकारो के मामले लंबित है चाहे उन्हें नोटिस नहीं भी मिले है वे भी इस लोक अदालत का लाभ उठा सकते है . दिनांक 15 दिसंबर को आयोजित वृहद लोक अदालत में आम नागरिक ज्यादा से ज्यादा लाभ प्राप्त कर सके इसी  उद्देश्य को लेकर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती कनकलता सोनकर द्वारा आज इस बात की जानकारी पत्रकारों को दी गयी , इस  वृहद लोक अदालत के परिप्रेक्ष्य में माननीय अध्यक्ष / जिला एवं सत्र-न्यायाधीश श्रीमती कनकलता सोनकर द्वारा  23 खंडपीठों का गठन करने संबंधी दिशा निर्देश जारी कर दिए गए है । उक्त खण्डपीठें न्यायालय एवं तहसील परिसर में कार्यरत रहेंगी । दोनों ही परिसरों में एक-एक लोकअदालत   पूछताछ   केन्द्र स्थापित किए गए है, जिनमें पक्षकार आकर लोकअदालतों की खंडपीठों एवं उनसे संबंधी अन्य जानकारी प्राप्त कर सकतें है  

विद्युत अधिनियिम संबंधी मामले खंडपीठ क्रमांक 4, पीठासीन अधिकारी - श्री उमेश श्रीवास्तव तृतीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश के खंडपीठ रहेंगे। अन्य न्यायालीन प्रकरणों संबंधी खंडपीठ न्यायालय में ही कार्यरत रहेंगी। उपभोक्ता मामलों की खंडपीठ, खंडपीठ क्रमांक 2 पीठासीन अधिकारी श्री डी0एन0शुक्ला उपभोक्ता फोरम में स्थित होगी । तहसील परिसर में राजस्व की तीन खंडपीठो सहित नगरनिगम, बैंक, श्रमविभाग, सहकारिता तथा पुलिस परामर्श केन्द्र की खंडपीठें भी कार्यरत रहेंगी । माननीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा आम जन से अधिक से अधिक संख्या में वृहद लोकअदालत में भाग लेकर समझौतों के माध्यम सें मामलों को निपटाने की अपील की गई है । गौरतलब है कि इस बार पूरे जिले में काफी व्यापक प्रचार प्रसार किया गया है जिसका उद्देश्य आम नागरिको को इसकी  जानकारी पहुंचा कर उन्हें आपसी समझोते के तहत मामले निपटाने प्रोत्साहित करना है  

Friday, December 07, 2012

किसान बेहाल दलाल मालामाल कांग्रेस का महाआन्दोलन मिशन 2013 का चुनावी दिखावा



अंग्रेजो के ज़माने से चले आ रहे भूमि अधिग्रहण कानून की वजह से आज भी हमारे देश के  किसानो को तथाकथित विकास के नाम पर जब चाहे उजाढ़ दिया जाता  है . पूंजीपति  उद्योगपति  पहले तो सरकारों को निवेश करने के नाम  पर झांसे में लेकर सरकारों से ही अपने तथाकथित उद्योग के लिए भूमि अधिग्रहण करवाती है और प्रभावित होने वालो को मुआवजा देने का दंभ भरा जाता है , मात्र कुछ लाख रुपये मुआवजा  देकर किसानो को हमेशा के लिए खेती से दूर ही कर दिया जाता है , कटनी जिले के बुजबुजा डोकरिया  गाँव में वेलस्पन पॉवर प्लांट के लिए जिनसे शासन भूमि लेना चाहता है उसमे से कई तो पूर्व में बाणसागर परियोजना के लिए विस्थापित किये जा चुकें है , सभी जानते है आज भी  बाणसागर परियोजना  पूरी नहीं हो पाई है . पॉवर प्लांट लगवा कर शासन की लालफीताशाही  उनसे महँगी बिजली खरीद कर आम उपभोक्ताओं को देती है . फायदा सिर्फ पूंजीपति उद्योगपतिओं , दलालों  को ही पहुँचता है , किसान भूमिहीन होकर विस्थापित होता जा रहा है , सरकारे विकास का ढिंढोरा पीट रहीं  है , विपक्ष सिर्फ राजनीती करता है.    2 दिसंबर को कांग्रेस के राष्ट्रीय , प्रदेशीय नेताओ की फ़ौज ने अपनी पूरी ताकत झोंक कर विजयराघवगढ़ एवं बरही तहसील के डोकरिया ,  बुजबुजा के किसानो के नाम पर अपनी राजनीती चमकाने की कोशिश  की है . 

वेलस्पन एनर्जी नाम की कंपनी यहाँ 11 हजार करोड़ की लागत से 1980 मेगावाट बिजली उत्पादन का  प्लांट लगाने जा रही है और प्रशासन इसके लिए शासन के आदेशानुसार भूमि अधिग्रहण कर रहा है , डोकरिया बुजबुजा के  कई किसान अपनी जमीन कंपनी को नहीं देना चाहते और इसका विरोध वह गाँव में चिता पर बैठ कर कर रहे है . किसानो के समर्थन में   कुछ संगठन और कुछ क्षेत्रीय  दल  है जबकि भाजपा पूरी तरह से कंपनी के पक्ष में है क्योकि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान  ने कंपनी के साथ पावर प्लांट स्थापना पर एमओयू पर हस्ताक्षर कर रखे है . कंपनी के पक्ष में सांसद जितेन्द्र सिंह बुंदेला और विजयराघवगढ़ विधयक संजय पाठक भी है यह  अलग बात है कि कांग्रेस द्वारा किये गए किसानो के कथित समर्थन  में  अपने आप को किसानो के पक्ष में दिखाने की संजय पाठक की मज़बूरी रही है,  जबकि विधायक पाठक  ने खुद कटनी कलेक्टर को एक पत्र कंपनी के समर्थन में पत्र क्रमांक 1361 द्वारा दिनांक 16 नवम्बर 2010 को लिखा है . पत्र में उन्होंने कंपनी का विरोध करने वालो को असामाजिक तत्त्व और मौकापरस्त बताया है , हालाँकि  इस बार खुद कांग्रेस यहाँ अपनी राजनैतिक रोटियां सेंकने आ पहुंची  इधर प्रदेश सरकार  ने स्पष्ट किया है प्लांट के लिए सिर्फ उन किसानो से ही भूमि ली जाएगी जो अपनी मर्जी से भूमि देना चाहते है , किसानो से  जोर जबरदस्ती की बात कर कांग्रेस जनता को गुमराह करना चाहती है . वेलस्पन कंपनी  कहती है कि उसके प्लांट को  राजनीती का शिकार न बनाया जाये       

वेलस्पन  कंपनी के हमदर्द कांग्रेस के इसी  इसी क्षेत्र  से विधायक संजय पाठक ही नजर आ रहे है.  पावर प्लांट से आम जनता और किसानो  का भला हो न हो इनका भला अवश्य होता दिख रहा है ,  इसपर कई सवाल पिछले दिनों संजय पाठक द्वारा बुलाई गयी पत्रकारवार्ता में सामने भी आये थे लेकिन जवाब  गोल मोल ही सामने आया था . जानकारी अनुसार मलेशिया में संजय पाठक ने कोयला खदाने ले रखी  है जिसका कोयला बाद में वह इसी प्लांट को बेचेंगे , प्लांट की अभी नीव नहीं डली है और कई फायदे अभी से पाठक परिवार की झोली में जाते दिखाई दे रहे है ऐसे में पिछले दिनों कांग्रेस द्वारा  आयोजित किये गए महाआन्दोलन कितना किसानो के पक्ष में निष्पक्ष कारगर साबित  होगा यह देखने वाली बात होगी . विजयराघवगढ़ - बरही क्षेत्र का बच्चा बच्चा भी प्लांट को संजय पाठक से जोड़कर देख रहा है .
  एक वर्ग पॉवर प्लांट के लिए भूमि अधिग्रहण  के विरोध को किसानो के समर्थन में न देखकर  इस पर अलग ही नजरिया रखता है , खुद विजयराघवगढ़ क्षेत्र के विधायक संजय पाठक 11 हजार करोड़ की लागत  से 2000 मेगावाट की इस बिजली परियोजना को जिले की अब तक की सबसे बड़ी परियोजना मानते है , विधायक पाठक का मानना  है कि इसके स्थापित होने से प्रत्यक्ष और अपत्यक्ष रूप से पांच हजार लोगों को रोजगार  और  व्यवसाय के अवसर प्राप्त होंगे साथ ही प्रदेश के विद्युत् उत्पादन में भारी वृधि होगी , प्लांट का विरोध करने वालो को मौकापरस्त तथा उनसे सतर्क रहने की आवश्यकता  वह जिला कलेक्टर को पत्र के माध्यम से दो साल पहले ही जाता चुके है यहाँ तक कि जिले के अन्य स्थानों पर स्वीकृत नए  उद्योगों की स्थापना में  अगर   व्यवधान पैदा हो रहे है तो उन्हें भी अपने विधानसभा क्षेत्र में स्थानांतरित करने की बात वह कलेक्टर को लिख चुके है ऐसे में कांग्रेस पार्टी द्वारा किया गया महानदोलन का मकसद यहाँ पूरी तरह से विफल होता दिख रहा है जब उंसी क्षेत्र के उनके अपने विधायक ही कंपनी के समर्थन में पूरी तरह से खड़े है को कांग्रेस का यह आन्दोलन सिर्फ चुनावी ही कहा जा सकता है  

Wednesday, November 21, 2012

श्रम विभाग ने जारी किये है जरुरी निर्देश



            कटनी /  श्रम विभाग ने नगर निगम क्षेत्र कटनी नगर पालिका,  नगर परिषद कैमोर, विजयराघवगढ, बरही के समस्त दुकानदारों, प्रतिष्ठानों, होटल, रेस्टोरेन्ट के समस्त नियोजको  को  उनके पंजीयन और श्रम कानूनों सम्बंधित जरुरी निर्देश जारी किये है  कि सभी नियोजक अपने पंजीयन प्रमाण पत्र का नवीनीकरण   01 दिसम्बर के पूर्व अनिवार्य रूप से श्रमपदाधिकारी कार्यालय से कराना सुनिश्चित करें।
  श्रम विभाग ने समस्त स्थापना वाणिज्यक संस्थानों के नियोजकों से अपील की है कि अधिनियम की धारा 13 (1) के अंतर्गत अपने संस्थानों को निर्धारित साप्ताहिक अवकाश दिवस में बंद रखें। अधिनियम की धारा 9 (1) ए .बी के अंतर्गत संस्थान प्रातः 8  बजे के पूर्व एवं रात्रि 10 बजे के पश्चात संस्थान/दुकानें/प्रतिष्ठान न खोले जावे।
पालन न होने की स्थिति में श्रम विभाग को  वैधानिक कार्यवाही हेतु बाध्य होना पडेगा। जिन संस्थानों में कर्मचारी कार्यरत हैं, उन कर्मचारियों को साप्ताहिक अवकाश कार्य करने की अवधि 8 घंटे शासन द्वारा सुनिश्चित की गई है। यदि किसी नियोजक द्वारा निर्धारित अवधि से ज्यादा कार्य कराया जाएगा तो ऐसे कर्मचारियों को प्रति घंटे दुगनी की दर से मजदूरी का भुगतान किया जावे। कर्मचारियों से संबंधित फार्म (एन) रजिस्टर अनिवार्य रूप से रखें जावे। दिसम्बर  से संस्थान में कार्यरत कर्मचारी को शासन द्वारा एक अक्टूबर 12 से निर्धारित वेतन दर अकुशल 190, अर्द्धकुशल 195 एवं कुशल श्रमिक के लिए 201 रू0 प्रति दिन की दर से भुगतान  करने के निर्देश हैं

Monday, November 19, 2012

15 दिसंबर को लोक अदालत - विद्युत् उपभोक्ता उठायें योजनाओ का लाभ

कटनी - आम नागरिको और बिजली विभाग के बीच चल रहे कई न्यायालीन मामले आपसी सहमति से निपटाए जा सकते है , बशर्ते नागरिक अपने ऊपर बकाया बिजली बिल की रकम का एक हिस्सा जमा कर देता है .  निम्न श्रेणी के अंतर्गत जारी बिजली कनेक्शनो के बकाया बिल राशि को लेकर कई उपभोक्ताओ और बिजली विभाग के बीच कई न्यायालीन प्रकरण चल रहे है , जिसमे न सिर्फ उपभोक्ता परेशान होता रहता है बल्कि  बिजली विभाग के लिए यह कोई अच्छी बात नहीं रहती . शायद इसी बात को ध्यान में रखकर आगामी १५ दिसंबर को वृहद  स्तर पर एक लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है जिसमे बिजली विभाग के अधिनियम धारा १३५ और  १३८ के न्यायालयीन  प्रकरण आपसी सहमती से निपटाए जा सकेंगे  .इस लोकअदालत को पूर्ण रूप से सफल बनाने के लिए कटनी  जिला न्यायाधीश  तथा अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्रीमती कनकलता सोनकर द्वारा सम्बंधित विभागों के साथ एक बैठक का आयोजन भी किया गया है .     
                                आयोजित बैठक  मे अधीक्षण यंत्री श्री जैन द्वारा विद्युत विभाग द्वारा दी जाने वाली छूट के वारे में बताया गया है  कि विद्युत अधिनियम 135 व 138 के अंतर्गत न्यायालय मे लंबित प्रकरणों में निम्न श्रेणी के 1 समस्त घरेलु 2 समस्त कृषि 3 ग्रामीण क्षेत्र के 5 किलोवॉट भार तक के गैर घरेलू 4 ग्रामीण क्षेत्र के 10 अश्वशक्ति भर तक औधौगिक उपभोक्ताओं को कंपनी द्वारा सिविल दायित्व क्षतिपूर्ति राशि में 30 प्रतिशत छूट दी जावेगी बशर्ते उपयोगकर्ता/उपभोक्ता/सिविल दायित्व की राशि का एकमुश्त भुगतान करता है ।
                                   विद्युत अधिनियम की धारा 138 के लंबित प्रकरणों के निराकरण हेतु समस्त निम्नदाब उपभोक्ता - दिनांक 30.09.2012 की स्थिति मे कुल बकाया राशि एक मुश्त जमा करने पर संपूर्ण सरचार्ज राशि मे छूट। किसान मित्र योजना के तहत समस्त स्थाई/अस्थाई विच्छेदित एवं संयोजित कृषि उपभोक्ताओं के लिए 30.09.2012 की स्थिति में बकाया राशि मे लगे सरचार्ज की राशि में पूर्ण राशि की छूट (एक मुश्त ऊर्जा प्रभार राशि  जमा करने पर ) हितकारणी योजना के तहत दिनांक 30.09.12 की स्थिति में बकाया राशि कि 50 प्रतिशत राशि ( विद्यिुत शुल्क एवं उपकर छोड़कर ) एक मुश्त भुगतान करने पर 50 प्रतिशत राशि एवं इसमें शामिल सरचार्ज की राशि   में 100 प्रतिशत की छूट दी जायेगी । शहरी गंदी मलीन बस्तियों में निवासरत घरेलू उपभोक्ताओ को दिनांक 30.02.12 की स्थिति मे बकाया मूल राशि को एक मुश्त भुगतान करने पर  100 प्रतिशत की छूट है।  उपरोक्त योजनाओं से संबंधित आवेदन विद्युत विभाग से प्राप्त होंगे । श्री बी.के. जैन, अधीक्षण यंत्री विद्युत विभाग के द्वारा समस्त विद्युत उपभोगताओं से अपील की गई है कि वे योजनाओं का लाभ दिनाक 15 दिसम्बर 2012 को आयोजित लोक अदालत मे प्राप्त कर सकते है । 
                              बैठक  में लोकअदालत समन्वयक श्री आर.के गुप्ता विशेष न्यायाधीश, श्री उमेश श्रीवास्तव ए.डी.जे., श्री चन्द्रदेव शर्मा ए.डी.जे. श्री दीपक बंसल न्यायिक मजिस्टेट, श्री उमाशंकर अग्रवाल सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्रीमती पूनम तिवारी जिला विधिक सहायता अधिकारी , श्री बी.के. जैन, अधीक्षण यंत्री विद्युत विभाग श्री आर.बी.सिंह आयुक्त, नगर निगम ने भाग लिया । 

Saturday, October 20, 2012

भारत के हर नागरिक का होगा " आधार "


देश के प्रत्येक नागरिक को भारत सरकार एक विशिष्ठ पहचान पत्र आधार उपलब्ध करा रही है , इस पहचान पत्र के जरिये सरकार अब प्रत्येक नागरिक तक उनसे जुडी योजनाये पहुचाई जाएँगी , नागरिको को सरकार की तरफ से मिलने वाली सब्सिडी अब इस आधार कार्ड के जरिये उनतक सीधे पहुचेगी , यह आधार कोई पहचान  पत्र भर नहीं है बल्कि यह नागरिको का आधार बन जाएगी , पाठको के लिए आधार कार्ड से जुडी  जानकारी यहाँ उपलब्ध कराई जा रही है 

आधार क्या हैः-

आधार 12 अंकों की एक विशिष्ट संख्या है जिसे भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (भा.वि.प.प्रा.) सभी निवासियों के लिये जारी करेगा। संख्या को केन्द्रीकृत डाटा बेस में संग्रहित किया जायेगा एवं प्रत्येक व्यक्ति की आधारभूत जनसांख्यिकीय एवं बायोमैट्रिक सूचना - फोटोग्राफ, दसों अंगुलियों के निशान एवं आंख की पुतली की छवि के साथ लिंक किया जायेगा।


आधार होगा:
किफायती तरीके व सरलता से ऑनलाइन विधि से सत्यापन योग्य।
सरकारी एवं निजी डाटाबेस में से डुप्लिकेट एवं नकली पहचान को बड़ी संख्या में समाप्त करने में अनूठा एवं पर्याप्त क्षमता युक्त।
एक क्रम-रहित(रेन्डम) उत्पन्न संख्या, किसी भी जाति, पंथ, मजहब एवं भौगोलिक क्षेत्र आदि के वर्गीकरण पर आधारित नहीं हैं।
आधार क्यों?
आधार आधारित पहचान की दो अद्वितीय विशेषतायें होंगी:-
सार्वभौमिकता, यह सुनिश्चित है कि आधार को समय के साथ देश भर में सेवा प्रदाताओं द्वारा मान्य एवं स्वीकार किया जायेगा।
प्रत्येक निवासी आधार संख्या हेतु पात्रता रखता है।
संख्या के फलस्वरूप सार्वभौमिक पहचान अवसंरचना निर्मित होगी जिस पर देश भर में पंजीयक एवं एजेंसी उनकी पहचान आधारित अनुप्रयोगों का निर्माण कर सकते हैं।
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण, (भा.वि.प.प्रा.) आधार संख्या हेतु निवासियों को नामांकित करने के लिये देश भर के विभिन्न पंजीयकों के साथ साझेदारी करेगा, ऐसे पंजीयक राज्य सरकारों, राज्य- सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों, बैंक, टेलीकॉम कंपनियों इत्यादि को शामिल कर सकते हैं। ये पंजीयक आगे निवासियों को आधार में नामांकित करने हेतु नामांकन एजेंसियों के साथ भागीदारी कर सकते हैं।
आधार सरकारी व निजी एजेंसियों एवं निवासियों के मध्य विश्वास में वृद्धि सुनिश्चित करेगा। एक बार निवासियों का आधार के लिये नामांकन होते ही सेवा प्रदाता को सेवा प्रदान करने से पहले के.वाई.आर. संबंघी दस्तावेजों की जांच जैसी समस्या का सामना नहीं करना होगा। वे अब निवासियों को बिना पहचान दस्तावेजों के सेवाए देने से इन्कार नहीं कर सकते हैं। निवासियों को भी बार- बार दस्तावेजों के माध्यम से पहचान उपलब्ध कराने की परेशानी नहीं होगी। जब भी वे कई सेवाओं जैसे बैंक में खाता खुलवाने, पासपोर्ट या ड्राइविंग लाइसेंस बनाने की आवश्यकता महसूस करेंगे, आधार संख्या पर्याप्त होगी।
पहचान के स्पष्ट सबूत प्रदान कर, आधार, निर्धनों एवं दलितों को सेवाओं जैसे औपचारिक बैंकिंग प्रणाली तथा सरकारी एवं निजी क्षेत्र के प्रतिष्ठानों की कई अन्य सेवाओं का आसानी से उपयोग करने हेतु अवसर प्रदान कर सशक्त बनाता है। भा.वि.प.प्रा. का केन्द्रीयकृत प्रौद्योगिक अवसंरचना 'कभी भी, कहीं भी, किसी भी तरह'' प्रमाणीकरण को सक्षम करेगी। इस तरह आधार प्रवासियों को भी पहचान की गतिशीलता प्रदान करेगा। आधार प्रमाणीकरण सजीव ऑनलाइन अथवा ऑफलाइन दोनों तरीके से किया जा सकता है। निवासियों को दूर से अपनी पहचान स्थापित करने हेतु सेलफोन/लैण्ड लाइन कनेक्शन सजीव प्रमाणीकरण की अनुमति प्रदान करेगा। सजीव आधार से जुड़ा पहचान सत्यापन ग्रामीणों एवं निर्धनों को वैसा ही लचीलापन उपलब्ध करायेगा जिस तरह से शहरी धनी वर्तमान में अपनी पहचान सत्यापित करते हैं तथा सेवाओं जैसे कि बैंकिंग एवं अन्य का उपयोग करते हैं। आधार, नामांकन पूर्व उचित सत्यापन की भी मांग करता है, लेकिन प्रत्येक व्यक्ति को इसमें सम्मिलित किया जाना सुनिश्चित है। भारत में, मौजूदा पहचान डाटाबेस नकली, धोखाधड़ी, डुप्लिकेट एवं छद्म हितग्राहियों की समस्या से भरा पड़ा है। आधार डाटाबेस में इन समस्याओं को रोकने के लिये भा.वि.प.प्रा. ने निवासियों को जनसांख्यिकीय एवं बायोमैट्रिक जानकारियों के उचित सत्यापन के साथ अपने डाटाबेस में नामांकित करने की योजना बनाई है। जो यह सुनिश्चित करेगा कि संग्रहित आंकड़े कार्यक्रम के प्रारंभ से ही सही हैं। हालांकि अधिकतर दलित एवं निर्धन लोगों के पास पहचान संबंधी दस्तावेजों का अभाव रहता है और आधार उनको अपनी पहचान साबित करने का पहला रूप हो सकता है। भा.वि.प.प्रा. यह सुनिश्चित करेगा कि उसका अपने निवासी को जाने के.वाई.आर. का मानक निर्धनों के नामांकन में बाधा न बने इसके लिये परिचयदाता प्रणाली मानकों के अनुसार विकसित की गई है जिनके पास दस्तावेजों का अभाव है। इस प्रणाली के द्वारा अधिकृत व्यक्ति (परिचयदाता) जिसके पास पहले से ही आधार है, उन निवासियों का, जिनके पास कोई पहचान संबंधी दस्तावेज उपलब्ध नहीं है, परिचय दे सकता है ताकि वे अपना आधार प्राप्त कर सके ।
आधार कौन प्राप्त कर सकता है?
एक व्यक्ति जो कि एक भारतीय है एवं भा.वि.प.प्रा. द्वारा निर्धारित सत्यापन प्रक्रिया को पूरा करता है, एक आधार प्राप्त कर सकता है।

आधार कैसे प्राप्त करें?:-
आधार प्राप्त करने की विधि-स्थानीय मीडिया द्वारा उपर्युक्त समय पर प्रचारित किया जायेगा, जिसके आधार पर निवासी निकट के नामांकन शिविर पर जाकर आधार हेतु पंजीयन करा सकते हैं। निवासियों को प्राथमिक तौर पर कुछ दस्तावेजों, जो कि मीडिया के विज्ञापनों में निर्देशित किया जायेगा को साथ लाना होगा।
आधार हेतु पंजीयन कराने के साथ ही निवासियों को दसों अंगुलियों के निशान एवं आंख की पुतली की छवि हेतु बायोमैट्रिक स्कैनिंग से गुजरना होगा। इसके बाद उनका फोटो लिया जायेगा एवं कार्य सम्पन्न होने के बाद एक नामांकन संख्या प्रदान किया जायेगा। नामांकन एजेंसी अनुसार निवासी को 20 से 30 दिनों के भीतर आधार संख्या जारी की जायेगी।

Friday, October 05, 2012

सभ्य समाज के बीच में शराब के "अवैध अड्डे " आबकारी विभाग का संरक्षण, कलेक्टर की नहीं चल रही




                                                   नशा मुक्ति अभियान ढकोसला साबित  

कटनी ( मध्य प्रदेश  ) जिस जिले के मुखिया कलेक्टर के आदेश शराब ठेकेदार रद्दी की टोकरी में डाल दे , आबकारी विभाग खुद शराब को अवैध तरीके से बिकवाने में लगा हो , रेस्टोरेंट की आड़  में शराब के अवैध अड्डे पनप रहे हो . ऐसी  बातो से सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि उस  जिले में बाकि तमाम नियम कायदों का क्या हश्र होता होगा . उधर  प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान  कमिश्नरो कलेक्टरों को खड़े होने की हिदायत दे रहे है जिससे तमाम व्यवस्थाएं सुचारू रह सके तो इधर प्रशासन तरह तरह के माफिया के आगे नतमस्तक सा  नजर आ रहा है , अब अगर कोई खुद खड़ा होना ही नहीं चाहे  तो मुख्यमंत्री भला क्या करे ? प्रशासन की  लुल पुंज हो चली कार्यप्रणाली ने कटनी जिले में हर तरह के माफिया को मजबूत करने का प्रयास किया है इसका उदहारण फि़लहाल सिर्फ आबकारी विभाग और  इससे जुड़े शराब ठेकेदारों के व्यवसाय करने के उन तरीको से लिया जा सकता है जिससे नुकसान न सिर्फ वर्तमान सामाजिक परिद्रश्य पर ही पड़ता हुआ दिखाई देता है बल्कि इन्ही कारणों की वजह से भयानक और बदसूरत कल भी दिखाई देने लगता है 

 वन्शरूप  वार्ड बरगवां  स्थित   गड्डा टोला के लिए आवंटित हुई   देसी शराब दुकान  को ठेकेदार  विकास दुबे ने  सार्वजनिक हितो को ताक में रखते हुए  मुख्य मार्ग पर स्थापित कर रखी है ,वैसे तो कलेक्टर ए के सिंह ने 26 जून 2012 को  15 दिनों के अन्दर  दुकान गड्डा टोला की निर्धारित सीमा में  स्थानांतरित करने का आदेश जारी किया था  लेकिन ठेकेदार ने अपनी मन मर्जी जारी रखते हुए  दुकान नहीं हटाई . इसे लेकर  सितम्बर माह में स्थानीय पार्षदों और नागरिको ने एक हस्ताक्षर युक्त शिकायती पत्र भी  कलेक्टर  को सौंपा  है  लेकिन स्थिति अभी भी यथावत है . सूत्रों की माने तो खुद आबकारी विभाग ही ठेकेदार के साथ है ऐसे में जिला कलेक्टर के आदेश एक प्रकार से रद्दी की टोकरी में डले हुए दिखाई दे रहे है . महीनो तक अगर जिले के मुखिया कलेक्टर के आदेश पर कार्यवाही न हो सके तो इसे उचित को हरगिज नहीं कहा जा सकता

आबकारी विभाग के संरक्षण में  शराब के  अवैध अड्डे 

राष्ट्रीय राजमार्ग बरगवां स्थित राय दरबार , झिन्झरी स्थित मुरली ढाबा ,जायका रेस्टोरेंट ,भास्कर ढाबा में रोजाना करीब 50 हजार रुपये से ज्यादा की  शराब अवैध रूप से बेचीं और पिलाई जा रही है , माधव नगर , बरगवां , खिरहनी में अंग्रेजी शराब  दुकान चलाने वाले जबलपुर के सिंडिकेट ठेकेदार शिवहरे की माधव नगर स्थित दुकान से शराब यहाँ  पहुंचाई  जाती है , हर माह  आबकारी  विभाग  प्रायोजित तरीके से मामूली प्रकरण अलग अलग नाम पर  बनाता है जिससे विभाग सहित अवैध दुकान , पेकारियां चलाने वाले भी बेफिक्र रहते है . सूत्रों के अनुसार आबकारी विभाग के अधिकारी  इसकी एवज में  एक मोटी रकम बदस्तूर  प्रतिमाह वसूलते  है अन्यथा क्या कारण है जो ऐसे अड्डे आराम से संचालित किये जा रहे है  

माधव नगर में ही दर्जनों शराब के अवैध अड्डे आबाद 

बंगला लाइन में परसराम मन्नुमल  दाल मिल के सामने ,हरिजन मोहल्ला , अमीर गंज , गाँधी मार्केट , गुल्लू की होटल ,  हाऊसिंग बोर्ड में  खुद मुरली ढाबे वाले के घर के पास आदि इत्यादि ऐसी दर्जनों जगह है जहा शराब पीने की सुविधा आराम से मिल जाएगी . आबकारी और पुलिस विभाग की दरियादिली ऐसे अड्डो के इजाफे की मददगार साबित हो रही है . ध्यान देने वाली बात यह  है कि ऐसी जगहों पर पीने वालो में  रोजाना कमा कर खाने वालो की संख्या ही ज्यादा रहती है रोजाना कमाने वाले ऐसे अवैध अड्डो में अपनी दिन भर की कमाई नशे की आदत के चलते उड़ा आते है या यूँ कहे  कि आस पास ज्यादा स्थानों की सुलभता होने के कारण भी पीने का शौंक पनप रहा है .सभ्य समाज जिम्मेदार विभागों के इस रवैये से हैरान भी है , इससे पहले की हर गली मोहल्ला शराब के अड्डो में तब्दील हो जाये और इसकी वजह से सब बदसूरत सा हो जाये जिला प्रशासन  और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियो को इस और ध्यान देकर अविलंभ कार्यवाही करनी चाहिए जिससे नागरिको के मन में कानून का सम्मान बना रह सके  

Thursday, September 27, 2012

अवैध उत्खनन पर अब पुलिस कर रही कार्यवाही - 1992 से चल रही थी अवैध खदान, मामला किया उजागर

अवैध खनन क्या होता है और इससे क्या क्या नुकसान होता है आमतौर पर इससे आम जनता बेखबर ही रहती है शहरो गाँव के बीच से होकर गुजरने वाले छोटे बड़े वाहन में लदा  हुआ खनिज कहा आ जा रहा है इस बात पर भी आम जनता का ध्यान नहीं रहता क्योकि आम जनता इस बात पर ही विश्वास रखती है की इसपर नजर और कार्यवाही करने  के लिए  खनिज विभाग है . कटनी जिला विगत  कई वर्षो से वैध अवैध खनन  के  मामलो में राष्ट्रीय स्तर  पर सुर्खियाँ बटोरता रहा है लेकिन  जिम्मेदार खनिज विभाग द्वारा कोई कार्यवाही न होने की सूरत में  करोड़ों  रुपये के राजस्व  की चपत मध्य प्रदेश शासन को लग चुकी है इसी के चलते  अब कटनी जिले में अवैध उत्खनन को लेकर पुलिस ने अपनी कमर कस ली है , मात्र कुछ ही दिनों में हुई कार्यवाही से  पुलिस को  बड़ी कामयाबी भी मिलती दिख रही है. 1 पोकलेन मशीन ,1 जे सी बी मशीन ,4 डम्फर , 6 ट्रेक्टर सहित बड़ी मात्रा में बोक्साईट  जप्त करने के  साथ  साथ पुलिस ने एक ऐसा बड़ा मामला उजागर कर दिया है जिसके उजागर होने से पूरा खनिज विभाग ही कई  सवालो के घेरे में आ गया है .पुलिस द्वारा लगातार की जा रही कार्यवाही से कई चौकाने वाले तथ्य भी सामने आये है कि खनिज सम्पदा से शासन को प्राप्त होने वाले  राजस्व में सुनियोजित तरीके से सेंधमारी की जा रही है . नाम मात्रा के लिए खदान आवंटित कराकर उससे लगी शासकीय व वन भूमि पर बड़े स्तर पर खुदाई कर खनिजो का परिवहन किया जाता है , खुदाई करने वाली जगहों पर बड़े बड़े गड्ढे हो जाते है जिससे आये दिन दुर्घटनाये होती रहती है . पुलिस द्वारा कराये गए सर्वे से तमाम ऐसे तथ्य उभर कर सामने आये है जिससे यह साबित होता है कि  एक तरफ तो शासन को करोडो  रुपये का नुकसान हो रहा है वही दूसरी तरफ इनके द्वारा किये गए गड्ढों  और अवैध परिवहन की धमाचौकड़ी  का शिकार बेकसूर नागरिक होते  है   .खनिज विभाग की निष्क्रियता के चलते ही अवैध उत्खनन करने वालो के हौंसले बुलंद हुए है जिसे अब पुलिस विभाग ने गंभीरता से लिया है अब इस पर  तत्पर कार्यवाही का दौर  शुरू है 

कटनी - राधा देवी शर्मा नामक महिला की बोक्साईट  खदान का  वर्ष 1992 से नवीनीकरण  नहीं हुआ है  और न ही इस खदान को एन ओ सी प्राप्त  है   लेकिन  खदान से उत्खनन लगातार जारी था बाकायदा परिवहन होने वाले वाहनों का पिटपास खनिज विभाग से जारी होता रहा और शासन को राजस्व की चपत लगती रही .पुलिस अधीक्षक राजेश हिन्गंकर को  26 सितम्बर को इसकी जानकारी मिलने पर उनके निर्देशानुसार  माधव नगर टी आई अखिल वर्मा ने माधव नगर थाने के पीछे संचालित होने वाली खदान में पहुंचकर  उत्खनन में लगी     1 पोकलेन मशीन , 3 हाइवा डम्फर MP 21 H 1187 ,MP  21  H 0687 , MP 21 H 1887 सहित 4 व्यक्तियों को अपनी गिरफ्त में लेकर 45 टन अवैध बोक्साईट जप्त कर लिया है  और अवैध उत्खनन करने वाले जे पी विश्वकर्मा के विरूद्ध भारतीय दंड विधान की धरा 379 व 4 / 21 खनिज अधिनियम के तहत अपराध दर्ज कर दिया है , गौरतलब है कि  राधा देवी शर्मा नामक महिला  को माधव नगर थाने के पीछे स्थित खदान का आवंटन 1972 से लेकर 1992 तक ही हुआ था जबकि इसपर उत्खनन विश्वकर्मा बन्धु ही करते आ रहे है , इस बड़ी कार्यवाही को अंजाम देने में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अमित सांघी , सी एस पी धनंजय शाह तथा माधव नगर थाना प्रभारी अखिल वर्मा की भूमिका रही है 


जिले  में अवैध उत्खनन के विरूद्ध पुलिस की कार्यवाही 
बिना अनुमति  खदान से खनिज निकाले जाने वाले इस मामले से पहले  बहोरीबंद पुलिस ने  अवैध मुरुम के मामले में 6 जनों को गिरफ्तार  कर 6 ट्रेक्टर जप्त किये है जिसमे 4 ट्रेक्टर तो बिना नंबर के थे ,यहाँ पर पुलिस ने धारा 379 , 511 व 4 / 21 खनिज अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था . स्लीमनाबाद पुलिस ने ग्राम भूला में  1 जे सी बी मशीन ,अवैध बोक्साईट तथा ग्राम अमोच में 1 डम्फर MP -17 G 0963 , 55 टन बोक्साईट सहित 4  लोगो को पकड़ा है जिनसे  पर्दे के पीछे से इनका संचालन करने वालो का पता करने में पुलिस जुटी हुई है .  



जनता भी अब आ रही आगे 
जिले भर में पुलिस की प्रभावी कार्यवाही के चलते अब आम जनता भी पुलिस को सूचनाये देने में आगे आ रही है .27 सितम्बर को माधव नगर थाने ,में आयोजित प्रेस वार्ता में जनता के इस कदम से  पुलिस अधीक्षक राजेश हिन्गंकर खासे उत्साहित नजर आये उन्होंने इस बात का पुनः विश्वास दिलाया है कि कानून सर्वोपरि है और जो  भी कानून के दायरे से बाहर जाकर काम करेगा , उसपर कार्यवाही अवश्य होगी 

तालाब गहरीकरण सौन्दरीयकरण के नाम 20 लाख का घोटाला भ्रष्ट ठेकेदार , इंजीनियर पर कार्यवाही नहीं

नगर निगम कटनी द्वारा  विकास कार्यो के नाम पर खर्च की जाने वाली  80 प्रतिशत से भी  ज्यादा राशि   भ्रस्टाचार की भेंट चढ़ रही है ,  महापौर की अध्यक्षता में आयोजित होने वाली  मेयर इन काउन्सिल की बैठको में लाखो करोडो के कार्य के प्रस्ताव  कागजो में मंजूर  होकर ज्यादातर  कागजो में ही तैयार हो जा रहे  है ,भ्रष्ट अधिकारी अपनी स्वीकृति लगाकर लाखो रुपये भ्रष्ट ठेकदारो की जेब में पहुँचाने का रास्ता बनाने का काम कर रहे है . इतना सब होने के बावजूद  क्या इस बात पर यकीन किया जा सकता है कि परिषद्  इस भ्रस्टाचार से  वाकई में अंजान है ? क्या आम आदमी से कर इसलिए ही वसूला जाता है कि इसे जैसे तैसे कर भ्रस्टाचार कि भेंट चढ़ाया  जाये ?   आम जनता की गाढ़ी कमाई से वसूले गए कर को विकास कार्यो के नाम नगर निगम के भ्रष्ट ठेकेदार और भ्रष्ट अधिकारी सब मिलकर डकार रहे है और मामले उजागर होने के बावजूद  जिम्मेदार जनों द्वारा  रहस्मय चुप्पी साधना भी कई सवालो को जन्म दे रही है . इन्ही  कारणों  से  तो  भ्रष्टाचारियों  की हिम्मत बढती है और उनके  ऐसे  कारनामे  सुनियोजित तरीके से निर्विघ्न संपन  हो जाते है . माधव नगर के संत कंवरराम वार्ड स्थित  तालाब के गहरीकरण और सौन्दरीयकरण के नाम पर  20  लाख रुपये का एक घोटाला सूचना के अधिकार के उपयोग से  सामने आया है , घोटाले की शिकायत  भी की जा चुकी है लेकिन कार्यवाही न होने से कई शंकायें उठ खड़ी हुई है     

कटनी - (प्रबल सृष्टि विशेष ) मेयर इन कौंसिल ने 8 जून 2009 को संत कंवरराम वार्ड स्थित तालाब के गहरीकरण और सौन्दरीयकरण का प्रस्ताव पास किया , 27 जून 2009 को निविदा आमंत्रित की गयी , 7 नवम्बर 2009 को ठेकेदार एस एन खम्परिया  के साथ कार्य  संपन्न कराने एग्रीमेंट भी करा लिया गया , ठेका 20 लाख 61 हजार रपये  की राशि के लिए   जारी हुआ था, लेकिन 16 अक्तूबर 2009 को नगर निगम की  लोक निर्माण विभाग की निविदा समिति की बैठक में समिति  ने अज्ञात तथ्यों का उल्लेख करते हुए ठेकेदार को 10 प्रतिशत अधिक दर से ठेका देने की सर्वसमिति  से अनुशंसा  भी कर दी गई , जिसके बाद लागत 22 लाख 67 हजार हो गई , कथित ठेका कागजो में पूरा हो गया और इसका कुल भुगतान 23,38,175 रुपये का किया गया .  ठेकेदार को तालाब का गहरीकरण , पिंचिंग कार्य , तालाब के तीनो तरफ पैदल मार्ग का निर्माण , घाट निर्माण , विद्युतीकरण , सौन्दरीयकरण, वृक्षारोपण कार्य करना था लेकिन मात्र कुछ ट्रेक्टर कुछ दिन चलाये गए और बाद में बरसात का बहाना बना कर कार्य सिर्फ  कागजो में ही संपन्न हो गया . 14 जून 2010 को ठेकेदार ने बिल बनाया और 1 जुलाई को इसे प्रस्तुत किया गया ,जिस पर उपयंत्री को  तकनीकी प्रतिवेदन प्रस्तुत करने कहा गया , उपयंत्री ने  लिखित में सब कार्य पूर्ण होना बताकर ठेकेदार को राशि पाने में मदद की , जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों , अधिकारियो सहित  आम जनता खुद आकर इस तालाब का अवलोकन करे और कागजो में खर्च हुई राशि की जमीनी हकीकत देखे कि नगर निगम द्वारा खर्च की जाने वाली रकम यहाँ  कैसे लूटी गई है   


सूचना के अधिकार से उजागर हुआ है मामला 
संत कंवरराम वार्ड के  समाजसेवी  पंजूमल  माटानी ने सूचना के अधिकार का प्रयोग कर नगर निगम से दस्तावेज हासिल किये है जिसमे  तमाम वह दस्तावेज है जिससे साबित होता है की भ्रष्ट ठेकेदार और भ्रष्ट अधिकारियो की मिलीभगत से करीब 20 लाख रुपये की लूट हुई है . उस रकम की जिसे आम जनता ने अपने  खून पसीने से कमा कर  निगम को नगर का  विकास करने के लिए दी थी 

वार्ड के नागरिक है आक्रोशित 
 एक तरफ तो पूरे वार्ड में  गंदगी , कचरे से भरी नालियां , अँधेरी गलियाँ आदि तरह तरह की  समस्याओ के अम्बार  से नागरिक परेशान है वही दूसरी ओर लाखो रुपये भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहे है , यह सरासर नागरिको  के साथ किये  जाने वाले  विश्वासघात की श्रेणी प्रतीत होती है  , बड़े ही ताज्जुब की बात तो यह  भी है कि क्या वार्ड के पार्षद को यह सब पता ही नहीं था ? वैसे  संत कंवरराम वार्ड की  पार्षद श्रीमती शोभा देवी थावानी  के  पति   ही वार्ड की पार्षदी  करते आये है , पार्षद पति देवी थावानी कहते है कि यह पूर्व पार्षद वर्तमान में जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण अध्यक्ष   गंगाराम कटारिया के कार्य काल के समय प्रस्तावित हुआ था, इसलिए उन्होंने इसमें  दिलचस्पी नहीं दिखाई, हालाकि उनका यह भी कहना है कि उन्होंने ठेकेदार  गुल्लू खम्परिया , निगम अध्यक्ष वेंकट खंडेलवाल से  तालाब  के विषय में  बात की थी लेकिन उन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया . पिछले रविवार 23 सितम्बर की दोपहर को तालाब के असल  कार्य का निरिक्षण करने आये एक पत्रकार दल के समक्ष वार्ड के कई नागरिको ने तालाब के नाम पर हुए भ्रष्टाचार पर  अपना आक्रोश भी प्रकट  किया ,वार्ड के  वरिष्ठ नागरिक तथा कांग्रेस के जिम्मेदार नेता गंगाराम कटारिया से इस बाबत पत्रकारों ने जब उनके निवास पर जाकर सवाल किये  तो उन्होंने  कहा कि कार्य का प्राकलन  24 लाख 61 हजार का हुआ था , कितना खर्च  हुआ है उन्हें नहीं मालूम ,कार्य जब बंद हुआ था तब ठेकेदार  ने कहा था कि काम बरसात बाद  शुरू होगा ,  उन्होंने यह  कहा कि उनपर जिला कांग्रेस की जवाबदारी है इसलिए वे निगम की राजनीती में कम दिलचस्पी  लेने की कोशिश करते है 
दोषियों पर हो कार्यवाही 
वार्ड के नागरिको की मांग है कि दोषियों पर कार्यवाही की जाये और ठेकेदार एस एन खम्परिया को ब्लेक लिस्टेड किया जाये , इस एक मामले के उजागर होने से  यह आशंका  बलवती   हो उठी  है कि ठेकेदार ने अन्य सभी ठेकों में भी गंभीर अनियमिताएं की होंगी . जिला प्रशासन , निगम प्रशासन अगर इस पर  कार्यवाही करने से बचता है तो इस मामले की शिकायत  नागरिक गण लोकायुक्त  में करेंगे जिससे जिन भ्रष्ट जनों ने आम जनता का हक़ डकार है उनको सजा मिल सके तब प्रशासन  कार्यवाही न करने की  जवाबदेही से  बच नहीं सकेगा    

   

Thursday, September 20, 2012

कटनी जिले में पुलिस ने किया व्ही केयर फॉर यू सेल का गठन


                                          कटनी - (मध्य प्रदेश ) यूँ तो मोबाइल फ़ोन के बेहद उपयोगी फायदे है लेकिन इसके साथ साथ इसका दुरूपयोग कर व्यक्तियों को परेशान करने की घटनाओ में भी वृद्धि  होती जा रही है अपराध का शिकार होने वाला  जन मानस  इससे जुडी समस्याओ के निराकरण के लिए पुलिस के पास ही जाता है. आम तौर पर ऐसे अपराधो की शिकार ज्यादातर महिलाये और छात्रायें  होती है .कटनी पुलिस ने भी अब मोबाइल फ़ोन से परेशान करने वालो पर लगाम कसने की तैयारी  उच्च स्तर पर  कर ली है .  मोबाइल फ़ोन के द्वारा किये जाने अपराधो पर सख्त कार्यवाही करने के उद्देश्य से अब कटनी पुलिस ने  एक विभागीय सेल व्ही केयर फॉर यू  तैयार कर दिया है जिसमे शिकायते आने पर उनका  तत्काल समाधान किया जायेगा .
                                      महानगरीय पुलिस कार्यप्रणाली  के  जैसे इस सेल का गठन पुलिस अधीक्षक राजेश हिन्गंकर की पहल से हो पाया है . इस  सेल का कार्यालय झिन्झरी स्थित  पुलिस अधीक्षक  कार्यालय में रहेगा  अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अमित सांघी इस सेल के प्रभारी अधिकारी नियुक्त किये गए है  .व्ही केयर फॉर यू सेल के माध्यम से  अश्लील एसएम्एस , गाली गलौज तथा परेशान करने वालो  पर सख्ती से कानूनी कार्यवाही की जाएगी . ऐसे अपराधो से पीढित आम जन अब इसकी शिकायत सीधे  पुलिस अधीक्षक कार्यालय में स्थित इस सेल में कर सकेंगे . मोबाइल फ़ोन से किये जाने वाले अपराधो पर कार्यवाही करने बना यह सेल पूर्व स्थापित  साइबर सेल की सहायता से कार्य करेगा .
                             जिले में इस तरह के किसी सेल की जरुरत लम्बे समय से महसूस की जा रही थी जिसपर पुलिस अधीक्षक राजेश हिन्गंकर ने ध्यान देकर इसका गठन कर दिया है . इस सेल के गठन से विशेष तौर पर महिलाओ , छात्राओ को फायदा पहुंचेगा जो इस तरह के अपराधो की शिकार ज्यादा होती है . 

Tuesday, September 18, 2012

इस माध्यम से मध्य प्रदेश राज्य के कटनी जिले के रिहायशी क्षेत्र माधव नगर के नागरिको की पीड़ा आप तक पंहुचा रहे है


प्रति ,                                                                                                          18/ 09/ 2012 
पर्यावरण एवं वन मंत्रालय                                                                                
भारत सरकार
दिल्ली  


विषय - रिहायशी  क्षेत्र में प्रदुषण के चलते  बढ़ रही  है  साँस सम्बन्धी बीमारियाँ , इससे तत्काल निजात दिलाये जाने के सम्बन्ध में प्रस्तुत है  यह जन  शिकायती पत्र  

     
महोदय ,                                       
                    कटनी जिले में माधव नगर  सबसे बड़ा रिहायशी क्षेत्र है , इस क्षेत्र के पास ही बोक्साईट ,लेट्राईट , क्ले आदि की कई वैध अवैध खनिज खदाने निजी व्यक्तियों द्वारा कई वर्षो से  संचालित की जा रही है , खदानों से उत्खनन  कर उसके परिवहन का कार्य हमारे माधव नगर क्षेत्र के बीच से किया  जाता रहा है . इस वजह से समस्त माधव नगर क्षेत्र में धूल ,मिटटी तथा ध्वनि प्रदुषण बड़ी मात्र में  होता आ रहा है .रिहायशी  क्षेत्र से परिवहन  करने का मुख्य कारण यह है कि इससे एक चक्कर में करीब दो लीटर डीजल की बचत खदान संचालक कर रहे है और इसकी कीमत क्षेत्र के नागरिक यातायात समस्या , वायु प्रदुषण , ध्वनि प्रदुषण तथा साँस की बीमारियों से ग्रसित होकर चुका रहे है . साँस सम्बन्धी बीमारियों के अनेक प्रकरण इसे साबित कर सकते  है . मध्य प्रदेश  प्रदुषण विभाग और जिला प्रशासन इस पर कोई कार्यवाही नहीं करते . इसलिए कम शब्दों में नागरिको की पीढ़ा आपके समक्ष व्यक्त की जा रही है . 
                    क्षेत्र का पूरा पर्यावरण ही अब दूषित हो चुका  है जिसपर  तत्काल ही सुधार किये जाने की अति आवश्यकता है , क्षेत्र के नागरिको की अब आपसे ही आशा  है 

                     आपसे अपेक्षाकृत कार्यवाही की अपेक्षा के साथ , धन्यवाद् 

Thursday, September 13, 2012

किसानो के बीच नयी तकनीक पहुँचाने खुला एक ज्ञान केंद्र


खेंतो में कौन सी तकनीक कारगर होकर लाभकारी स्थिति प्रदान करेगी इसकी जानकारी अगर समय समय पर किसानो के बीच पहुंचाई जाये तो यह कृषि क्षेत्र के लिए अच्छा ही होगा. कुछ इन्ही प्रयासों की कड़ी में मध्यप्रदेश के कटनी जिले की तहसील बडवारा में एक कृषि ज्ञान केंद्र की स्थापना की गयी है जहाँ विकासखंड के किसान आकर कृषि से जुड़ी नयी नयी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे . किसानो के बीच इस केंद्र का लोकार्पण मध्यप्रदेश के मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष मोती कक्ष्यप के द्वारा किया गया . लगभग 11.००  लाख  की
 लागत से बने इस केन्द्र को मार्केटिंग फेडरेशन द्वारा बनवाया गया है . जहॉ विकासखण्ड  के  किसान  पहुंचकर  कृषि  से  संबंधित  उन्नत  तकनीकी  प्रशिक्षण  प्राप्त  करेगें . इस अवसर पर एक  कार्यक्रम  के  जरिये   कृषक  प्रशिक्षण  शिविर  का आयेजन   किया गया .  कार्यक्रम  को संबोधित  करते  हुये  जिले  के  उपसंचालक  कृषि   ए के नागल  ने  कार्यक्रम  तथा  किसान ज्ञान केन्द्र  के  महत्व  के  संबंध  में  जानकारी  प्रदान  की  .  उन्होने  कहा  बायोगैस  किसानों के लिए वरदान है . कार्यक्रम को विधायक बड़वारा तथा मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष मोती कश्यप , कटनी जिला पंचायत उपाध्यक्ष  सौरभ सिंह ने  भी  संबोधित  किया .  कार्यक्रम  में  परियोजना संचालक  (आत्मा)  जितेन्द्र सिंह ,  अनुविभागीय कृषि अधिकारी  जी.आर. मिश्रा,  सहायक  संचालक कृषि   एस.के. शर्मा , बड़वारा कृषि समिति  सभापति  रेवाप्रसाद शर्मा , राजेन्द्र सोंधिया ,  विजय गुप्ता,  रामा  चौरसिया,  महेन्द्र जैसवाल,  एवं  कृषि  तथा  उद्यानिकी विभाग का समस्त  अमला  उपस्थित  था   कार्यक्रम का संचालन  एस.के. शर्मा .. आभार प्रदर्शन  प्रभारी वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी विखण्ड बड़वारा  एम.एस. कुशवाहा  ने  किया.  इस तरह के कार्यक्रमों के निरंतर आयोजित होने से जहाँ किसानो को फायदा होता है वही शासकीय स्तर पर भी सभी जिम्मेदार विभाग प्रमुख और जनप्रतिनिधि एक साथ आते  है जिससे  शासकीय योजनाओ को लागू करने में कसावट भी बनी रहती है .

Monday, September 10, 2012

पुनर्वास भूमि समस्या सुलझाने यह है प्रशासन का फार्मूला

कटनी - माधव नगर की 399 एकड़  पुनर्वास भूमि की वर्षो से लंबित समस्याओ को सुलझाने की दिशा में अब एक ठोस  सकारात्मक पहल की शुरुआत जिला प्रशासन करना चाहता है , जिला कलेक्टर अशोक कुमार सिंह ने इसे लेकर अपेक्षित सहयोग भी माँगा है .इससे पहले  28 अगस्त को पुनर्वास तहसीलदार महेंद्र गुप्ता के खिलाफ सभी स्थानीय मिलर्स कटनी विकास प्राधिकरण उपाध्यक्ष पीताम्बर टोपनानी के नेतृत्व में विरोध करने पहुंचे .मिलर्स इस बात से नाराज थे कि पुनर्वास तहसीलदार महेंद्र गुप्ता द्वारा उनपर  12 करोड़ रुपये जुर्माना लगाये जाने की बात समाचार पत्रों के माध्यम से  कही  जा रही थी इसके साथ ही जुर्माना  अदा न होने पर 29 अगस्त से  कार्यवाही करने की बात भी उन्हें समाचार पत्रों से ही पता चली थी  जबकि इस सम्बन्ध में उन्हें किसी भी प्रकार का कोई नोटिस ही नहीं मिला था . देखा जाए तो पुनर्वास तहसीलदार का विरोध प्रदर्शित करने  आयोजित हुई इस बैठक से एक ठोस निष्कर्ष निकलकर भी सामने आया है ,  जिला प्रशासन ने अपनी मंशा साफ़ साफ़ जाहिर कर दी है कि पुनर्वास भूमि का समाधान वह किस तरह करना चाहता है .हालाकि जिला कलेक्टर कलेक्टर द्वारा पुनर्वास समस्या की एक श्रेणी का
का जो निदान बताया जा रहा है वह किसी के गले नहीं उतर रहा है क्योकि वर्षो से पुनर्वास समस्या को सुलझाने की दिशा में शासन प्रशासन ने ही कोई कदम  नहीं उठाया है ऐसे में  आज  समस्या सुलझाने के नाम पर  बाजार मूल्य निर्धारित कर   नियमितीकरण किया जायेगा तो यह उन तमाम लोगो की भावनाओ के साथ कुठराघात होगा जो यहाँ की पुनर्वास भूमि पर विस्थापित होने के बाद से ही काबिज है
 वैसे भी  यहाँ की 399 एकड़ भूमि पूर्व से ही विस्थापितों के लिए  आरक्षित की गयी थी और इसका विस्थापितों के हक़ में इंतजाम करना पुनर्वास विभाग का ही काम था इसलिए ही इस विभाग का गठन वर्ष 1964 में किया गया था . आज इस पुनर्वास भूमि पर विस्थापित परिवार और उनके बढे हुए परिवार ही बसे है और बिना शासन की मदद लिए  बिना हजारो रोजगारो का सर्जन करने के साथ ही प्रदेश  स्तरीय उद्योग अपनी मेहनत से स्थापित किये है .प्रशासन को इस समस्या का हल निकालते हुए इस बात का  ध्यान अवश्य ही रखना पड़ेगा कि यहाँ कोई आज आकर नहीं बसा है और उसके बसने का इंतजाम पुनर्वास विभाग ही ठीक से नहीं कर पाया है इसलिए नियमितीकरण की प्रक्रिया पूर्व निर्धारित निति के अनुसार ही की जानी चाहिए वर्षो पूर्व बसे  विस्थापित  परिवारों को आज के बाजार मूल्य से भूमि देना न्यायसंगत नहीं रहेगा 
  
    
                                        ju " जिला कलेक्टर अशोक कुमार सिंह के शब्दों में "
 "  जो बात पिछले 18 साल से रुकी हुई है उसे अब आगे बढाया जाये कैसे बढाया जाये ? क्या किया जायेगा , अब इसे देखते है .  अभी तक यह हो रहा है कि सबके ऊपर एक तलवार लटक रही है   इसलिए  मै चाहता हूँ  कि अब पुनर्वास भूमि को लेकर निर्णय हो जाये , मै चाहता हूँ कोई पहल आप लोगों  की तरफ से भी हो और हम तो खैर करेंगे ही . पुनर्वास भूमि  के  सम्बन्ध मे  मेरी भोपाल बात चल  रही है कि इस पर  कोई स्पष्ट दिशानिर्देश मिल जाये . हम चाहते है कि वर्ष 1974 से लेकर 1994 तक 30 वर्ष की अवधि के लिए जिन्हें  पट्टे जारी हुए थे  उन्हें पहली श्रेणी में लेकर  नियमित कर दिया जाये .वर्ष 1994 - 1995 के दौरान कुछ कारण उत्पन्न हो गये थे जिसकी वजह से पिछले 18 वर्ष से यह पूरी प्रक्रिया ही बंद पढ़ी है  इसलिए अब इस पर  नए सिरे से विचार ही हो सकता है . इसके बाद बात आती है वर्तमान  में चल रहे मामलो कि तो मेरी भी मंशा है कि इस तीसरी श्रेणी का  नियमितीकरण  किया जाये , जब नियमितीकरण  की बात आएगी तो हम वही प्रस्ताव भेजेंगे जो आज का मार्केट रेट है , फिर आप लोगों को  भोपाल स्तर  पर उसको कम करवाना पड़ेगा . अगर माधव नगर में आज का मार्केट रेट एक हजार रुपये का है तो हमारा प्रस्ताव एक हजार का ही रहेगा , साफ़ बता रहा हूँ . लेकिन यह प्रदेश केबिनेट के ऊपर है की उसे पचास पैसे कर से , एक रुपया कर दे या डेढ़ रुपया कर दे . मैने आपकी बात नोट कर ली है लेकिन उसका समाधान क्या हो सकता है यह में नहीं कह सकता वैसे गौर मै आपके द्वारा दिए गये एक एक बिंदु पर करूँगा . मेरी खुद की भी निजी इक्षा है कि किसी तरह से नियमितीकरण हो जाये और जब तक नियमितीकरण नहीं होगा तब तक जो तलवार है वो लटकती रहेगी 

Friday, September 07, 2012

स्कौटलैंड पुलिस से कम नहीं कटनी पुलिस - इस मामले ने कुछ ऐसा साबित किया

           कटनी - जबलपुर पुलिस से सूचना मिलने के मात्र २ घंटे के अन्दर  कटनी पुलिस ने लूट के उस आरोपी  को अथक प्रयास से  पकड़ लिया जिसकी सूचना पूरी मध्य प्रदेश पुलिस को दी गयी थी .हुआ यूँ  कि  एक दिन  पहले यानि 6 सितम्बर की दोपहर को जबलपुर के सदर बाजार स्थित दीपाली ज्वेलर्स के दुकानदार को  झांसे में लेकर बिलकुल ही  अलग अंदाज में ज्वेलरी की लूट को अंजाम दिया गया . दोपहर एक बजे के आसपास ज्वेलरी की दुकान में  एक व्यक्ति आया  और उसने दुकानदार से कहा  कि बाहर कार में  एक अमीर घराने की महिला बैठी हुई है और उन्हें कुछ नए जेवर खरीदने है इसलिए  पहले चांदी का गिलास लेकर जाओ , दुकानदार ने भी अपने एक  बुजुर्ग कर्मचारी को चांदी की गिलास लेकर बाहर भेजा . जो व्यक्ति पहले दुकान में आया था उसने उस कर्मचारी को इशारे से बताया कि उस कार में मैडम बैठी है तभी  कार की तरफ से एक व्यक्ति और आया और उसने बुजुर्ग कर्मचारी से कहा कि यह चांदी के गिलास बहुत छोटे है,  कुछ  बड़े गिलास , सोने की अंगूठी और सोने की चैन नयी डिजाईन की लेकर आयो . जिसके बाद कर्मचारी पुनः दुकान के अन्दर गया और दुकान से 5 नग सोने की अंगूठी और 9 सोने की चेन लेकर  जब बाहर आया तो बाहर खड़े व्यक्ति ने ड्राइवर को  मैडम को जेवर दिखाने के  लिये भेज दिया . कुछ देर बाद तक जब ड्राइवर  वापस नहीं लौटा तो उस  व्यक्ति ने बुजुर्ग कर्मचारी से कहा कि में देख कर आता हूँ . जब बुजुर्ग कर्मचारी ने देखा के वो व्यक्ति भी अब कही नजर नहीं आ रहा तब उसने सारी  बात जाकर दुकानदार को बताई .इसके बाद दीपाली ज्वेलर्स के संचालक ने जाकर जबलपुर पुलिस को सूचना दी .
              जबलपुर पुलिस ने इस घटना की सूचना  प्रदेश के सभी जिलो को दी और जैसे ही इसकी सूचना कटनी पुलिस तो दी गयी जिसपर  कटनी पुलिस अधीक्षक राजेश हिंगंकर ने तुरंत हरकत में आकर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अमित सांघी  के साथ सीएसपी धनंजय शाह  को इसकी जिम्मेदारी सौपी. सी एस पी धनंजय शाह ने कोतवाली थाना प्रभारी डी एल तिवारी के  नेतृत्व में  16 सदस्यीय टीम का गठन कर जबलपुर पुलिस से मिले आरोपियों के हुलिए के आधार पर तलाश शुरू कर दी. हालाकि पुलिस के लिए यह  भूसे से सुई ढूंढने  जैसा ही प्रयास था लेकिन वरिष्ठ  अधिकारियो से   लगातार मिल रहे मार्गदर्शन और गठित टीम के प्रयासों ने एक व्यक्ति  को सराफा बाजार से  पकड़ लिया और उसकी तलाशी लेने पर जबलपुर से लूटे जेवर बरामद कर लिए गए, 130 ग्राम सोना कीमत 4 लाख रुपये का बरामद कर लिया गया है
         यह वही व्यक्ति था जिसने जबलपुर के दीपाली ज्वेलर्स में इस घटना को अलग तरीके से अंजाम दिया था इसका नाम परवेज खान है और यह मुरादाबाद उत्तरप्रदेश  का रहने वाला है इससे पहले वह अपने पते  को लेकर पुलिस को गुमराह करता रहा था ,लेकिन पुलिस की कड़ाई के बाद वह तोते की तरह सब सही सही बताने लगा .   एक दूसरा व्यक्ति भी इसके साथ था लेकिन वो अभी फरार है .
        कटनी पुलिस ने जिस तरह से अपनी सुझबुझ का परिचय दिया और तत्परता दिखाई है वह वाकई में काबिले तारीफ है .पुलिस अधीक्षक राजेश हिंगंकर ने इस बात का यकीन भी दिलाया है की कटनी पुलिस अब नए मुकामो को छुएगी .आरक्षक वीरेन्द्र सिंह , विनोद पाण्डेय , शैलेश दमोहिया को पुरुस्कृत  करने  की  घोषणा पुलिस अधीक्षक द्वारा की गयी है   


Saturday, September 01, 2012

शहर में भी गई दूषित पानी से तीन निर्दोष जनों की जाने , जिम्मेदार कौन ?


अगस्त माह के पहले हफ्ते में माधव नगर के बंगला लाइन क्षेत्र में दूषित पानी पीने की वजह से तीन निर्दोष जनों की जान असमय चली गयी और तीन दर्जन से ज्यादा नागरिक अस्पतालों में भर्ती हुए ,  अभी तक आंत्र  शोध सिर्फ ग्रामीण क्षेत्रो में फ़ैल रहा था लेकिन माधव नगर क्षेत्र में आंत्र शोध फैलना यह  सामान्य घटना नहीं कही जा सकती , बंगला लाइन क्षेत्र में इस घटना से कई दिन पहले ही दूषित पानी की सप्लाई हो रही थी ,  जनसामान्य  इस मैले पानी को बरसात के मौसम की वजह से हल्के में ले रहा था वह इससे अंजान थे कि  दूषित पानी बोर वेल के रस्ते से होकर आया है , पुराने  ग्राम पंचायत चौराहे पर स्थित सामुदायिक भवन के पास के बोर वेलो के आस पास बरसात का पानी कई दिनों से भरा हुआ था , यही बाद में नागरिको की जान पर बन आया . इस घटना ने जिला प्रशासन और नगर निगम के हाथ पाँव फुला दिए थे . इस घटना से ठीक पहले जिला प्रशासन  ग्रामीण क्षेत्रो  में दूषित पानी की वजह से फैलने वाली बीमारियों को लेकर कई सवालो के घेरे  में था ऐसे में जिले के  मुख्य उप नगरीय क्षेत्र माधव नगर में दूषित पानी की वजह से निर्दोष  नागरिको की मौत होना और दर्जनों नागरिको का बीमार होना उसे कही का फिर नहीं छोड़ता , लेकिन जिला प्रशासन को यहाँ ज्यादा परेशान नहीं होना पड़ा . क्षेत्र के नेताओ और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता और नकारे पन की वजह से सभी जिम्मेदार विभाग इस गंभीर घटना की जवाबदेही से साफ़ साफ़ बच निकले . हैरत और शर्म तो इस बात की  भी है कि यहाँ के जनप्रतिनिधियों और नेताओ ने इस गंभीर घटना पर चुप्पी क्यों साधे रखी ? मरने वाले सामान्य परिवारों के थे शायद इसीलिए उनके दर्द को कोई समझ नहीं पा रहा है . आज भी बंगला लाइन क्षेत्र के नागरिको में  दहशत व्याप्त है जिसके चलते नगर निगम के नलों से आने वाला पानी  वे नहीं पी रहे . मामला गंभीर है लेकिन इसकी गंभीरता से सब अंजान बने बैठे है 

कटनी - वैसे तो जिला कलेक्टर ए के सिंह के आदेश पर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने बंगला लाइन क्षेत्र के छह  घरो और नगर निगम क्षेत्रीय कार्यालय के पास बनी पानी की टंकी  से पानी का सेम्पल लेकर जाँच करायी थी किन्तु  यह जाँच रिपोर्ट बिलकुल सामान्य  है , सत्रह प्रकार की गई जाँच  में अगर सब ठीक ठाक है  तो एक ही टंकी से पानी सप्लाई वाले क्षेत्र में तीन दर्जन से ज्यादा  नागरिक कैसे एक साथ बीमार हो गये और तीन  जनों की जान  एकाएक उलटी दस्त लगने से कैसे हो गयी ? और अगर बाद में प्रशासन को पानी की कथित  रिपोर्ट पर ही भरोसा करना था तो मरने वालो का पोस्टमार्टम क्यों नहीं कराया गया ? जिससे उनकी मौत का  कारण भी सामने आ पाता .इससे इस बात की  सम्भावना को ही बल मिलता  है कि इस गंभीर घटना के असल कारणों से सब अच्छी  तरह से वाकिफ थे इसलिए घटना पर पर्दा डाल दिया गया और वैसा ही हुआ है . समूचे माधव नगर क्षेत्र का  आम जनमानस इसे लेकर चिंतित है और हो भी क्यों नहीं . उसे क्या मालूम कि नगर निगम के नल से आने वाला पानी इतना भी दूषित हो सकता है वैसे भी  पूरे माधव नगर क्षेत्र में जमीन के अन्दर की  पाइप लाइने समय के साथ साथ प्रभावित हो रही है इसलिए दूषित पानी आसानी से पाइप लाइनों से होकर नागरिको के घरो तक आसानी से पहुच  सकता है . यह बड़ी गंभीर चिंता का विषय भी है.  भविष्य में इस तरह कि घटनाओ की पुनरावृति न हो इसलिए क्षेत्र की समस्त जल सप्लाई की वर्तमान व्यवस्था की तत्काल कारगर समीक्षा करनी चाहिए और  पाए जाने वाले अवरोधों का निदान किया  जाना जन हित में अपेक्षित है  

केस नं एक - श्रीमती कमला देवी लोकवानी उम्र 72 वर्ष , निवासी - बंगला लाइन 
अच्छी भली बुजुर्ग महिला कमला देवी को 1 अगस्त की सुबह अचानक उल्टी दस्त शुरू हो गए थे और शाम होते होते उसकी म्रत्यु  भी हो चुकी थी , मृतक कमला देवी का पुत्र फेरी करके अपने परिवार का गुजर बसर जैसे तैसे करता है . अचानक माँ का साया सिर से उठ जाने के कारण यह परिवार बेहद गमजदा है . प्रशासन को इनकी  आर्थिक  मदद अवश्य करनी चाहिए .पूरा परिवार आस पास के घरों से बोरिंग का पानी लेकर अब अपना काम चला रहा है

केस नं - 2 , शंकर डोडवानी , उम्र 42 वर्ष निवासी - बंगला लाइन 

पुराने ग्राम पंचायत  चौराहे पर वर्षो से  पान की एक  छोटी सी दुकान चलाकर  रोजाना मात्र कुछ पैसे कमाने वाले शंकर को उल्टी  दस्त की तकलीफ हो रही  थी , इन्ही दिनों उसका छोटा भाई श्याम  लाल भी इन्ही वजहों से चार दिन बाबा माधव शाह अस्पताल में भर्ती था . शंकर को नहीं मालूम था कि  मौत उसके पेट में दूषित पानी बनकर पहुच चुकी थी ,केस नं एक के बाद यह दूसरा केस था .  शंकर का परिवार  बेहद गरीब है और इस परिवार की आर्थिक  मदद करना प्रशासन का दायित्व  भी बनता है

केस नं - 3 , गुलाबराय सुन्दरानी , उम्र 48 वर्ष - बंगला लाइन 
अपनी साइकल  से  आस पास  के क्षेत्र में गोली बिस्कुट की फेरी करने वाले गरीब गुलाबराय को पता नहीं होगा कि इस बार वो घर से निकलेगा तो वापस घर कभी नहीं पहुचेगा. उसके परिवार वालो ने बताया कि     उन्हें खुद समझ में नहीं आ रहा कि अचानक उन्हें क्या हो गया  ? बाद में उन्हें पता चला कि वे जहा गए थे उन्हें वहा खूब उल्टियाँ  हुई थी जिसकी वजह से ही उनकी जान गयी.
 

यह तीन केस अपने आप में ही चीख चीख कर कह रहे है  कि इंसाफ  चाहिए , तीनो परिवार बेहद गरीब है मुश्किल से ही गुजारा हो पता है . संवेदनशील इंसानियत को अपना परिचय देना होगा      

बरसात का  मौसम समाप्त होने तक  पानी ऊबाल कर पीयें
नगर निगम आयुक्त एस के सिंह का कहना  है कि सभी नागरिकों को बरसात का मौसम समाप्त होने तक पानी ऊबाल कर पीना चाहिए जिससे बीमारियों से बचाव हो सके . प्रबल सृष्टि भी सभी पाठको से यह अपील करता है कि चाहे पानी नगर निगम द्वारा सप्लाई किया गया हो या अन्य किसी श्रोत से लिया गया हो उस पानी को पहले छान लें  और फिर  ऊबाल कर ही पीयें ,  घर और आस पास गंदगी न फैलने दे , अपने क्षेत्र के पार्षदों के  घर का दरवाजा खटखटाने में अब संकोच कतई न करे जिससे आपकी समस्यायें  उन्हें पता तो चले , अपने बुनियादी अधिकारों को पहचाने और उसे पायें भी .  

माधव नगर जुलुस मार्ग भ्रस्टाचार की भेंट न चढ़ जाये



 राजनैतिक महत्वकांषाओं का शिकार बने एक मार्ग की जर्जर हालत यह बयां करती है  कि नागरिको की सुविधाओ से ज्यादा कुछ लोगो को अपने निजी स्वार्थ की चिंता ज्यादा है  . माधव नगर के बाबा नारायणशाह वार्ड स्थित किशनचंद मार्ग से होकर पोस्ट आफिस होते हुए आने वाले जर्जर  मार्ग से नागरिको को निजात अभी तक नहीं मिल पाई है .वैसे तो विधायक गिरिराज किशोर पोद्दार ने इस मार्ग के लिए पौने चार करोड़ का बजट राज्य शासन से पास कराया है .कही सीमेंट से तो कही डामर से बनने वाले इस मार्ग की एक कहानी भी है . पूर्व में यह मार्ग नगर निगम के अधीन था और नगर निगम इसे  सत्तर लाख में पूरा  डामलीकृत बना भी रहा था इसके बाद यह  मार्ग  निगम और राज्य शासन के बीच उलझ कर रह गया इसके बावजूद  विधायक पोद्दार ने इसके लिए एक बड़ा बजट पास करवा दिया है , इस मार्ग के भूमिपूजन के लिए  जबलपुर से आते समय विधानसभा अध्यक्ष ईश्वर दास रोहाणी के काफिले में शामिल पायलट वाहन दुर्घटना ग्रस्त हो गया था जिसकी वजह से एक पुलिस के जवान की मृत्यु  हो गयी थी तथा एक और पुलिस जवान की मृत्यु बाद में इलाज के दौरान हो गयी 
कटनी - स्थानीय नागरिक चाहते थे कि यह मार्ग डामल से बनाया जाये किन्तु अब यह मार्ग सीमेंट से ही बनेगा , हालाकि  किशनचंद राज मार्ग का एक हिस्सा डामल से ही बनाया जायेगा इसके पीछे नागरिको का विरोध होना भी बताया जा रहा है . क्षेत्रीय नागरिको का कहना है कि माधव नगर के कुम्हार मोहल्ला से छहरी तक बनने वाले मार्ग के अनुपात में यह मार्ग बहुत छोटा भी  है लेकिन उस अनुपात के अनुसार इस मार्ग का बजट अत्यंत अधिक बनाया गया है . इसे लेकर कई तरह कि शंकाओ का जन्म हो भी चुका है .
 पोस्ट आफिस रोड पर कई दशको से आटा  चक्की चलाने वाले और  रुई गद्दे बनाने का कार्य करने वाले वरिष्ठ नागरिक पंजूमल माटानी इस मार्ग की  लागत को लेकर कई सवाल भी खड़े कर रहे है . उनका यह  कहना है कि इस मार्ग पर गिट्टी मुरुम बिछाने का कार्य पूर्व में मात्र 2-3 लाख से किया गया लगता है  लेकिन उन्हें बताया 11 लाख जा रहा है . जो भी हो इस मार्ग पर पूर्व में खर्च किये गए रुपये और वर्तमान में भारी भरकम बजट और कार्य क्षेत्र को देखकर नागरिको के मन में शंकाओ ने जन्म तो ले ही  लिया है . अगर पौने चार करोड़ से यह मार्ग अब बनाया जायेगा तो पूर्व में खर्च किये गए लाखो रुपयों का क्या हुआ ? क्या वे सब बरसात के पानी में बह गए ? या यहाँ भी भ्रस्टाचार ने अपने पैर पसार लिए है . इस मार्ग से विधायक गिरिराज किशोर पोद्दार की प्रतिष्ठा भी जुडी हुई है इसलिए  अब यह जरुरी होगा की इस मार्ग पर पूर्व में खर्च की गयी राशि और अब खर्च की जाने वाली राशि की पाई पाई का हिसाब नागरिको के सामने भी आ पाये क्योकि कटनी शहर के बरही रोड और वी आई पी रोड में हुए भ्रस्टाचार की कलई वैसे ही खुल चुकी है  ऐसे में भारी भरकम लागत से बनने वाले इस मार्ग की नागरिक निगरानी भी अब जरुरी लगती है .


ये क्या हो गया है अब बिजली विभाग को ?



वैसे कुलश्रेष्ठ के जाते ही बिजली विभाग की सक्रियता सभी मामलो में समाप्त हो गयी है चाहे अप्रत्याशित रूप से बढे  हुए बिजली बिलों में सुधार के मामले हो या बिजली ठेकेदारों की मनमानी हो , वर्तमान में विभाग प्रमुख विनोद राय जैसे  पुराने अधिकारी ऐसे कई मामलो में नाकामयाब रहे है . फीडर सेपरेशन में बिजली ठेकेदारों के  दर्जनों मामले सामने आये विभाग के आला अधिकारी चुप्पी साधे रहे . आम आदमियों के घरो  के बाहर बिजली मीटर  लगाने में सक्रियता दिखाने वाला विभाग कुछ खास जगहों पर आते आते निष्क्रिय हो जाता है . जिनके यहाँ गलत रीडिंग के चलते बिजली बिल पहुंचे  वे विभाग के दफ्तरों के चक्कर लगा लगा कर थक चुके  पर उनकी समस्याएँ हल नहीं हो सकी है . इस तरह की कई समस्याएँ अब विभाग सुलझाने में नाकामयाब होता जा रहा है जबकि कुलश्रेष्ठ साहब के रहते विभाग ने नए नए कीर्तिमान रचे थे . विनोद राय जैसे पुराने अधिकारी को इस और ध्यान देना चाहिए  जिससे बिजली विभाग की छवि जिले भर में धूमिल होने से बच सके



कलेक्टर - विधायक - महापौर दिलायें गरीब बुजुर्गो को उनका हक़


सामाजिक सुरक्षा पेंशन के सर्वे कार्य में बरती गयी भयंकर  लापरवाही के चलते नगर के सैंकड़ो पात्र वृद्ध अब दाने दाने को मोहताज है और इसके जिम्मेदार इस सर्वे को करने वाले नगर निगम और जिला प्रशासन के कर्मचारी है . प्रदेश शासन द्वारा अपात्र जनों को मिल रही पेंशन की शिकायतों के बाद जैन आयोग से  इसकी जाँच करायी गयी थी , जिले वार की गयी जाँच में वार्ड स्तर पर दल बनाये गए जिसमे नगर निगम के कर्मचारी और पटवारियों को पेंशन पाने वालो  के  भौतिक सत्यापन करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौपी गयी थी पर अफ़सोस कि इस गंभीर कार्य को लापरवाही से किया गया है इस कथित जाँच के बाद कई पात्र जनों की पेंशन  पिछले कई महीनो से बंद हो गयी है . संत कँवर राम वार्ड स्थित ऐसे ही दो पात्र जनों की पेंशन पटवारी जाँच रिपोर्ट के आधार  पर नगर निगम ने जब बंद कर दी तो इसकी शिकायत प्रबल सृष्टि के पास पहुंची . प्रबल सृष्टि ने तत्काल  इसकी समस्त जानकारी एस डी एम् तेजस्वी नायक को उपलब्ध करा दी , नायक साहब ने भी पटवारी ज्ञानेश्वर  तिवारी को इन वृद्धो की तत्काल जाँच सौपी जिसके बाद किये गए भौतिक सत्यापन में उन्हें  पात्र पाया गया  , वृद्ध सावित्री बाई और बिलंदराय  की पेंशन  चालू करने एस डी एम् तेजस्वी नायक ने नगर निगम आयुक्त को 17 जुलाई  को एक पत्र लिखा जिसके बाद दिनांक 9 अगस्त को नगर निगम में आयोजित  महिला बाल विकास समिति की एक बैठक समिति अध्यक्ष श्रीमती लता कनौजिया के नेतृत्व ने आयोजित हुई और पेंशन पुन: चालू करने प्रस्ताव पास किया गया है . इसके अलावा भी जिन जिन का पुन: भौतिक सत्यापन कराया गया है तो वे जरूरतमंद  ही निकले है . नगर निगम में महिला बाल विकास समिति अध्यक्ष पार्षद श्रीमती लता कनौजिया का भी कहना है कई जरूरतमंद लोग भटक रहे है उनके द्वारा भी ऐसे मामलो में रूचि लेकर जरूरतमंद के कार्य किये जा रहे है . अब सवाल यह उठता है कि आखिर ऐसे महत्पूर्ण जाँच कार्यो में लापरवाही क्यों  बरती गयी और किस किस ने लापरवाही की है जिसकी वजह से सैंकड़ो पात्र  नगर निगम और जिला प्रशासन के जनसुनवाई कार्यक्रमों में
में आये दिन भटकते देखे जा सकते है . अधिकारियो कर्मचारियों का रवैय्या भी संवेदनहीन नजर आता है ऐसे में  मात्र कुछ जनों की सक्रियता भी सभी पात्रो  को उनका हक़ दिलाने में नाकाफी है  जिला कलेक्टर अशोक कुमार सिंह के पास भी ऐसे तमाम मामले जनसुनवाई में पहुँच  रहे है लेकिन सरकारी दफ्तरों में चल रहे आफिस आफिस के खेल में वृद्धो के नसीब में धक्के खाते रहना नजर आ रहा है  ऐसे में जिला कलेक्टर अशोक कुमार सिंह , नगर निगम महापौर  श्रीमती निर्मला पाठक , विधायक गिरिराज किशोर पोद्दार से प्रबल सृष्टि यह जन अपेक्षा रखता है कि इन मामलो को वे स्वयं अपनी निगरानी में  ले  और पात्र जनों को उनका हक़ दिलवाने में मदद  करे जिससे कुछ रुपयों की खातिर बुजुर्गो को    बेवजह इधर उधर न भटकना पड़े .


Sunday, July 22, 2012

उद्योगों का दर्द समझे मध्य प्रदेश शासन


आने वाले दिनों में  दाल आदि का उत्पादन करने वाले कई लघु उद्योग बंद हो सकते है जिससे हजारो की तादाद में यहाँ काम करने वाले मजदूर बेरोजगार हो जायेंगे ,  स्थानीय व्यापार प्रभावित होगा सो अलग, इसके अलावा खाद्यान आदि का संकट भी उत्पन्न हो  सकता है . मध्य प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के राज में दशको से पट्टो की मांग करने वालो को एक आस बंधी थी कि जो कभी पूर्वर्ती सरकारों ने नहीं किया वो शिवराज सिंह चौहान की सरकार कर दिखाएगी, भाजपा के विधायक गिरिराज किशोर पोद्दार को माधव  नगर से मिला बहुमत इस बात  का ही सबूत है
लेकिन पट्टो की समस्या का हल तो रहा दूर की बात वर्तमान में देश के कई  हिस्सों  में दाल आदि जैसे खाद्यान की बड़ी पूर्ति करने वाले माधव नगर के आधा सैंकड़ा  लघु मझोले उद्योग बंद होने की कगार पर आ खड़े हुए है और अगर एक भी इकाई यहाँ बंद होती है तो यह शासन प्रशासन की असंवेदनशीलता का परिचय होगा .जिस 399 एकड़ भूमि को जिनके पुनर्वास के लिए आरक्षित रखा गया था उसपर वही पात्र लोग ही काबिज हुए . रहवास के बाद सबसे बड़ी समस्या रोजगार की भी थी जिसके लिए  उपलब्ध पुनर्वास भूमि पर कच्चे पक्के तीन शेड आदि से शुरुआत धीरे धीरे कुछ लोगो ने की , इस प्रयास से जहा कुछ परिवारों को रोजगार मिला वही इससे मजदूरो को भी स्थायी रोजगार के अवसर मिलने लगे . पूर्व में यह क्षेत्र ग्राम पंचायत था और भूमि पुनर्वास की , इसलिए कुछ शासकीय विभागों की कुछ औपचारिकताये तकनीकी खामियों की वजह से अधूरी थी , इसी बात के चलते वर्तमान में कई इकाइयों  पर तलवार सी लटक रही है , जिसके चलते   उद्योग संचालको में दहशत सी व्याप्त है , कई संचालको से जब प्रबल सृष्टि ने इसको लेकर बात की तो उनका यह कहना है कि , शासन यातायात और प्रदुषण के कारण  उन्हें यहाँ से स्थानांतरित करना चाहता है और वे भी शासन कि मंशा अनुरूप ही उद्योग भविष्य में चलाना  चाहते है . लेकिन दशको से उद्योग चलाने वालो की  भी शासन को एक बार जरुर सुननी चाहिए . अगर आज एकाएक उनकी मिलो की   बिजली काट दी जाएगी तो वे सड़क पर आ जायेंगे इससे भविष्य में वे कोई उद्योग चलाने की स्थिति  में ही नहीं रहेंगे . आज मुख्यमंत्री खुद देश विदेश घूमकर  प्रदेश में  नए नए उद्योगों को आमंत्रित कर रहे है      दूसरी और दशको से चलने वाले लघु मझौले उद्योग बंद होने  की कगार पर आ खड़े हुए है . संवेदनशील मुख्यमंत्री को इसपर विचार करते हुए ठोस और प्रभावी योजना के रास्ते जरुर खोलने चाहिए

कटनी ( मध्य प्रदेश ) - अखंड  भारत देश  के बंटवारे  की वो कभी न भूलने वाली त्रासदी सिन्धी समाज ने कैसे भुगती है यह सिन्धी समाज ही अच्छी तरह से जानता है ,1947 में  पश्चिम पाकिस्तान से जो  सिन्धी समाज कटनी के टिकुरी में आकार बसा था उसे केंद्र सरकार ने यहाँ की 399 एकड़ भूमि पुनर्वास के लिए दी , तत्कालीन प्रदेश सरकार ने  इस 399 एकड़ भूमि को 12  शीटो में विभाजित कर इसका इंतजाम अपने पास रखकर कुछ पात्रो को रिहाइशी पट्टो का वितरण किया बाद में कुछ व्यवसायिक पट्टो का भी वितरण किया गया लेकिन बाद  के कांग्रेस शासन काल में पट्टो के वितरण की संपूर्ण प्रक्रिया ही ठंडे बस्ते में डाल दी गयी  जिसके चलते ऐसे लोग भी प्रभावित हुए जो पुनर्वास भूमि  पर बस तो चुके थे लेकिन उन्हें पट्टा नहीं मिल पाया . आज इस 399 एकड़ भूमि पर गुजर बसर करने वाले वही पात्र लोग ही है जिनके लिए यह भूमि पुनर्वास के आरक्षित रखी गयी थी , लेकिन विडंबना देखिये बिना किसी शासकीय मदद के यहाँ पर बसे कुछ परिवारों ने दाल - राईस आदि जैसे जरुरी खाद्य सामग्री की मिलिंग करने का काम शुरू किया लेकिन पुनर्वास भूमि होने के चलते किसी न किसी शासकीय विभागों से कोई न कोई समस्या हमेशा मुंह  बांये खडी मिली , जैसे तैसे अपने अपने सीमित साधनों संसाधनों से मेहनत कश समाज आज तक उद्योग चलाने की चुनौती का सामना कर रहे थे , लेकिन एकाएक नींद से जागे प्रदुषण विभाग द्वारा  जारी  फरमान के आधार पर बिजली विभाग कुछ इकाइयों की बिजली काटने का नोटिस जारी कर चूका है जिससे  इन इकाइयों के संचालको , मजदूरो सहित अन्य वर्गो के सामने रोजी रोटी का संकट उत्पन्न होने का खतरा बढ़ गया है वो भी ऐसे समय में जब प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद प्रदेश में उद्योगों को बढावा देने का काम कर रहे हैं . क्या मनुष्य के भोजन से जुड़े दाल- भात के लिए इकाइयों को चलाने वालो को यूँही दर दर विभागों में भटकने के लिए छोड़ दिया जायेगा ? या इनकी  और अन्य सभी वर्गो की सहूलियत का ध्यान रखकर ही विकास की योजना को क्रियान्वित किया जायेगा ? संवेदनशील मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से सभी को आस है कि मात्र तकनीकी वजहों से वे इन उद्योगों को चौपट नहीं होने देंगे जिन उद्योगों को बसाने के  लिए कई परिवारों ने तो अपना पूरा जीवन ही बिता दिया है .  

बिना शासकीय मदद के लगाये खाद्य सामग्री के लघु मझोले उद्योग 
 पश्चिम पाकिस्तान से  आये सिन्धी समाज के सामने रोजगार की एक बड़ी चुनौती भी सामने थी चूँकि किसी भी परिवार के पास कोई  पूंजी तो थी नहीं जो अन्य जगह पर भूमि खरीद कर अपना व्यवसाय स्थापित करते . शासकीय मदद के नाम पर उसे सिर्फ यह पुनर्वास भूमि ही हासिल थी लेकिन सिन्धी समाज के कुछ परिवारों ने अपनी मेहनत और लगन के सहारे कुछ लघु उद्योग स्थापित कर दलहन से दाल आदि की मिलिंग का काम शरू  कर दिया जो बाद में विस्तृत होता चला गया . लेकिन आज  मात्र कुछ तकनीकी खामियों की वजह  से  इन लघु मझोले उद्योगों पर तलवार लटक सी गयी जिस पर शासन - प्रशासन को  विचार कर बिना शासकीय मदद से चलने वाले इन उद्योगों की मदद करनी चाहिए जिससे इनको बचाया जा सके

पहले से ही मौजूद औद्योगिक क्षेत्र का विस्तार भर कर देने से हो सकता है समस्या का हल 
मास्टर प्लान 2021 के अनुसार माधव नगर में  बसी औद्योगिक इकाइयों को लमतरा में  स्थानांतरित करना प्रस्तावित था जिसका कारण यातायात और  प्रदुषण की समस्या है . जबकि माधव नगर से लगा हुआ ही एक औद्योगिक क्षेत्र है जिसका विस्तार भर कर देने से यातायात और प्रदुषण की समस्या का स्थायी हल हो सकता है लेकिन किसी भी जनप्रतिनिधि ने अभी तक  अपनी जागरूकता का परिचय नहीं दिया है . इस  औद्योगिक क्षेत्र में आवागमन के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक  7  से सीधा आया जा सकता है वो भी बिना किसी बस्ती में प्रवेश किये बिना और यही नहीं इस औद्योगिक क्षेत्र के लिए शासन को भूमि अधिग्रहण भी नहीं करना पड़ेगा , यह औद्योगिक क्षेत्र नगर तथा ग्राम निवेश के उस नक्शे में ही  है जिस के आधार पर ही नगर की विकास योजना बनायीं गई है .  अभी अमकुही में फ़ूड पार्क बनाने की मंजूरी दी जा चुकी है जबकि यह किसी भी द्रष्टि से उपयुक्त नहीं माना जा रहा , जब नगर तथा ग्राम निवेश के  पास पहले से ही एक औद्योगिक क्षेत्र मौजूद था तो क्यों नहीं उसे ही विस्तार  दिया गया ? इसके विस्तार भर कर देने से माधव नगर में बसी तमाम छोटी बड़ी इकाइयों की हर समस्या का हल हो सकता है और इससे शासन को मिल वालो के लिए अन्य किसी भी भूमि का अधिग्रहण भी नहीं करना पड़ता ,  
 इससे जहा शासन को परेशानी नहीं होगी  वही सभी मिल वालो के लिए भी यह उपयुक्त रहता . स्थानीय अन्य व्यापारी  , मजदूर सभी वर्ग इससे पूर्व की तरह ही लाभान्वित होते  रहते .  

Friday, June 15, 2012

दिल्ली पब्लिक स्कूल में बच्चे के साथ अमानवीय व्यव्हार , शिकायत राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग पहुची


कटनी - बच्चो को अच्छी शिक्षा मिलने के रास्ते में  टांग अड़ा कर अपना व्यावसायिक हित साधने वालो  पर देश द्रोह का मामला दर्ज होना चाहिए ,,सेंट्रल स्कूल के सिविल कोटा वाले स्कूल को अपने प्रभाव से खुलने से पहले ही बंद करवा दिया जाता है ,,वो इसलिए कि बच्चे पूंजीपतियों द्वारा चलाये  जाने वाले  स्कूल में  ही पढने आये ,,पूंजीपतियों द्वारा चलाये जाने वाले स्कूलों में मासूम  बच्चो के साथ अमानवीय हरकते  की  जा रही  है और सांसद कलेक्टर तक  की बोलती बंद है ,, मध्य प्रदेश  के कटनी जिले में सेंट्रल स्कूल  के  सिविल  कोटा वाला स्कूल साजिश के तहत खुलने ही नहीं दिया जाता ,,ताकि कोयले के व्यापारी -खदान माफिया -विधायक  सभी स्कूल का यहाँ आराम से धंधा  कर सके ,,यहाँ दिल्ली पब्लिक स्कूल के नाम से एक स्कूल कोयला व्यापारी चला रहे है और मासूम बच्चो को प्रताड़ित  भी कर रहे है ,, 6 वर्ष के अमन लालवानी  को दिल्ली पब्लिक स्कूल  में इतना टॉर्चर किया गया है कि यह मासूम बच्चा खाना पीना और खेलना कूदना तक भूल गया है,, माता पिता ने स्कूल प्रबंधन को इसकी शिकायत की फिर भी उसके साथ वही बर्ताव किया गया ,,माता पिता बच्चे को अब स्कूल से निकालना  चाहते है ,,लेकिन स्कूल उनके हजारो रुपये अब वापस  नहीं करना चाहता ,, इसकी शिकायत सांसद और कलेक्टर तक से कि गयी है लेकिन पूंजीपति  कोयला व्यापारी के आगे सब बौने हो चुके है ,,बच्चे के पिता ने अब इसकी शिकायत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग नई दिल्ली को कर दी है ,,,मुख्य सवाल  अब  यह खड़ा होता है की क्या पूंजीपति इतने प्रभावशाली हो गए है की सेंट्रल स्कूल को अपने निजी फायदे के लिए खुलने से पहले ही बंद तक  करवा सकते है और मासूम बच्चो के साथ अमानवीय व्यव्हार तक करने की इन्हें छूट किसने दी है ,,, क्या ऐसे लोगो पर देश द्रोह का मामला दर्ज नहीं किया जाना चाहिए जो मासूम बच्चो की शिक्षा के रास्ते में अपना दखल देकर अपना हित साधने में लगे है ,,,क्या मध्य प्रदेश के सांसद कलेक्टर तक इनके आगे कुछ नहीं  लगते ? क्या शिक्षा जैसा अति महत्वपूर्ण विषय किसी माफिया की मर्जी के हिसाब से तय होगा ? क्या इनके हाथो में बच्चो का भविष्य सुरक्षित रह पायेगा ?
कटनी जिले के कोयला व्यापारी उत्तम चंद जैन दिल्ली पब्लिक स्कूल का संचालन कर रहे है यह अलग बात है कि शिक्षा क्षेत्र में यह उनकी घुसपैठ मानी जा रही है, इस स्कूल के निर्माण में उनके रिश्तेदार प्रमोद जैन का करोडो रुपया लगा हुआ है प्रमोद जैन  बिलासपुर  में कोयले का व्यापार कर रहे है ,,इस स्कूल  की स्थापना  के बाद से ही प्रबंधन  ने राजनैतिक  पहुच दर्शाने वाले विज्ञापन  अखबारों में जारी किये थे जिसके बाद से ही पूरे कटनी नगर में चर्चाये थी की कोयले की कमाई का पैसा स्कूल में लगाया गया है और अपने काले पैसे को सफ़ेद करने के लिए स्कूल का सहारा लिया गया है ,, आज इस स्कूल में चालीस से पचास हजार रुपये खर्च  करके ही बच्चो को दाखिला मिल पता है ऊपर से स्कूल में बच्चे से किया गया अमानवीय साबित कर रहा है कि शिक्षा की ऊँची ऊँची बात करने वाले इस स्कूल की असल सच्चाई   कुछ और ही है  ,,स्थानीय स्कूल प्रबंधन ने  दिल्ली पब्लिक स्कूल की प्रतिष्ठा की भी परवाह नहीं की है ,जाहिर है सिर्फ पैसा कमाना ही इनका मूल उद्देश्य लग रहा है ,,उत्तम चंद जैन और उनके मातहतो को स्कूल में बच्चो को अच्छा माहौल  देना चाहिए ना कि अमानवीय व्यव्हार करना चाहिए जिससे बच्चो का भविष्य बर्बाद तक हो सकता है .

Sunday, May 06, 2012

पुनर्वास भूमि पर अवैध मिले , अराजक यातायात - प्रदुषण ने आम आदमी का दम निकाला

कटनी - पुनर्वास भूमि पर अवैध रूप से बसाई गई  दाल व राईस  मिलो के  कब्जे में  ही ज्यादातर वह  पुनर्वास भूमि है जो सिर्फ रहवास के लिए आरक्षित थी , माधव नगर के गैर जिम्मेदार  कतिपय मिल वालो ने सिर्फ अपने निजी फायदे को  ध्यान में रखकर अवैध रूप से मिलो का निर्माण किया है जिसके चलते  ही आज माधव नगर के निवासी नारकीय जीवन भुगत रहे है . भारी ट्रको की चौबीसों घंटे आवाजाही हो या मिलो से होने वाला प्रदुषण हो ,इन सबका असर पुरे क्षेत्र  के निवासियों  के अलावा उन तमाम  स्कूली बच्चो पर भी पढ़  रहा है जो यहाँ के किसी न किसी स्कूल में पढ़ते है . मिल वालो की पिलाई गयी घुटी की वजह से ही  हर कानून यहाँ आकर निष्क्रिय कर दिया जाता है जिसका खामियाजा निर्दोष नागरिको , बच्चो को उठाना पढ़ रहा है मास्टर प्लान के अनुसार इन मिलो को यहाँ से हटाया  जाना है इससे खाली होने वाली भूमि कई सार्वजनिक प्रयोजनों के काम आ सकती है पुनर्वास विभाग को इसकी रूप रेखा भी बनानी चाहिए सूत्रों के अनुसार पुनर्वास  कब्ज़ा पंजी में अपना नाम  पुराने वर्षो में दर्ज करवाने पुनर्वास  विभाग पर दबाव बनाया जा सकता है

निजी भूमि है मिल वालो के पास फिर भी है पुनर्वास भूमि पर अवैध कब्ज़ा 
मास्टर प्लान के हिसाब से यहाँ बसी मिलो को लमतरा तथा  अमकुही में बसाया जाना निश्चित  हुआ है लेकिन कोई भी मुफ्त में अवैध रूप से हथियाई  गयी  पुनर्वास भूमि को छोड़ कर जाना ही नहीं चाहता , कइयो ने पास के गाँव इमलिया , तखला आदि कई गाँव की कृषि भूमि किसानो से औने पौने दामो में खरीदी है ,पुनर्वास भूमि का बेडागर्क करने के बाद अब कृषि भूमि को बेडागर्क करने की सुनियोजित साजिश रची जा रही है लेकिन जिला प्रशासन के अधिकारी ही जिले से कृषि व्यवसाय को समाप्त करने पर ही तुले दिखाई दे रहे है .तमाम मिल वालो के पास अपनी कई एकड़ो निजी भूमि भी है लेकिन यहाँ पुनर्वास की मुफ्त में एकड़ो हथियाई गयी भूमि पर अवैध कब्ज़ा है   

पुनर्वास विभाग की कार्यवाही कुछ दिन तक टली 

करीब सौ एकड़ पुनर्वास भूमि पर अवैध मिलो के निर्माण के चलते ही पुनर्वास विभाग सख्त रुख अपनाता है जिसका खामियाजा वर्षो से यहाँ निवास करने वालो को ही उठाना पढ़ रहा है . हाल ही पुनर्वास विभाग द्वारा ऐसे ही अवैध कब्जो को चिन्हित कर लाल निशान लगाये गए थे जिन पर कार्यवाही होनी है दिनांक  5 व 6 मई को प्रदेश  के गृह मंत्री उमाशंकर गुप्ता के कटनी आगमन के चलते शासकीय अमला इसमें व्यस्त था जिसके चलते ही कार्यवाही कुछ दिनों के लिए टाल दी गयी है सूत्रों के अनुसार पुनर्वास विभाग पर कार्यवाही टालने अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है

कटनी - माधव नगर में  यातायात , प्रदुषण समस्या उच्च स्तर पर पहुच गयी है . लोग स्वास सम्बन्धी बीमारियों से ग्रसित  हो रहे है .करीब पांच हजार स्कूली बच्चो को माधव नगर के  अराजक यातायात और प्रदुषण ने इस कदर परेशान कर रखा है कि स्कूल खुलने के समय हो सकता है , हजारो बच्चे मिल वालो कि वजह से  उत्पन  समस्या के खिलाफ सडको पर उतरकर प्रदर्शन करने लगे ,  माधव नगर में आज तक ऐसा कोई प्रदर्शन नहीं हुआ है लेकिन अवैध रूप से बसी मिलो कि वजह से उत्पन्न गंभीर समस्याओ कि वजह से ही ऐसा  अब जरुर हो सकता है . इस पूरे क्षेत्र में प्रदुषण का स्तर मिलो कि वजह से खतरनाक स्तर पर पहुच  गया है और  चौबीसों घंटे भारी ट्रको कि आवाजाही ने नागरिको का सडको पर पैदल चलना तक  दूभर कर दिया है सो अलग .करीब आधा दर्जन स्कूलों के छात्र छात्राए  आने जाने  के दौरान खतरों से जूझते है . प्रशासन ने भी हद दर्जे तक जैसे इन मिल वालो को नागरिको बच्चो की जान सांसत में डालने की छूट सी दे रखी है . हर कानून यहाँ आते आते निष्क्रिय कर दिया जाता है 

डायमंड  और उत्कृष्ठ विद्यालय  से पहुच चुकी है शिकायते

माधव नगर के डायमंड स्कूल में ही करीब बाईस सौ बच्चे पढ़ते . इस स्कूल के आस पास ही दर्जनों मिले अवैध रूप से बसी हुई है . अपने निजी फायदे कि परवाह करने वाले इन मिल मालिको को इसकी कोई परवाह ही नहीं कि स्कूल  लगने तथा छुट्टी के समय किस कदर खतरनाक  स्थिति   का सामना बच्चो को करना पढता है .यह समस्या कई वर्षो पुरानी है पर आज की परिस्थितियों में यह असहनीय हो चली है , कई अभिभावकों की झडपे ट्रक निकलने के दौरान चालको से होती रहती है .डायमंड स्कूल के प्राचार्य इस संबध में एक शिकायत भी लिखित  में नगर निगम आयुक्त को कर चुके है ऐसी ही एक शिकायत उत्कृष्ठ विद्यालय की प्राचार्य ने भी की है . अगर समय रहते जवाबदार विभागों  ने  इस और कार्यवाही नहीं की तो यह निश्चित है कि इनके सब्र का बांध फूट पड़ेगा .