Thursday, December 15, 2011

पानी को लेकर हम गृह युद्ध नहीं सह सकते

पानी के लिए अगर हम आपस में ही लड़ मरे , तो क्या हम मनुष्य कहलाने के हकदार है ? नहीं , हम तो जानवर कहलाने लायक भी नहीं रहेंगे । जानवर तो जल , जंगल और जमीन का कुछ इस्तेमाल भर ही करते है और हम कथित इंसान अपनी भ्रष्ट मति से प्रकर्ति को ही तोडना मरोड़ना चाहते है क्योकि हमारी शक्ल मनुष्यों जैसी है और हमारे काम शैतानो जैसे । इनदिनों पानी को लेकर तमिलनाडु और केरल के बीच तनाव बड़ा हुआ है और दोनों राज्यों के कथित कर्ता धर्ता अपने बयानों से इस तनाव को बढाने का ही काम कर रहे है । सुप्रीम कोर्ट दोनों राज्यों को इसके लिए फटकार लगा चूका है । पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम भी इस मसले को लेकर कह चुके है कि देश पानी को लेकर गृह युद्ध नहीं सह सकता । छोटे शहरो और कस्बो के अलावा बड़े शहरो में भी पानी को लेकर मामूली विवादों में हजारो जाने अभी तक जा चुकी है । अपने आपको सरकार चलाने के लिए ही पैदा हुआ मानने वाले कथित इंसानों ने प्रकर्ति द्वारा दिए गए वरदान जैसे जल , जंगल और जमीन का सत्यानाश सिर्फ अपने निजी फायदे के लिए करने की ठान रखी है ।हमारे वोट लेकर कुछ मुठी भर आदमी सरकार बन जाते है और अपनी मनमती से निर्णय लेकर हमारे भविष्य और हमारी आने वाली पीढ़ी तक को प्रभावित करना चाहते है । यह मुद्दे तो सीधे हमारी जरूरतों से जुड़े है इसलिए हम इसपर विचार करे जिससे कुछ तो ऐसा हल निकल कर आ सके वैसे पूर्व राष्ट्रपति कलाम साहब ने पानी के बांधो को सैन्य बलों को हवाले करने की बात की है आखिर कलाम साहब जैसे विद्वान की हमारा देश क्यों नहीं सलाह मानता ऐसे विद्वान जनों की सलाह और मार्गदर्शन की अति आवश्यकता है ।

Friday, December 09, 2011

प्रदेश कांग्रेस के गले की फांस बनता पाठक परिवार



मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार के खिलाफ मध्यप्रदेश विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव लाकर अरसे बाद एकजुट हुई कांग्रेस जब सदन में भाजपा मंत्रियो को घेर रही थी और बहुत हद तक इसमें कामयाब होते भी दिख रही थी तो वही दूसरी तरफ कांग्रेस के ही एक स्वयंभू भावी मुख्यमंत्री के तौर पर खुद को प्रचारित करने वाले विधायक संजय पाठक पर जबलपुर सिहोरा क्षेत्र से हजारो करोड़ रुपये के अवैध आयरन ओर उत्खनन के गंभीर आरोप लग चुके थे । अविश्वास प्रस्ताव के दौरान एक मिनट भी सरकार के खिलाफ न बोलने वाले विधायक पाठक अन्य विधायको को यह कहते हुए हाथ जोड़ रहे थे कि उनका नाम सदन में न उठाया जाए ।

अब विधायक और उनके परिवार के खिलाफ सडको पर प्रदर्शन हो रहा है , हाल के दो तीन महीनो में कांग्रेस प्रदेश में बढ़त की और थी और विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव लाना इसी का परिणाम था । संजय पाठक और इनके परिवार द्वारा हजारो करोड़ का अवैध उत्खनन करने की बात सामने आने से कांग्रेस जन भी चिंतित दिखाई दे रहे है । समूचे कटनी जिले में कांग्रेस की भद्द इतनी नहीं पिटी जितनी इस बार ८ दिसंबर को नगर निगम के सामने बीच सड़क पर पिटी । भाजपा संगठन का यह विरोध प्रदर्शन भी संजय पाठक और इनके परिवार द्वारा अपना राजनैतिक प्रभाव इस्तेमाल कर किये गए अवैध उत्खनन , भू माफियाओ को संरक्षण , गुंडागर्दी , कमीशनखोरी ,सिन्धी समाज के खिलाफ आधी रात को की गयी गाली गलोज,पूर्व टीआई अखंड प्रताप सिंह से जगजाहिर की गयी अभद्रता जिसके कारन टी आई ने नौकरी तक छोड़ दी थी और इनके लोगो द्वारा किये जा रहे गैर कानूनी कार्यो के विरोध स्वरुप ही यह प्रदर्शन था ।

भाजपा विधायक राजू पोद्दार और अध्यक्ष ध्रुवप्रताप सिंह सहित तमाम नेताओ ने प्रदर्शन में कहा की आज से बीस पचीस साल पहले पाठक परिवार के पास क्या था ? सत्येन्द्र पाठक जब खाद्य मंत्री बने तो पूरे प्रदेश की सरकारी बोरियो को बेच कर खा गए , संजय पाठक जब जिला पंचायत अध्यक्ष बने तो पूरे जिले में दस प्रतिशत कमीशन इन्होने खाई है और वर्ष २००३ से खदान का काम करने लगे है । जाहिर है इन तमाम गंभीर आरोपों का सीधा वास्ता कांग्रेस की बजाये पाठक परिवार से है और समूची कांग्रेस अब इन्ही वजहों से घिरती दिख रही है । विधानसभा में विधायक संजय पाठक द्वारा अपना नाम न उठाने के लिए गिडगिडाना प्रभावी बनती कांग्रेस के जोश को ठंडा करने की लिए काफी है । अब इस विधायक पर कांग्रेस आलाकमान जो रुख अपनाएगा वही रुख प्रदेश में कांग्रेस की दिशा को भी तय करेगा । कर्णाटक के रेड्डी बंधुयो की तरह पाठक परिवार की कारगुजारी अब सबके सामने है ।


नगर निगम में सौ करोड़ के घोटाले की तैयारी


भाजपा विधायक राजू पोद्दार ने पाठक परिवार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान सनसनीखेज खुलासा करते हुए कहा की पिछले ९ नवम्बर को नगर निगम में एक बैठक आयोजित की गयी थी जिसका प्रस्ताव बिंदु क्रमांक ५ में ५०७ करोड़ रुपये के खर्च का प्रस्ताव है जबकि ४०० करोड़ रुपये का कुल वास्तविक खर्च है और ७ करोड़ रुपये अन्य वजह से खर्च किये जायेंगे । सीधे सीधे १०० करोड़ रुपये का घोटाला करने की तैय्यारी है । देखा जाए तो यह तमाम ऐसी बाते है जो आम जनता को तो पता ही नहीं चल पाती , अगर इस तरह से जनता की गाढ़ी कमाई से घोटाला कर अपना घर भरा जा रहा है तो यह संगीन अपराध है । नगरिय प्रशासन और कांग्रेस आलाकमान को भी यह देखना होगा की कही जनता की सेवा के बदले जनता की आँखों में धुल तो नहीं झोंकी जा रही है ।

Friday, December 02, 2011

साधू के भेष में डाकू - डाक्टर के भेष में धंधेबाज

इंग्लिश बीमारी एड्स के नाम पर शहर की सडको पर डाक्टर लोग हाथो में बेनर लेकर निकलते है और चाहते है इनके फोटो और समाचार अखबारों में छपे जिससे लोगो को पता चले कि ये डाक्टर आम आदमी के स्वास्थ के प्रति जागरूक है । आम आदमी के स्वास्थ के प्रति अपनी गहरी चिंता जताने के लिए उच्च किस्म के कुछ डाक्टर रेलिओ , सेमिनारो और दूर देशो की यात्रा कर आते है । सरकारी अस्पतालों में अपनी ड्यूटी करने की बजाये अपना निजी अस्पताल खड़ा करने का मकसद हमेशा से कुछ डाक्टारो का रहा है । ऐसे डाक्टर इसे अच्छा टिकाऊ रोजगार का बढियां अवसर मानते हुए अपनी संतानों को भी तरह तरह की डिग्रिया दिलाकर एक और फर्म यानि अस्पताल शुरु कर देते है , यह आप भी अच्छी तरह से जानते होंगे की आजकल डिग्रिया किसे और कैसे मिल जाती है । चलो ठीक है अपना अस्पताल बनवा लो , बंगला बनवा लो किसी को कोई हर्ज नहीं है पर डाक्टर साहब गरीबो की पहुच वाले अस्पताल तो आओ , मरीजो को रिफर करने के लिए नहीं उनका इलाज करने के लिए आओ . आप रोजाना समाचार पत्रों में टी वी चैनलों में सरकारी अस्पतालों में मरीजो की हालत देखते होंगे कई तो आप खुद भी तजुर्बा रखते होंगे । अस्पतालों की दवाइयां एक्सपाइरी होकर कचरे के ढेर में पड़ी रहती है लेकिन किसी गरीब के काम क्यों नहीं आ पाती ।


अब हर शहर का तो नहीं लेकिन कटनी शहर का हाल स्पष्ट बता रहा हू , यहाँ जिला अस्पताल में मरीजो को दुत्कारा जाता है , इलाज करने की बजाये रिफर करने की प्राथमिकता रहती है , दुसरे ब्लड ग्रुप तक का ब्लड मरीजो को चढ़ा दिया जाता है और रेलिया , सेमिनार में भाग लेने वाले डाक्टर लोकल दवाइयां बनवाने वालो के साथ अपने विदेश दौरे या गिफ्ट पर चर्चा कर रहे होते है । कटनी जिले के कुछ खास डाक्टरों ने अपनी क्लिनिक के बाहर ही खास किस्म की (लोकल बनवाई जा रही दवाइयां )की दुकान खुलवा रक्खी है ताकि जो वे लिखे वही से पाए । २० -२५ रुपये लगत वाली दवाए १००-१२० रुपये में कुछ डाक्टर बिकवा रहे है । एक डाक्टर अपना निजी नर्सिंग होम ही बिजली चोरी कर चला रहे थे साथ ही घर को भी रोशन कर रहे थे । कुछ डाक्टरों की वजह से अब यह पेशा सेवा का न होकर धंधा बन सा गया है और जब इसे वरिष्ठ डाक्टारो को भी करते देखता हूँ तो दुःख होता है । मेरा उद्देश्य यहाँ डाक्टारो को बदनाम करना नहीं बल्कि डाक्टारो के भेष में छुपे कुछ धंधेबाजो की थोड़ी सी कार्यप्रणाली भर बताना है .

मंत्री का काम एक दिन में होगा आम आदमी भटकता रहेगा



रजिस्ट्रार फर्म एंड सोसाइटी का रीवा संभाग कार्यालय भरी अव्यवस्थाओ का शिकार हो गया है इस कार्यालय के अंतर्गत शहडोल संभाग भी आता है । करीब दो साल पहले यहाँ असिस्टंट रजिस्ट्रार की कुर्सी खाली थी तब मध्य प्रदेश शासन ने जबलपुर के असि रजिस्ट्रार जे के दुबे को यहाँ का प्रभार दिया था , बाद में इस जगह पर शासन ने असि रजिस्ट्रार बी डी कुबेर की नियुक्ति भी कर दी लेकिन उन्हें प्रभार नहीं दिया जिस कारन शहडोल और रीवा संभाग के लोग यहाँ फर्म और सोसइटी का पंजीयन कराने के लिए चक्कर पर चक्कर काट रहे होते है क्योकि प्रभार वाले साहब जबलपुर से महीने दो महीने में ही आ पाते है ।हालत यह है की खनिज मंत्री राजेंद्र शुक्ल की पार्टनरशिप वाली फर्म भैयालाल शुक्ल एंड कम्पनी का काम भी रुका था जब मंत्री जी ने प्रभार वाले जे के दुबे को फ़ोन किया तो उनका काम एक दिन में जबलपुर से रीवा आकर करके चले गए । रीवा संभागायुक्त धर्माराव भी इस कार्यालय की अव्यवस्थाओ से खासे परेशान है । जब तक राज्य शासन इस समस्या का समाधान नहीं करेगा तब तक यहाँ भटकन जारी रहेगी , तथास्तु ।