Wednesday, November 23, 2011

कचहरी परिसर में हुई हत्या दहशत कायम करने के लिए



मुझे इस बात का पक्का यकीन है कि अपराधी प्रवर्ती के इटन ने मन्नू भारती कि हत्या करने के लिए कटनी कचहरी परिसर जैसा स्थान जानबूझकर चुना ताकि उसकी दहशत शहर में कायम हो जाये । दिनदहाड़े कचहरी परिसर के बाहर कनपटी पर गोली मरने का उद्देश्य मृतक मन्नू और इटन के बीच आपसी वर्चस्व की लड़ाई ही थी। फ़िलहाल जेल में बंद इटन अवैध उत्खनन , शराब माफिया आदि दो नम्बर के कारोबार करने वालो का सहयोगी रहा है । यही लोग इटन जैसे अपराधियो को पालते पोसते है और अपना काम निकलवाते है । जिला प्रशासन पिछले कई दिनों से अवैध उत्खनन करने वालो के खिलाफ कार्यवाही भी कर रहा था जिसके चलते इसमें संलग्न तत्वों पर अंकुश लग गया था । हत्या जैसा अपराध करने वालो से आम शरीफ आदमी वैसे ही घबराता है । कटनी जिले में किस्सू तिवारी का नाम लगभग हर आदमी जानता है । आधा दर्जन से ज्यादा हत्या व हाथ काटने वाला यह खूंखार सालो से फरार घोषित है । पुलिस के बड़े अफसर भी किस्सू तिवारी के नाम से कापते है , शहर के लोग भी दबी जुबान से ही इसका लेते है । सालो से शांत पड़ी कटनी अब पुनः जघन्य अपराधो की वजह से चर्चा में आ गयी है ।

Friday, November 18, 2011

सूफी परम्पराओं और साहित्य ने भारत के लोक जीवन को गहरे तक प्रभावित किया है


मध्य प्रदेश के राज्यपाल श्री राम नरेश यादव ने १८ नवम्बर को भोपाल के भारत भवन में सूफीवाद पर तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन करते हुए कहा कि ईश्वर को प्रेम का रूप मानकर सम्पूर्ण सृष्टि से प्यार करना ही सूफीवाद की मूल भावना है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक धर्म का यही तो सार है। श्री यादव ने कहा कि सूफीवाद की विचारधारा जब तक पूरी दुनिया में कायम है, तब तक इंसानियत बनी रहेगी। राज्यपाल ने कहा सूफीवाद आध्यात्मिक स्तर पर मानव के अंतर मन की एक अवधारणा है। आत्मा की परमात्मा तक पहुंचने की लालसा और उसके लिए किये जाने वाले प्रयत्न सूफीवाद का आधार हैं। उन्होंने कहा आध्यात्मिक ऊंचाईयां, मन की शांति, धर्म निरपेक्षता, इंसानों की समानता सूफीवाद के प्रमुख सिद्धांत हैं। धार्मिक आडम्बरों, नियमों, जाति भेद, रंगभेद और सीमाओं को सूफीवाद कभी बढ़ावा नहीं देता है। श्री यादव ने कहा कि सूफीवादी दर्शन से इंसानी अस्तित्व की सार्वभौमिकता का प्रभाव काफी विस्तृत और सकारात्मक हो जाता है। पूर्व में राज्यपाल ने सूफीवाद की परम्परा के अनुसार जल में गुलाब की पंखुरियां अर्पित कर संगोष्ठी का शुभारम्भ किया। संगोष्ठी का आयोजन दि फाउन्डेशन आफ सार्क राईटर एवं लिटरेचर, नई दिल्ली द्वारा किया गया था। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि टर्की की सीमेल नुर सरगुट थीं। संगोष्ठी में संगठन की अध्यक्ष श्रीमती अजीत कोर ने स्वागत भाषण देते हुए आयोजन के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने अतिथियों को शाल भेंटकर उनका स्वागत किया।
राज्यपाल श्री राम नरेश यादव ने कहा कि सूफी परम्परा का आध्यात्मिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक और रचनात्मक क्षेत्रों में हमारी लोक परम्परा और लोक जीवन पर गहरा प्रभाव रहा है। लोक स्मृतियों से उसका गहरा सरोकार है। सूफी साहित्य में लोक स्मृतियों में बसी कथाओं,गाथाओं और वाचिक परम्परा के तत्वों का समावेश होता है, इसलिए उनकी रचनाओं का भी समाज में गहरा प्रभाव पड़ा। सूफी रचनाकारों ने अरबी,फारसी के साथ-साथ हिन्दी शब्दों और मुहावरों का उपयोग कर अभिव्यक्ति का व्यापक रूप विस्तारित किया।
राज्यपाल श्री यादव ने मध्यप्रदेश के बुरहानपुर को सूफी दर्शन, साहित्य संरचना, तत्वज्ञान,धार्मिक विचारधारा, मत-मतान्तरों की गहन समीक्षा का केन्द्र बताते हुए कहा कि मध्य काल में बुरहानपुर नगर की पहचान ओलियाओं की नगरी के रूप में स्थापित हुई थी। इस नगर को अपनी तपो भूमि व कर्म भूमि बनाने वाले सूफी संत ही थे। उन्होंने भोपाल में इस संगोष्ठी के आयोजन को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि संगोष्ठी में भाग लेने वाले विभिन्न राष्ट्रों के विचारकों द्वारा सूफीवाद पर व्यक्त विचारों से पूरी दुनिया में इंसानी भाईचारे, एकता, अखण्डता,प्यार और भेदभाव रहित समाज की रचना का संदेश जायेगा।
संगोष्ठी शुभारम्भ कार्यक्रम का सबसे प्रमुख आकर्षण था बाउल सिंगर सुश्री पार्वती द्वारा दो भक्ति नृत्य गीतों की भाव विभोर कर देने वाली प्रस्तुतियां। बहुत मधुर स्वरों के आरोह और अवरोह तथा नृत्य की मंत्रमुग्ध करती चपल भंगिमाओं ने उपस्थित श्रोताओं को आनंद की फुहारों में सराबोर कर दिया। अनेक श्रोता इन प्रस्तुतियों में मंत्रमुग्ध होकर ऐसे आकंठ डूब गये थे की वे साथ-साथ गाने से स्वयं को रोक नही सके थे। प्रस्तुतियों की समाप्ति पर उपस्थित लोगों ने देर तक तालियां बजाकर प्रस्तुतियों का स्वागत किया।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि सीमेल नुर सरगुट ने कहा कि आध्यात्मिक प्रेम से दुनिया बहुत सुंदर बनती है। आपसी नफरत और नकारात्मक विचारधाराओं से दूर रहकर ही परमात्मा का वास्तविक चेहरा देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि संत की कभी मृत्यु नहीं होती। वे हमेशा जीवित रहते हैं। हमें परमात्मा से प्रेम करना चाहिए। यही सच्ची इंसानियत है। उन्होंने आमजनों से कहा कि सृष्टि के हर जीव से प्यार करने के साथ-साथ हमें अपने अंतरमन को उदार और विशाल बनाना होगा तभी हम क्षमा कर देने जैसे विलक्ष्ण गुणों को अपने अंतर में विकसित कर सकेंगे। यही परमात्मा की सीख है। उन्होंने कहा तसव्वुफ का अर्थ स्वतंत्रता होता है। यह स्वतंत्रता आपसी राग -द्ववेष, कटुता, मत विभिन्नता और आडम्बरों से आजादी पाना है।
अध्यक्षीय भाषण देते हुए डा. आबिद हुसैन ने कहा कि आज का दौर आतंकवाद, अलगाववाद और नफरत का दौर है। धर्म के नाम पर एक दूसरे की खिलाफत की जा रही है। समय के इस खतरनाक मोड़ पर इन भयावह प्रश्नों के उत्तर खोजने निकलें तो सूफीवाद ही सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर की तरह सामने आता है। उन्होंने कहा कृष्ण के उपदेश और गांधी के संदेश वही हैं जो सूफीवाद की मूल अवधारणा है। उन्होंने कहा कि अंतरमन के नैतिक साहस और जीवन के मूल्यों को अपनाकर ही विषमता से पार पाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि संगीत और नृत्य हमारी आंतरिक आनन्द की अनुभूतियों को व्यक्त करने के मूल माध्यम हैं। श्री आबिद हुसैन ने कहा कि हमारा दिल गरीबों के लिए धड़कना चाहिए। उसे असमानता के विरूध सख्त होना चाहिए। विचारों का यही रास्ता सूफीवाद है।
इस अवसर पर इजिप्ट के डा. मटकोर, ईरान के डा. मरीम नियाजी, तुर्केमिनिस्तान के डा. उवेजोव अन्नागुड़ी पाकिस्तान के श्री सलीम आगा, श्रीलंका के श्री सामंत लनगाकून, नेपाल के प्रो. अभि सुबेदी, और अफगानिस्तान के सैय्यद अहमद चिश्ती भी उपस्थित थे। समारोह में राज्यपाल श्री राम नरेश यादव और विशिष्ट अतिथियों को अजमेर की दरगाह प्रतिनिधियों ने सिर पर साफा बांधकर और दरगाह की चादर भेंट कर सम्मानित किया। अंत में श्री मनमोहन सिंह मितवा ने आभार व्यक्त किया।

निजी-सार्वजनिक भागीदारी से होगा मध्य प्रदेश में रेल्वे ओवर ब्रिज निर्माण

प्रदेश में रेल्वे ओवर ब्रिज का निर्माण में निजी-सार्वजनिक क्षेत्र की परस्पर भागीदारी सुनिश्चित की जायेगी। इसके लिये मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम द्वारा प्रदेश में 46 रेल्वे ओवर ब्रिज के निर्माण के लिये एक हजार करोड़ रूपये के प्रस्ताव तैयार किये गये हैं। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में रेल्वे ओवर ब्रिज निर्माण में पहली बार यह पहल हो रही है।
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने १७ नवम्बर को राज्य मंत्रालय में केन्द्रीय रेल मंत्री श्री दिनेश त्रिवेदी के साथ प्रदेश के सांसदों की बैठक में इस आशय की जानकारी दी और केन्द्रीय रेल मंत्रालय से इस पहल में सहयोग करने का आग्रह किया।
बैठक में सांसदों ने रेल्वे ओवर ब्रिज और अंडर ब्रिज के निर्माण में प्रक्रियागत विसंगतियों और अनावश्यक विलम्ब की स्थिति की ओर केन्द्रीय रेल मंत्री का ध्यान आकर्षित किया। राज्य शासन की इस पहल से रेल्वे ओवर ब्रिज के निर्माण में तेजी आयेगी और शहरी यातायात व्यवस्था में सुधार होगा।
सांसद सुश्री अनसुइया उईके ने छिन्दवाड़ा में रेल्वे ओवर ब्रिज निर्माण में विलम्ब की ओर रेल मंत्री का ध्यान आकृष्ट करते हुये समय-सीमा में पूरा करने का आग्रह किया। सांसद श्री रघुनंदन शर्मा ने उज्जैन में प्रस्तावित रेल्वे ओवर ब्रिज को शीघ्र पूरा करने के लिये समय-सीमा निर्धारित करने का भी अनुरोध किया। सांसद श्री वीरेन्द्र ने टीकमगढ़, छतरपुर संसदीय क्षेत्र में हरपालपुर और निवाली में रेल्वे ब्रिज के निर्माण की आवश्यकता बताई। भोपाल के सांसद श्री कैलाश जोशी ने भोपाल में चार ओवर ब्रिज और तीन अंडर ब्रिज का काम शीघ्र पूरा करने की मांग की।

Sunday, November 06, 2011

में तो फिर चला धरती पर बसे स्वर्ग में , ६४ वाँ निरंकारी संत समागम १२,१३ १४ नवम्बर को दिल्ली मे



जब शरीर में बसी इस आत्मा को अपने परमात्मा के तत्त्व की पहचान हो जाती है तो जीवन सुख और विकास के पथ पर अग्रसर हो जाता है । मेरे जीवन की आम शुरुआत इस धरती पर जन्म लेने से होती है लेकिन जीवन में परमआनंद और विकास निरंकारी बाबा हरदेव सिंह जी महारज के उस ज्ञान से प्राप्त हुआ है , जिस ज्ञान को सदगुरु की कृपा से प्राप्त करने के बाद दुनिया के तमाम दुनियावी ज्ञान अपने आप ही समझ में चले आते है । यह ज्ञान कोई शब्द या उच्चारण भर नहीं है यह ज्ञान तो पूर्ण जानकारी है कण - कण में समाये ईश्वर , भगवान , अल्लाह , वाहेगुरु , गाड तथा अनेको अनेक नामो का जिनका नाम दुनिया वाले ले तो रहे होते है लेकिन वस्तु का पता नहीं होता । परमात्मा नाम की वस्तु समय के सदगुरु बाबा हरदेव सिंह जी महारज जी की कृपा से ही प्राप्त होती है । यही ज्ञान भगवान कृष्ण ने अर्जुन को दिया था ।


सदगुरु बाबा जी की कृपा से ब्रह्मलीन ब्रह्मऋषि रूपलाल जी (कोटा वाले ) ने मुझे करीब १७ वर्ष पहले इस हर जगह मौजूद परमात्मा की जानकारी करा दी । इसके बाद के जीवन को में शब्दों में तो कह ही नहीं सकता , बस इतना कह सकता हू कि अब में कुछ नहीं करता बस यही कर्ता है । मुझे तो इसने अपना बेटा बना लिया है , मेरे हर पल का यही ख्याल रखता है । पिछले १५ वर्षो से में देश कि राजधानी दिल्ली के बुराड़ी रोड पर स्थित समागम मैदान में आयोजित निरंकारी संत समागम में जा रहा हूँ , इस बीच सिर्फ दो बार ही नहीं जा सका वो भी इसकी मर्जी थी ।


६४ वा वार्षिक संत समागम १२ , १३ , १४ नवम्बर २०११ को सदगुरु की छत्रछाया में आयोजित है । निरंकार परमात्मा साक्षात् सदगुरु रूप में यहाँ भौतिक रूप से विराजमान होता है । भारत देश के अलावा पूरे विश्व से भक्त जन यहाँ पर लाखो की तादाद में आते है , जैसे एक धागे में मोती रहकर माला बन जाते है वैसे ही । यहाँ पर सभी प्रबंध संत निरंकारी मिशन के सेवादल के बहन भाई और भक्त जन ही करते है । एक परमात्मा की जानकारी प्राप्त कर चुके लाखो भक्तो की भावनाओ का एक अनुष्ठान है यह संत समागम । यह सुअवसर होता है सदगुरु से सीधे रहमते प्राप्त करने का । तरह तरह की भाषा , वेशभूषा , संस्कृति यहाँ पर एक ज्योति के प्रकाश पुंज को प्रकट कर रही होती है । लगभग ४५० एकड़ में एक पूरी दुनिया सी बस जाती है । मेरे सदगुरु बाबा हरदेव सिंह जी महाराज ने मेरे जैसे लाखो करोडो का जीवन स्वर्ग बना दिया है , में तो बस थोडा सा ही समय निकाल कर इसकी ढेर सारी रहमते लेने जाता हूँ । मेरे अन्दर ढेर सारी कमियां है फिर भी मेरा सदगुरु मुझे अपनी शरण में लेता है और इस स्वर्ग का हिस्सेदार मुझे भी बनाता है । इस बार में अकेला अपने दो मित्रो और कटनी की साध सांगत के साथ इस समागम में जा रहा हूँ , मेरे बच्चो की परिक्षाए है इसलिए मेरा परिवार नहीं जा पा रहा है । मेरा सदगुरु तो समागम में मौजूद होने के साथ निरंकार रूप में मेरे परिवार के साथ घर में भी रहेगा यह तो हर समय हर जगह मौजूद रहता है , पूरे ब्रह्माण्ड में इसकी मौजूदगी रहती है और इस पूर्ण परमात्मा ने मुझ तुच्छ को अपना बना लिया है अब जो भी है यही है । इसलिए में तो चला धरती पर बसे स्वर्ग में ।