Monday, August 29, 2011

खेल अलंकरण समारोह सम्पन्न, मेजर ध्यानचंद को मिले भारत रत्न - मुख्यमंत्री श्री चौहान












मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने राज्य सरकार द्वारा दी जाने वाली खेल पुरस्कार राशि को दो-गुना करने की घोषणा की है। इस घोषणा से उत्कृष्ट खेल प्रशिक्षकों को दिए जाने वाले विश्वामित्र सम्मान, लाइफ टाइम एचीव्हमेंट सम्मान, उत्कृष्ट खिलाड़ियों को दिए जाने वाले विक्रम सम्मान की राशि 50 हजार से बढ़ाकर एक लाख रूपये और 19 वर्ष से कम आयु वाली खेल प्रतिभाओं को दिये जाने वाले एकलव्य सम्मान की राशि 25 हजार से बढ़कर 50 हजार रूपये हो जायेगी। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने पुन: दोहराया है कि भारत रत्न सम्मान सर्वप्रथम हॉकी के जादूगर स्व. मेजर ध्यानचंद को मिलना चाहिये।
श्री चौहान आज राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर स्थानीय तात्या टोपे राज्य खेल परिसर के मार्शल आर्टस अकादमी हाल में खेल अलंकरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित 15 खिलाड़ियों को एकलव्य सम्मान, 9 को विक्रम सम्मान, 3 प्रशिक्षकों को विश्वामित्र सम्मान से विभूषित किया। उन्होंने लाइफ टाइम एचीव्हमेंट सम्मान खेल प्रशिक्षक स्वर्गीय डा. शफकत मोहम्मद खान के पुत्रों फ़राज और सिकंदर मोहम्मद खान को प्रदान किया। इस सम्मान से स्व. श्री खान को मरणोपरांत विभूषित किया गया है। कार्यक्रम के प्रारम्भ में मुख्यमंत्री श्री चौहान ने हॉकी खिलाड़ी स्वर्गीय ध्यानचंद के जन्म-दिवस पर उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर, भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि खेलों से दुनिया में देश का गौरव बढ़ता है। उन्होंने कहा कि खेलों के लिए बुनियादी सुविधाओं में कमी नहीं होगी। सरकार द्वारा विगत वर्षों में खेलों के बजट में अभूतपूर्व वृद्धि की है। आवश्यकता होने पर इसे और बढ़ाया जायेगा।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि वर्तमान समय में क्रिकेट खेल के प्रति बहुत अधिक आकर्षण है। पर्याप्त साधन और संसाधन मौजूद है। प्रदेश में अन्य खेलों को बढ़ावा देने के लिए खेल अकादमियों की स्थापना की गई है। इन अकादमियों को और अधिक बेहतर बनाने के लिए संचालन संबंधी जिन व्यवस्थाओं की आवश्यकता होगी, उपलब्ध करवाई जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में विगत वर्षों के दौरान खेल विभाग द्वारा सराहनीय कार्य और उल्लेखनीय उपलब्धियां अर्जित की हैं। आगे भी उपलब्धियाँ प्राप्त हों, इसे चुनौती के रूप में लिया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने हॉकी खिलाड़ी स्वर्गीय ध्यानचंद का स्मरण करते हुए कहा कि उनकी खेल प्रतिभा का कायल होकर ही हिटलर ने उन्हें हॉकी का जादूगर कहा था। उनके जन्म-दिवस को खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस अद्भुत खिलाड़ी के सम्मान के लिए आवश्यक है कि भारत रत्न प्राप्त करने वाले पहले खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद ही हों। उन्होंने कहा कि सचिन तेन्दुलकर को भी भारत रत्न मिलना चाहिए।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि खेल स्पर्धा नहीं भावना है। विकास और प्रगति के वर्तमान युग में जीवन में स्पर्धा निरंतर बढ़ रही हैं जीवन जटिल हो गया है, जिन्दगी यदि खेल हो जाए तो जिन्दगी का रंग ही बदल जाता है। उन्होंने कहा कि खेलों में राजनीति को नहीं, राजनीति में खेलों को लाना चाहिए। उन्होंने कहा कि खेलों को राजनीति से मुक्त रखा जाना चाहिए। राजनीति दूर रह कर खेलों को बढ़ावा दे, खेलों के लिए यही अच्छा होगा।
पर्यटन, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री तुकोजीराव पवार ने कहा कि खिलाड़ियों को मिलने वाले पुरस्कार उनके प्रयासों का उत्साहवर्धन है। अभी उन्हें निरंतर अभ्यास कर, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त करने हैं। उन्होंने खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों को उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएँ देते हुए राज्य सरकार द्वारा खेलों के प्रोत्साहन के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।
कार्यक्रम के अध्यक्ष सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री श्री कैलाश जोशी ने कहा कि खिलाड़ियों को बेहतर प्रदर्शन के लिए राज्याश्रय होना जरूरी है। देशी रियासतों के राज्याश्रय में अनेक प्रसिद्ध खिलाड़ी हुए। उसके बाद खेलों की गतिविधियाँ औपचारिक हो गई थी। उनके लिए समुचित बजट का भी प्रावधान नहीं होता था। श्री जोशी ने कहा कि पिछले सात वर्षों में प्रदेश में खेलों की स्थिति बदली है। पहले जो 5-6 करोड़ का बजट होता था, वह बढ़कर 100 करोड़ रूपए का हो गया है। इसके परिणाम पदकों के रूप में मिलने लगे हैं।
विशिष्ट अतिथि श्री ओमकार सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश में खेलों के विकास कार्यक्रमों को देखकर उन्हें हार्दिक प्रसन्नता है। उन्होंने कहा कि खेलों के विकास के अत्याधुनिक कार्यक्रम मध्यप्रदेश में चल रहे हैं उन्होंने कहा कि इन प्रयासों के परिणाम शीघ्र ही मिलेंगे, जरूरत इस उत्साह और अभ्यास को बनाए रखने की है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री चौहान ने अंतर्राष्ट्रीय शूटिंग खिलाड़ी श्री ओमकार सिंह का अभिनंदन किया और उनको एक लाख रूपये की राशि और स्मृति-चिन्ह भेंट किया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने शिखर खेल अंलकरण स्मारिका का विमोचन भी किया।
कार्यक्रम में वित्त मंत्री श्री राघवजी, विधायक सर्वश्री विश्वास सारंग, श्री ध्रुवनारायण सिंह, पुलिस महानिदेशक श्री एस.के. राउत, सचिव खेल एवं युवा कल्याण श्री अशोक शाह, संचालक खेल एवं युवा कल्याण श्री शैलेन्द्र श्रीवास्तव एवं बड़ी संख्या में खिलाड़ी, पालक, खेल प्रशासक और खेल-प्रेमी उपस्थित थे।

Sunday, August 28, 2011

युवा और देश का इतिहास



आधुनिक विचारों के धनी भारतीय युवा
युवा किसी भी देश के विकास में महत्वपूर्ण होते हैं, उन्हें अच्छे बनने की प्रेरणा इतिहास से मिलती है। भारत को युवाओं का देश कहा जा सकता है और देश की तरक्की में इनका महत्वपूर्ण योगदान है। आज ही नहीं, आजादी से पहले ही युवा देश के विकास और आजादी में काफी आगे रहे हैं। देश के पूरे स्वतंत्रता आंदोलन में युवाओं का जोश व मजबूत इरादा हर जगह नजर आया है। चाहें वह महात्मा गांधी के नेतृत्व में अंहिसात्मक आंदोलन या फिर ताकत के बल पर अंग्रेजों को निकाल बाहर करने का इरादा लिए युवा क्रांतिकारी, सभी के लिए इस दौरान देश की आजादी के सिवाय बाकी सभी चीजें गौण हो गई थीं। स्कूल, कॉलेज राष्ट्रीय गतिविधियों के प्रमुख केंद्र बन रहे थे। इस दौरान शिक्षा का मतलब ही राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली बन गया था। जिसके अंतर्गत अंग्रेजी स्कूलों मिशनरी शिक्षा संस्थानों का बहिष्कार किया गया।
भगत सिंह
23 साल की उम्र बहुत नहीं होती। उम्र के जिस पडाव पर आज के युवा भविष्य, कॅरियर की उधेडबुन में रहते हैं भगत सिंह ने उसी उम्र में अपना जीवन ही राष्ट्र के नाम कर दिया था। दुनिया उन्हें फिलोशफर रिवोल्यूशनर के नाम से जानती है , जो गोली बदूंक की धमक से ज्यादा विचारों की ताकत पर यकीन रखते थे। डीएवी कॉलेज, लाहौर से शिक्षित भगत सिंह अंग्रेजी, हिंदी, पंजाबी, उर्दू पर बराबर अधिकार रखते थे। लेकिन ऐसे प्रतिभावान युवा के लिए जीवन की सुखद राहें इंतजार ही करती रह गई, क्योंकि उनका रास्ता तो कहीं और से जाना तय लिखा था- जी हां, बलिदान की राह का पथिक बन भगत सिंह ने अपना नाम सदा सदा के लिए इतिहास के पन्नों में अमर कर दिया और इतने वषरें के बाद भी आज हर युवाओं के धडकन में समाए हुए हैं।
चंद्रशेखर आजाद
छोटी सी उम्र लेकिन हौसले इतने बुलंद कि दुनिया की सबसे ताकतवर सत्ता भी उसके आगे बेबस नजर आई। केवल पंद्रह साल की उम्र में जेल गए, अंग्रेजों के कोडे खाए। फिर तो इस राह पर उनका सफर, शहादत के साथ ही खत्म हुआ। हम बात कर रहे हैं अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की। मां की इच्छा थी कि उनका चंदू, काशी विद्या पीठ से संस्क ृत पढे। जिसके लिए उन्होंने वहां प्रवेश भी लिया, लेकिन नियति ने तो उनके लिए कुछ और ही तय कर रखा था।
सुभाष चंद्र बोस
समृद्ध परिवार, असाधारण मेधा , बेहतर शक्षिक माहौल। कहने के लिए तो एक शानदार कॅरियर बनाने की वो सारी चीजें उनके पास मौजूद थी, जिनकी दरकार छात्रों को होती है। लेकिन सुभाष ने वो चुना जिसकी जरूरत भारत को सर्वाधिक थी। आजादी की। 1918 में सुभाष चंद्र बोस ने स्कॉटिश चर्च कॉलेज (कलकत्ता यूनिवर्सिटी) ने स्नातक किया। उसके बाद आईसीएस की परीक्षा भी उत्तीर्ण की। वो चाहते तो एक सुविधाजनक, एशोआराम का जीवन उनके कदमों पर होता। लेकिन इसे ठुकराकर उन्होंने देश की स्वतंत्रता का संघर्षमय मार्ग चुना। पूरी दुनिया की खाक छानी, फंड जुटाया, आईएनए का गठन किया और ब्रिटिश शासन की जडें हिला दीं।
स्वामी विवेकानंद
स्वामी विवेकानंद के पास 1884 में वेस्टर्न फिलॉसपी में बीए करने के बाद विकल्पों की कमी नहीं थी, लेकिन उनका संकल्प तो राष्ट्र सेवा था। उन्होने निराशा में गोते लगा रहे युवा वर्ग को उस समय उठो जागो लक्ष्य तक पहुंचे बिना रूको मत का मंत्र दिया तो वहीं भारत की गरिमा दोबारा स्थापित की। भारत में उनका जन्म दिवस 12 जनवरी युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। अरविंद घोष, सरदार वल्लभ भाई पटेल, सुरेंद्रनाथ बनर्जी जैसे बहुत से लोगों को इस सूची में स्थान दिया जा सकता है।

अन्ना हजारे ने तोड़ा अनशन, देशभर में जश्न



संसद में अपनी तीन मांगों का प्रस्ताव पारित होने के बाद गांधीवादी अन्ना हजारे ने 13वें दिन 288 घंटे लंबा अपना अनशन खत्म कर दिया। पश्चिमी दिल्ली के सुंदर नगर की 5 साल की सिमरन और इकरा ने 10.20 बजे शहद मिश्रित नारियल पानी पिलाकर अन्ना का अनशन खत्म करवाया।
अनशन तोड़ने के बाद विशाल जन समूह को संबोधित करते हुए अन्ना ने कहा कि उन्होंने अपना अनशन सिर्फ स्थगित किया है लेकिन उनकी लड़ाई जारी रहेगी। असली अनशन पूरी लड़ाई जीतने के बाद ही टूटेगा।
जीत की खुशी ने अन्ना के चेहरे से थकान की रेखाएं मिटा दी थी। अन्ना ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि जनता के मुद्दों से संसद इंकार नहीं करेगी, लेकिन यदि संसद ने इंकार किया, तो जन संसद को तैयार रहना होगा। उन्होंने कहा कि आज यह बात साबित हो गई है कि जन संसद, दिल्ली की संसद से बड़ी है। जन संसद जो चाहेगी, दिल्ली की संसद को उसे मानना होगा।
अन्ना ने कहा कि हमें बाबा साहेब अंबेडकर के बनाए संविधान के तहत इस देश में परिवर्तन लाना है। आज यह साबित हो गया है कि परिवर्तन लाया जा सकता है। हम भ्रष्टाचार मुक्त भारत का निर्माण कर सकते हैं।
अन्ना ने कहा कि आज सत्ता के केंद्रीकरण के कारण भ्रष्टाचार बढ़ा है। सारी सत्ता मंत्रालयों में है। हमें सत्ता का विकेंद्रीकरण करना होगा। ग्रामसभाओं को मजबूत करना होगा। तभी सच्चा लोकतंत्र स्थापित होगा। उन्होंने कहा कि अभी यह शुरुआत है। लंबी लड़ाई आगे है। किसानों का सवाल है, मजदूरों का सवाल है। पर्यावरण, पानी, तेल जैसे तमाम मुद्दे हैं। गरीब बच्चों की शिक्षा का सवाल है। हमें चुनाव सुधार भी करने हैं। पूरी व्यवस्था बदलनी है। हमारा असली अनशन इस पूरे बदलाव के बाद ही टूटेगा।
उन्होंने कहा कि आज देश में इतना बड़ा आंदोलन हुआ, लेकिन पूरी तरह अहिंसक। दुनिया के सामने आप सभी ने मिसाल रखी है कि आंदोलन कैसे करना चाहिए। इस आंदोलन की यह सबसे महत्वपूर्ण बात रही है। अन्ना ने लोगों को अपने जीवन में कथनी और करनी में समानता लाने को कहा।
इसके पहले उन्होंने आंदोलन को सफल बनाने में देश की जनता, खासतौर से युवाओं, मीडिया, पुलिस और उनकी देख-रेख में लगे चिकित्सकों को धन्यवाद दिया।
अन्ना हजारे के अनशन तोड़ने से पूर्व उनके प्रमुख सहयोगी अरविंद केजरीवाल ने इस आंदोलन को सफल बनाने के लिए देशवासियों के साथ ही सांसदों और राजनीतिक पार्टियों का भी शुक्रिया अदा किया।
केजरीवाल ने प्रधानमंत्री को विशेष तौर पर बधाई देते हुए कहा कि हम अपने प्रधानमंत्री का शुक्रिया अदा करते हैं, जिन्होंने पहल की और अन्ना को पत्र लिखकर अपनी सहमति व्यक्त की।
केजरीवाल ने कहा कि हम देश के सभी सांसदों और राजनीतिक पार्टियों का इस बात के लिए शुक्रिया अदा करते हैं कि उन्होंने जनभावनाओं का ख्याल करते हुए हमारी मांगों पर सर्वसम्मति से सदन में सहमति प्रकट की।
अन्ना के इस आंदोलन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले केजरीवाल ने कहा कि चिकित्सकों ने अन्ना को अनशन समाप्त करने के बाद दो-तीन दिन तक अस्पताल में रहने की सलाह दी है और वह यहां से सीधा अस्पताल जाएंगे।
केजरीवाल ने दिल्ली नगर निगम का आभार जताते हुए कहा कि दिल्ली नगर निगम ने जिस तरह से 13 दिनों तक इस मैदान की साफ सफाई की, उसके लिए मैं निगम के उन सभी कर्मचारियों को धन्यवाद देता हूं, जिन्होंने दिन-रात परिश्रम किया।
केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली जल बोर्ड और दिल्ली पुलिस ने काफी शानदार काम किया है। हम उन पुलिसकर्मियों का भी शुक्रिया अदा करते हैं, जो हमें गिरफ्तार कर जेल ले गए। यह उनका कसूर नहीं था, वे तो सिर्फ अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे।
केजरीवाल ने कहा कि तिहाड़ जेल के कर्मचारियों और अधिकारियों ने जिस तरह से अन्ना के साथ व्यवहार किया उसके लिए हम उनका भी शुक्रिया अदा करते हैं। उन्होंने अन्ना समर्थकों से शाम छह बजे इंडिया गेट पर जमा होकर शांतिपूर्ण तरीके से जश्न मनाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि यह मुहिम अब ऐसे ही चलती रहेगी। भविष्य में हम 'राइट टू रिकॉल, राइट टू रिजेक्ट' और न्यायिक सुधारों के लिए लड़ाई लड़ेंगे।
ज्ञात हो कि अन्ना प्रभावी लोकपाल की मांग को लेकर गत 16 अगस्त से अनशन पर थे। पहले ही दिन उन्हें हिरासत में ले लिया गया था। बाद में गिरफ्तार कर उन्हें न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया था। हालांकि उसी दिन शाम को उन्हें रिहा कर दिया गया, लेकिन वह अपनी शर्तो पर 19 अगस्त को रामलीला मैदान पहुंचे। संसद ने 27 अगस्त को अन्ना की प्रमुख तीन मांगों पर प्रस्ताव पारित किया और रविवार सुबह अन्ना ने अनशन समाप्त कर दिया।
रामलीला मैदान पर चार गुणा छह फुट की जगह में सोते थे हजारे
-सादगी अन्ना हज़ारे की शख्सियत का एक मजबूत पक्ष रही है। रामलीला मैदान पर अपने अनशन के दौरान भी हजारे का यही पहलू नजर आया। वह अपने समर्थकों को संबोधित करने के बाद मंच के ठीक पीछे बनाई गई चार गुणा छह फुट की छोटी सी जगह में सोते थे।
हजारे ने 12 दिन के उपवास के बाद आज सुबह आखिरकार अपना अनशन तोड़ दिया। अनशन टूटते ही हजारे अस्पताल के लिए रवाना हो गए, लेकिन जिस मंच पर वह अपनी गिरती सेहत के बावजूद 10 दिन तक मजबूत इरादे के साथ डटे रहे, वहां मीडिया पहुंच गया।
हजारे के करीबी कार्यकर्ताओं ने उस स्थान के बारे में बताया जहां हजारे दिन में कुछ वक्त गुजारते थे और रात को सोते थे। रामलीला मैदान पर बने मंच को दो हिस्सों में बांट दिया गया था। मंच के पीछे वाले हिस्से में सीढि़यों के नजदीक चार गुणा छह फुट की जगह बनाई गई थी, जिसमें हजारे के लिए एक छोटी चारपाई रखी हुई थी। चारपाई के पीछे तिरंगा लगाया गया था और वहां एक कूलर भी रखा था।
हजारे रात के समय इसी छोटी सी जगह में सोते थे। वहां कोई टीवी नहीं था। हजारे को देश की हलचलों के बारे में अपने साथी कार्यकर्ताओं से ही पता चलता था। मंच के पीछे दाहिनी ओर निगरानी कक्ष बना था, जिसमें एक टीवी रखा था। इस टीवी के जरिए ही हजारे की कोर समिति के सदस्य खबरों पर नजर रखते थे। बाईं ओर भी एक कक्ष बना था, जिसमें बैठकें हुआ करती थीं और अतिविशिष्ट व्यक्ति वहीं इंतजार करते थे।

भाजपा सांसद को देनी पड़ेगी शेहला मामले में सफाई!



सामाजिक कार्यकर्ता शेहला मसूद हत्याकांड की जांच में लगी पुलिस का आए दिन चौंकाने वाले तथ्यों से सामना हो रहा है। शेहला के संबंध भाजपा के एक चर्चित राज्यसभा सदस्य से भी होने का पता चला है। हत्या से पहले दोनों के बीच फोन पर बात भी हुई थी। पुलिस अब सांसद से कुछ बातों की जानकारी के लिए उन्हें नोटिस जारी करने पर विचार कर रही है। शुक्रवार को ही पुलिस ने भोपाल के भाजपा विधायक ध्रुव नारायण सिंह से पूछताछ की थी।
पुलिस जांच में पता चला है कि आरटीआइ कार्यकर्ता शेहला के पिछले सालों में कुछ नेताओं से काफी मधुर संबंध बन गए थे। विधायक धु्रव नारायण सिंह द्वारा बनाई गई उदय संस्था तो अब शेहला ही चला रही थीं। जब ध्रुव नारायण पर्यटन निगम अध्यक्ष थे, तब शेहला की कंपनी को कई काम मिले थे। ध्रुव नारायण ने पुलिस को दिये लिखित बयान में बताया है कि हत्या के एक-दो दिन पहले ही इतवारा में हुए सांप्रदायिक विवाद पर शेहला से उनकी बात हुई थी।
पुलिस को पता चला है कि भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी एके भंट्टाचार्य से शेहला का धन के लेन-देन को लेकर विवाद था। इसके अतिरिक्त हाल ही में शेहला की कांग्रेस नेता व रीवा स्टेट के पूर्व महाराज पुष्पराज सिंह से भी फोन पर बात हुई थी। पुलिस इन दोनों लोगों से भी पूछताछ करने पर विचार कर रही है।

Saturday, August 27, 2011

संसंद में युवराज राहुल गाँधी के प्रवचन , प्रधानमंत्री भी भागते आते है



राहुल गाँधी तानाशाह प्रवर्ति के व्यक्ति है और उन्हें लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार संसद के कानूनों को दरकिनार कर महत्त्व दे रही है । यह बाते संसद में आज विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज की बातो से एक प्रकार से जाहिर हो गयी । सुषमा स्वराज ने बखूबी सधे अंदाज में बताया , कि आज सुबह मीडिया में पट्टी चल रही थी कि सदन में राहुल गाँधी कुछ बयान देंगे , चुकी वह दूसरी बार चुने हुए सांसद है इसलिए शून्यकाल में उन्हें तीन मिनट कि अनुमति मिलती या ज्यादा से ज्यादा पांच मिनट । लेकिन शून्यकाल में विषय उठाने वालो कि लिस्ट में तो राहुल गाँधी का नाम ही नहीं था , लेकिन फिर भी अध्यक्ष ने उन्हें अनुमति दी और वो पूरे पंद्रह मिनट बोलते रहे , प्रधानमंत्री भी भाग कर आये और अपनी जगह पर बैठ कर राहुल कि बात सुनने लगे । सुषमा स्वराज ने आगे बताया कि शून्यकाल में कोई विषय ही उठाया जा सकता है पर राहुल गाँधी प्रवचन करते रहे । इस बीच कांग्रेसी सांसद शोर शराबा करते रहे। मुझे सुषमा स्वराज कि बातो में दम नजर आया क्योकि मैंने भी कल यह देखा था कि राहुल गाँधी संसद में बोलने के बाद तुरंत वहा से चले गए थे , वैसे वह संसद में जाते भी बहुत कम ही है । देश भ्रस्टाचार और ऐसी अनेक बीमारियो से ग्रस्त है और राहुल गाँधी सिर्फ तानाशाही वाला रवैया दिखा रहे है , ऐसे में उन्हें प्रधानमंत्री बनते देखना चाहने वालो कि बुधि पर भी तरस आता है कि जो व्यक्ति करोडो देश वासिओ कि भावनाओ को न समझता हो , युवराज बनकर संसंद में आता हो , जाता हो , संसद में विषय से हटकर प्रवचन करता हो वह व्यक्ति मेहरबानियो से प्रधानमंत्री बन भी जाए तो देश कि हालत क्या हो सकती है यह सोचने से ही डर लगता है ।

Friday, August 26, 2011

गाँधी परिवार के वो १२२०० वीडियो






सोनिया गाँधी के दामाद .. प्रियंका गाँधी के पति .. राहुल गाँधी के जीजाजी , रोबर्ट वढेरा के विरुद्ध यू -ट्यूब पर ढेर सारी जानकारिया उपलब्ध होने लगी है ...यू -ट्यूब का यह भी दावा है की ...पिछले वर्ष उसे अपने जो 12400 से अधिक वीडियो प्रतिबंधित करने पड़े ..... उनमे से १२२०० तो अकेले केवल इसी परिवार से जुड़े भ्रस्टाचार सम्बन्धी आरोपों के थे ।


Wednesday, August 24, 2011

मध्य प्रदेश सरकार बच रही अपनी नैतिक जिमेदारी से










मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश की जनता की बुनियादी सुविधाओ की अनदेखी कर अपनी नैतिक जिम्मेदारी से बच रही है , सेंधवा में यात्रिओ से भरी बस को जलाया जाना इसी का नतीजा है । राज्य परिवहन विभाग के भ्रस्टाचार को तो वह रोक नहीं पाई उलटे इस विभाग को ही बंद कर दिया गया । परिवहन सुविधा को पूरा निजी बस आपरेटरों के माथे छोड़ दिया गया है और विभाग के अधिकारी सिर्फ अवैध वसूली कर रहे है । राज्य सरकार की अदुरदर्शिता का खामियाजा बेकसूर यात्री रोजाना भुगत कर मौत के मुह में जा रहे है ।



अब सेंधवा में हुए हादसे के बाद परिवहन विभाग के आयुक्त निजी बस आपरेटरों को ऐसा करो , वैसा करो की हिदायत दे रहे है , जाहिर है सिर्फ हादसे के बाद की ओपचारिकता निभाई रही है ।आई जी अनुराधा शंकर बस यात्रिओ को जिन्दा जलने के मामले में ड्राईवर और कंडक्टर पर रासुका लगा चुकी है , दोनों इनामी बदमाश भी है । बदमाशो को निजी बस वाले अपने यहाँ जब रखते है तब तो पुलिस और परिवहन विभाग आंख बंद कर अवैध वसूली में लगा रहता है । राज्य सरकार को पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बेहतर बनाने की दिशा में ठोस कदम उठा कर अपनी नैतिक जिमेदारी निभानी चाहिए । आज की जा रही सख्ती ओपचारिकता लग रही है । वैसे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का कहना है की उन्होंने ऐसा हादसा पहले बार देखा है ।


Tuesday, August 23, 2011

बाल हृदय उपचार योजना की मॉनिटरिंग के लिये राज्य स्तरीय समिति गठित होगी

मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने निर्देश दिये हैं कि मुख्यमंत्री बाल हृदय उपचार योजना की मॉनिटरिंग के लिये राज्य स्तरीय समिति गठित की जाये। उन्होंने कहा कि यह राज्य शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता वाली योजना है। इसकी लगातार मॉनिटरिंग हो। ये निर्देश मुख्यमंत्री श्री चौहान ने आज यहाँ मुख्यमंत्री बाल हृदय उपचार योजना की समीक्षा बैठक में दिये।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने निर्देश दिये कि प्रमुख सचिव, स्वास्थ्य की अध्यक्षता में गठित इस समिति में स्वास्थ्य आयुक्त, निदेशक चिकित्सा शिक्षा और मुख्यमंत्री के सचिव सदस्य रहेंगे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि बच्चों को जिंदगी देने वाली इस योजना की प्रकरणवार मॉनिटरिंग करें। योजना की संभाग स्तर पर गठित समितियों की नियमित बैठक हो। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने निर्देश दिये कि संभागीय स्तर पर चिन्हांकित बच्चों की सूची प्रत्येक जिले के कलेक्टरों और महिला एवं बाल विकास अधिकारियों को दी जाये। यह सुनिश्चित किया जाये कि बच्चों के हृदय की शल्य चिकित्सा विशेषज्ञ और अनुभवी चिकित्सकों से ही करवायी जाये।
बाल हृदय उपचार के बारे में मेडिकल कॉन्फ्रेंस
बताया गया कि बाल हृदय उपचार योजना के संबंध में भोपाल में राष्ट्रीय मेडिकल कॉन्फ्रेंस आयोजित की जायेगी। कॉन्फ्रेंस में देश के वरिष्ठ विशेषज्ञ शल्य चिकित्सकों को बुलाया जायेगा। काँन्फ्रेंस में बाल हृदय उपचार की नवीनतम तकनीकों तथा उपकरणों के बारे में जानकारी दी जायेगी।
38 बच्चों को मिली जिंदगी
बैठक में बताया गया कि योजना के तहत विभिन्न जिलों में 594 हृदय रोग से प्रभावित बच्चों को चिन्हांकित किया जा चुका है। इसमें से 97 बच्चों की सर्जरी के लिये राशि स्वीकृत की जा चुकी है तथा 38 बच्चों के ऑपरेशन किये जा चुके हैं। उपचार के लिये प्रदेश के 11 और प्रदेश से बाहर के 5 चिकित्सा संस्थानों को चिन्हांकित किया गया है। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री दीपक खांडेकर, नियंत्रक खाद्य एवं औषधि प्रशासन एवं प्रभारी स्वास्थ्य आयुक्त श्री अश्विनी कुमार राय, मुख्यमंत्री के सचिव श्री एस.के.मिश्रा और श्री विवेक अग्रवाल और निदेशक चिकित्सा शिक्षा श्री एच.सी.तिवारी भी उपस्थित थे।

घोर घोर रानी ’ का प्रदर्शन अंतर्राष्ट्रीय फ़िल्म समारोह में

जनसम्पर्क संचालनालय मध्यप्रदेश द्वारा निर्मित लघु फ़िल्म ‘ घोर घोर रानी ’ का प्रदर्शन बैंगलुरू में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय फ़िल्म समारोह ‘ वाइसेस फ्रॉम वॉटर्स ’ में किया जाएगा। यह समारोह 26 से 28 अगस्त 2011 तक चलेगा। समारोह में पानी और स्वच्छता से जुड़े मुद्दों पर बनी फ़िल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा। ‘ घोर घोर रानी ’ में मध्यप्रदेश के ‘पानी रोको अभियान ’ का संदेश बच्चों के पारंपरिक लोकप्रिय खेल की संगीतमय प्रस्तुति के साथ सहज रूप से दिखाया गया है। फ़िल्म का निर्देशन सुनिल शुक्ल ने किया है। फ़िल्म की परिकल्पना कवि-कथाकार ध्रुव शुक्ल ने की है।

बस हादसे में मरे लोगों के परिजनों को मिली लाठियां



सेंधवा में रविवार को बस में आग लगाए जाने पर मारे गए लोगों के परिजनों ने सोमवार को चक्का जाम कर दिया। परिजनों की माग थी कि बस में आग लगाने वालों को गिरफ्तार कर उन्हें कड़ी सजा दी जाए। पुलिस ने चक्का जाम कर रहे लोगों पर लाठिया भाजकर उन्हें खदेड़ दिया। मुख्यमंत्री ने मृतकों के घर पहुंचकर परिजनों को ढाढस बंधाया और सहायता राशि बढ़ाने की घोषणा की।
सेंधवा में बस में आग लगाने की घटना में मारे गए लोगों के परिजनों ने सेंधवा में हंगामा किया। मृतकों के परिजनों ने सेंधवा में एबी रोड पर चक्का जाम कर दिया। मृतकों के परिजन पुलिस से माग कर रहे थे कि हत्यारों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए और उनको कड़ी सजा दी जाए। परिजनों की नाराजगी इस बात से भी थी कि घटना के बाद पुलिस दूसरे दिन भी आरोपियों को गिरफ्तार नहीं कर पाई। पुलिस की समझाइश के बाद जब लोग अपनी माग पूरी होने तक हटने को तैयार नहीं हुए तो चक्का जाम कर रहे लोगों को पुलिस ने लाठियां भाजकर खदेड़ दिया और 9 लोगों को गिरफ्तार कर लिया।
दोपहर में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मृतकों के परिजनों से मिलने पहुंचे। हादसे में सभी मरने वालों को जिला प्रशासन ने 1-1 लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की थी। जिसे मुख्यमंत्री ने बढाकर 2-2 लाख रुपये कर दिया। साथ ही, घटना के दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने का भरोसा दिलाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस में आग लगाकर यात्रियों की हत्या करने वाले दोषियों को छोड़ा नहीं जाएगा। इस वीभत्स हत्याकाड की विस्तृत जांच करवाकर प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से संलग्न पाए गए दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने घटना में मृत 10 यात्रियों में से 6 यात्रियों की सेंधवा में होने वाली सामूहिक अंत्येष्टि में पहुंचकर मृतकों की आत्मा को शाति प्रदान करने की प्रार्थना भी की। इससे पहले उन्होंने घटना-स्थल का निरीक्षण भी किया। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में एक दरवाजे की बसों को प्रतिबंधित करवाने की कार्रवाई करने की घोषणा भी की। उन्होंने स्थानीय जन-प्रतिनिधियों द्वारा बसों के परमिट में नियमों का पालन नहीं करने से बस आपरेटरों के मध्य सवारियों को लेकर प्रतिदिन होने वाले वाद-विवाद की जानकारी देने पर परिवहन आयुक्त को प्रदेश में जारी परमिटों का सूक्ष्म परीक्षण करने के भी आदेश दिए।
चौहान ने बालसमंद बैरियर पर ही मुख्य सचिव अवनि वैश्य, पुलिस महानिदेशक एस.के. राउत, परिवहन आयुक्त एस.एस. लाल, इंदौर संभागायुक्त प्रभात पाराशर, आईजी इंदौर अनुराधा शकर, बड़वानी कलेक्टर श्रीमती तिवारी, बड़वानी पुलिस अधीक्षक आर.एस. मीणा के साथ बैठक कर आवश्यक निर्देश दिए।

Monday, August 22, 2011

अन्ना हजारे के व्यक्तित्व की उपासना से बचना चाहिए : प्रशांत भूषण (साक्षात्कार)





Interviewee : प्रशांत भूषण
Interviewer : आईएएनएस
Interview Date : 21,August,2011
नई
दिल्ली ! हजारों लोग इन दिनों प्रतिदिन रामलीला मैदान पहुंच रहे हैं। उनकी उम्मीदें बस एक ही शख्स पर टिकी हुई हैं और वह हैं अन्ना हजारे।
लेकिन टीम अन्ना के सदस्य प्रशांत भूषण महसूस करते हैं कि भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन को 'वैयक्तीकरण' से बचाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सामाजिक संगठन के कार्यकर्ता अपने जन लोकपाल विधेयक पर पड़ी सिलवटों को मिटाना चाह रहे हैं।
भूषण ने आईएएनएस से खास बातचीत में कहा, ''मैं व्यक्तित्व पर अधिक जोर देने के पक्ष में नहीं हूं। अन्ना हजारे के नाम पर आंदोलनके व्यक्तित्व की उपासना से बचना चाहिए।''
जन लोकपाल विधेयक का मसौदा तैयार करने वाली समिति में शामिल वकील ने कहा, ''लोगों का ध्यान अन्ना पर केंद्रित है, क्योंकि राजनीतिक नेतृत्व उनकी जरूरतों को पूरा करने में नाकाम रहा है। राजनीतिक वर्ग ने अपनी भूमिका खो दी है। राजनेताओं पर से लोगों का विश्वास पूरी तरह उठ चुक है।''
इसी वक्त उन्होंने कहा, ''हमने इतने भारी समर्थन की उम्मीद नहीं की थी। हम जानते थे कि इस पर विचार किया जाएगा, लेकिन इस तरह का मंजर सामने आएगा, यह नहीं सोचा था। लोग महसूस करते हैं कि अन्ना हजारे सच्चे मन से आंदोलन का अलख जगाने वाले व्यक्ति हैं।''
रामलीला मैदान के दृश्य देखकर लोग घरों से निकल पड़ते हैं।
स्कूली छात्रों से लेकर वरिष्ठ नागरिक तक, सभी तिरंगा लहराते हुए और अन्ना हजारे की तस्वीर वाले बैनर लिए हुए रामलीला मैदान में पहुंच रहे हैं। समूचे मैदान में 'मैं भी अन्ना तू भी अन्ना अब तो सारा देश है अन्ना' के नारे से गूंज रहा है।
16 अगस्त को जेपी पार्क में अनशन के लिए जाने से पहले दिल्ली पुलिस ने जब 74 वर्षीय अन्ना हजारे को हिरासत में ले लिया था, तब हजारों समर्थकों को गिरफ्तार कर छत्रसाल स्टेडियम में रखा गया था।
रिहाई के बाद तिहाड़ जेल से लेकर रामलीला मैदान तक अन्ना हजारे के आगे और पीछे जुटी भारी भीड़ का जिक्र करते हुए भूषण ने कहा कि 'अन्ना की लहर' ने युवाओं की नब्ज पकड़ी जो 'राजनेताओं से तंग आ चुके हैं'।
इस आरोप का खंडन करते हुए कि अन्ना का आंदोलन सरकार के साथ 'ब्लैकमेल' है, भूषण ने कहा, ''यह कहना गलत है कि हम अपनी राह या राजमार्ग को अखाड़ा बना रहे हैं।''
सामाजिक संगठन के आंदोलन का हिस्सा बने वयोवृध्द अधिवक्ता और पूर्व विधि मंत्री शांति भूषण के बेटे प्रशांत भूषण ने कहा, ''हमने जो राह अपनाई है उसकी कुछ वर्ग द्वारा की जा रही आलोचना के प्रति हम सचेत हैं, लेकिन यह इस पर निर्भर करता है कि अनशन को आप किस रूप में देखते हैं। जिस वजह को लेकर हम अनशन कर रहे हैं, वह न्यायसंगत है। हम सरकार के कपाल पर बंदूक नहीं रख रहे हैं, बल्कि कह रहे हैं कि हमारी मांगें पूरी करो।''
भूषण ने कहा, ''यदि हमारे विधेयक में खोट है तो वह दूर होगा, हम ऐसा करेंगे। स्थायी समिति को जन लोकपाल संसद में पेश करना चाहिए।''
उन्होंने कहा, ''अन्ना हजारे को सीधे तौर पर स्थायी समिति में बुलाना अब व्यवहारपूर्ण विकल्प नहीं है। हमें देखना है जन लोकपाल विधेयक के सम्बंध में क्या निर्णय लिया जाता है।''

भोपाल के बाद अब जबलपुर में सांप्रदायिक हिंसा

रविवार को कुछ असामाजिक तत्व अपने मंसूबे में सफल हो गए। जबलपुर में एक धार्मिक जुलूस पर पथराव के बाद भड़की हिंसा में एक दर्जन लोग घायल हुए हैं। वहां आगजनी की भी खबरें हैं। छह इलाकों में धारा 144 लगाकर सुरक्षा के सख्त इंतजाम किए गए हैं।
जबलपुर में रविवार को बजरंग दल ने जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में शोभायात्रा निकाली। शोभायात्रा जब ओमती थाना क्षेत्र के करमचंद चौक पर पहुंची तो एक पक्ष ने इस पर पथराव कर दिया। पथराव के बाद उत्तेजित भीड़ ने आगजनी शुरू कर दी। दोनों पक्षों के बीच हुई आमने-सामने की लड़ाई में दो लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। हालांकि पुलिस ने मुस्तैदी से कार्रवाई करते हुए स्थिति को संभाल लिया। वहां के छह थाना इलाकों ओमती, हनुमानताल, लार्डगंज, कोतवाली, गोहलपुर और गोरखपुर में धारा 144 लगाई गई है। घटना के बाद से जबलपुर के बाजार बंद हो गए हैं। इससे पहले पिछले एक महीने से भोपाल में सांप्रदायिक तनाव की कोशिशें की जा रही थीं। रात को बाजार बंद कराने गई पुलिस पर पथराव और बाइक से कीचड़ उचटने पर लोगों के घर जलाने, हवाई फायरिंग व पुलिस पर हमले की वारदात हुई थी। हिंसक भीड़ के पथराव में पुलिस अधीक्षक अभय सिंह की एक आंख जा चुकी है। वह अभी भी चेन्नई के शंकर नेत्र चिकित्सालय में भर्ती हैं। पुलिस उनकी साजिश के नेटवर्क का पता कर रही है।

शिवसेना पगला गई



शिवसेना नाम की पार्टी का जब तक अस्तित्व रहेगा वह क्षेत्रीय पार्टी ही रहेगी । क्षेत्रीय पार्टी भी तब तक जब तक भाषा - प्रान्त पर ही राजनीती करेगी । देश के विकास में शून्य साबित हो चुकी यह पार्टी देश में अब राष्ट्रपति शासन की मांग कर रही है । क्यों भैया ? क्या देश में अराजकता फ़ैल गई है ? या हालात बेकाबू हो गए है ? अन्ना और देश का आम आदमी ऐसा प्रदर्शन कर रहे है जिससे दुनिया को यह सीख मिलेगी की अनशन कैसे किया जाता है । गांधीवाद भारत में जिन्दा है और हमेशा जिन्दा रहेगा । सबकुछ शांतिप्रिय ढंग से हो रहा है शायद इसलिए ही शिवसेना को यह रास नहीं आ रहा है , क्यों अभी तक वह खुद को इस जनांदोलन से नहीं जोड़ पाई है ? लगता है वह झगडा देखना चाहती है तभी तो वह राष्ट्रपति शासन की मांग कर देश के लोकतंत्र को दफ़नाने की वकालत कर रही है । मुंबई और महारास्ट्र के कई शहरो से शिवसेना की रोजी रोटी कैसे चलती है यह महारास्ट्र के नागरिक अच्छी तरह से जानते है । सावधान , आग में घी डालने वाले आ रहे है ।

हर एक फ्रेंड जरुरी होता है



घडी घडी कुछ शेयर करे , दोस्तों की बात पर कमेन्ट कभी कभी करे , अपने द्वारे वह सबको चाहे , खुद किसी के द्वार न जाये , ऐसा है हर फ्रेंड यहाँ पर फिर भी जरुरी है फ्रेंड यहाँ पर , कुछ न कहे फिर भी तो सुन लेता है वो , रोज रोज नहीं .. कभी तो थोडा संग हो लेता है वो ..जिंदगी के हर मोड़ पर हर एक फ्रेंड जरुरी होता है ।

Sunday, August 21, 2011

कटनी में भ्रस्टाचार के विरोध में धरने पर बैठे लोग





पुलिस एफ आई आर पर तुरंत कार्यवाही करे - शिवराज सिंह चौहान

भोपाल - शिवराज सिंह चौहान ने पुलिस को आमजन के साथ मित्र के समान व्यवहार करने की सलाह दी है। चौहान का मानना है कि मित्रतापूर्ण व्यवहार से आम आदमी खुलकर अपनी बात कह सकेगा। पुलिस एफआईआर पर तुरन्त और प्रभावी कार्रवाई करे। वे शनिवार को रायसेन, शाजापुर, शहडोल और पन्ना के कलेक्टरों व पुलिस अधीक्षकों से वीडियो कांफ्रेंसिंग पर चर्चा कर रहे थे। चौहान ने साफ शब्दों में अपने अफसरों से कहा कि एफआईआर दर्ज करने में किसी प्रकार की हीला-हवाली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री चौहान ने पुलिस अधिकारियों से कहा कि वे समाज के विभिन्न समुदायों और ग्रामों के साथ सीधा संवाद बनाए रखें और क्षेत्र की सतत निगरानी करें। आमजन को परेशान करने वालों के विरुद्ध बिना किसी विलंब और विचार के तत्काल कठोर कार्रवाई की जाए। मुख्यमंत्री चौहान ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली की व्यवस्था को दोष रहित बनाने पर विशेष बल दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जन-समस्याओं के समाधान में कसावट लाई जाए। किसी भी व्यक्ति को समाधान के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़े।


आम आदमी से संसद, संसद में अब आम आदमी नहीं



आम आदमी ही देश का असली मालिक है उसने अपने सेवको को संसद में भेजा, मालिक सो गया तो सेवक फिर मालिक बन बैठा । अन्ना ने आम आदमी को फिर उसकी ताक़त का एहसास करा दिया , यह अनशन अब लोकपाल भर का नहीं है यह आम आदमी को जगा जुका है । अन्ना अब आम आदमी का चेहरा है । इससे पहले इतिहास में पढ़ा गया की जनक्रांति कैसी होती है , आज देख लिया है की ऐसी होती है ।



सरकार काएदे कानूनों की बात भर करती है , देश में कानूनों की कैसे धज्जिया उड़ती है यह किसी से छिपा नहीं है । सरकार चाले चलती नज़र आती है , एक अरुणा रॉय नाम की कथित सामाजिक कार्यकर्ता अपना लोकपाल बिल लाकर आ गयी है । कोन है यह अरुणा रॉय ? अब तक कहा थी ? सरकार को अन्ना टीम से खुद बात कर जन लोकपाल पर खुली बहस करनी चाहिए , क्यों आम आदमी से बात करने में उसके अहम् सामने आ रहा है । अब वह अपने आपको सेवक नहीं मालिक समझ चुकी है , आम आदमी से ही संसद है न की संसद से आम आदमी । आम आदमी बनाम सरकार की यह लड़ाई है जिसमे आम आदमी की ही जीत में मेरी जीत है, आपकी जीत है, देश की जीत है । जय हिंद ।

Saturday, August 20, 2011

मेरा एक कवि मित्र कई दिनों से गायब है


मेरा एक कवि मित्र पिछले कई दिनों से गायब है ... वैसे वो पुलिस वाला है ...शायद उसने अपना कवि ह्रदय छोड़ दिया हो .... अब वो सिर्फ पुलिस हो लिया हो ... तब तो नहीं ही मिलेगा ... उस कवि को तो पुलिस ढूंड लेती ... पुलिस वाले को कहा ढूंढे ... हो सकता है उसने शादी कर ली हो ....हमें दावत न देनी पड़े इसलिए कही जा छुपा हो ...इस तरह के कई आते है मन में विचार .... मेरे मित्र तुम जहा भी हो यह सन्देश पड़ते ही आ जायो ...तुम्हारी विरह में आधा हो गया हू ।

चमकते चौराहों को अब चमकाती क्यों अँधेरा नही भगाती ये मोमबतिया





शहर के चमकते चौराहों , चमकती सडको पर शहर के लोगो को हाथ में आये दिन मोमबत्ती लिए देखकर यह एक सुपरहिट विचार आया की क्यों न मोमबत्ती का कारखाना ही लगा लू । शहर को भी इसकी आदत पड़ गयी अँधेरा भगाने के लिए नही .... उजियारे चौराहों को और चमकाने की , है न फाएदे का काम यह सोचकर में खुश हुआ पर मेरे एक शहरी मित्र को यह पसंद नही आया फिर उसने ही मुझे यह शहरी राज बताया की अबे इसे रोज रोज कोई नही लेगा ... इसका सीजन चलता है ... मौका रहता है । मैंने कहा यार गाँव के कई घरो में रात को रौशनी नही रहती ... हो सकता है मेरी मोमबत्तिया खरीदकर लोग इन्हें देने लगे ... मेरा मित्र जोर से हँसा और कहा ... यह विशेष मोमबत्तिया रहती है , यह अँधेरा नही भगाती ... यह बस चमकते चौराहों को ही चमकाती है ... फिर भी मेरा जोश इन मोमबत्तियो की संख्या देख कायम है ...आप मेरे पार्टनर बन जाए तो हम मिलकर मोमबत्ती का कारखाना लगाये ... कमाई आधी आधी ... डिमांड देखकर तरह तरह की मोमबत्तिया बनाये ... आयो कुछ कर दिखाए ।

Friday, August 19, 2011


पुरुष का काम सिर्फ पाना है , इसलिए कोई ऊँगली नहीं उठती , और स्त्री का काम सिर्फ दुसरो को देते रहना है और देने वाले जब कुछ पाने चाहते है तो वह पुरषों को अमर्यादित लगता है ... मांगने वाले से देने वाला बड़ा है ..और जो बड़ा है उसे ही दुसरो के लिए अपना कुछ छोड़ना पड़ता है

Thursday, August 18, 2011

अज्ञानता अंधकार की निशानी है - ज्ञान उजाले का

Tuesday, August 16, 2011

कांग्रेस सरकार ने आत्महत्या कर ली, लाश का जनाजा चुनावो में



देश के हालात को आँखों से देखने - कानो से सुनने , महसूस करने से यह साबित हो गया की केंद्र की कांग्रेस गठबंधन वाली सरकार ने आत्महत्या कर ली है । शीर्ष कांग्रेस नेतृत्व में बुधिहीन नेताओ की हठधर्मिता के कारण ही उसे यह कदम उठाना पड़ा है । पूर्व प्रधानमंत्री स्व राजीव गाँधी भी कहते थे की एक रुपया केंद्र से भेजने पर पंद्रह पैसे ही जनता तक पहुच पता है इसके बाद भी कांग्रेसियो ने जनता के हित की नहीं सोची । जनता में आक्रोश का घड़ा भरता रहा और कांग्रेस को लगता रहा की वह देश की ठेकेदार है इसी वजह से उसके नेताओ की बुधि मंद और कुंद पड़ गयी । अन्ना हजारे द्वारा इतने दिनों पहले दी गयी चेतावनी को गंभीरता से नही लिया गया अफ़सोस गांधीवादी अन्ना हजारे की सोच को कांग्रेस अपना नही सकी । जनता कितनी भ्रस्टाचार से तंग है उसे यह समझ में ही नही आ पाया । कांग्रेस ने अब आत्महत्या कर ली है आगामी लोकसभा चुनावो में उसकी लाश का जनाज़ा भी निकलेगा , तब इसके बुधिहीन नेताओ को इस आत्महत्या का सर्टिफिकेट भी मिल जायेगा ।


सर जो तेरा चकराए दिल डूबा जाये आजा प्यारे पास हमारे काहे घबराये

तुम्हारी रहमत से ही मेरा सोभाग्य



मेरे सतगुरु बाबाजी आपने अपने अंश को मुक्ति दे दी है .... में कैसे आपका शुक्रिया अदा करू ...करोडो जुबान भी हो करोडो आँखे हो ....तब भी में तिल भर तुम्हारा शुक्रिया वंदना नहीं कर सकता .....तुम्हारी रहमत से ही मेरा सोभाग्य बना है ....तुम जो मिल गए हो ।

Monday, August 15, 2011

मेरी स्वतंत्रता मना रहे हो ... मेरी भी तो सुनो



परतंत्र से स्वतंत्र हुए मुझे आज ६४ वर्ष हो गए ... मुझे यह कहने में कोई शर्म नहीं की में सिर्फ शरीर यानि सिर्फ भोगोलिक रूप से ही अपने आपको बस स्वतंत्र पता हू ..... मेरी आत्मा अभी तक कैद है उसे आज़ादी मिली नहीं ... इसलिए ही अभी तक अधूरा हू ... मेरा एक अंग दूसरे अंग को काटता है .... एक हिस्सा दूसरे हिस्से की बात नहीं मानता ....मेरा खून अब नाड़ियो से ज्यादा नालियो में बहता है ... फिर भी जिन्दा हू ... जब मेरी आत्मा कैद से निकल कर अपने असल रूप को देख लेगी ... में जीने लगूंगा... सही कह रहा हू .... मेरा विश्वास तो करो । अच्छा फिलहाल चलता हू । आपको मेरे स्वतंत्रता दिवस की बधाई ॥ मुझे अगले साल भी यूहि प्यार करना ।

Saturday, August 13, 2011

में ऐसा ही हू


बिजली के मीटर पर चुम्बक रखता हू ... रेल के आरक्षित डिब्बे में साधारण टिकट पर यात्रा करता हू ...आयकर तो क्या सेल टैक्स नहीं भरता हू ...सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का केस चल रहा है ...माँ को वृधाश्रम भेज दिया है ....भाई से पटती नहीं ... पड़ोसिओ से झगडा है ... शौपिंग माल से ब्रांडेड सामान ही खरीद करता हू .... तन्खा कम है लेकिन कैसे भी जुगाड़ बना लेता हू , "जुगाड़ "समझ गए न ..... वैसे में भी भ्रस्टाचार के खिलाफ हू , यकीन न हो तो मुझे देख लो .... में भी अन्ना के साथ हू । अच्छा नमस्ते चलता हू ।

में तो रोज रक्षा बंधन निभाता हु




आज रक्षा बंधन सभी मना रहे है अपनी अपनी बहनों से सभी राखी बंधवा कर उन्हें कुछ न कुछ जरूर देंगे में भी कुछ मुट्ठी भर पैसे कमा लू तो ही तो घर जाऊ...क्या करू रक्षा बंधन तो वैसे ही सारा साल मनाता हू.... अपने बीवी बच्चो का पेट भरने का बंधन है मुझ पर ....बेटियों की शादी भी करनी है...मेरी बहन अपने ससुराल में है ....राखी भेज दी है...जब आएगी ...कुछ उसे भी दूंगा ...आज बारिश भी बहुत है...आपसे बात ही करता रहूँगा तो ..परिवार का रक्षा बंधन कैसे पूरा करुगा ।

Friday, August 12, 2011

भारतीय अनाथ रेल मंत्रालय

रेल मंत्रालय इन दिनों अनाथ हो गया है जबसे रेल मंत्री ममता बेनर्जी बनी तो वह पश्चिम बंगाल के चुनावो में ही व्यस्त रही बाद में एक विजय त्रिवेदी नाम का कोई दूसरा रेल मंत्री देश पर थोप दिया गया है । जिसका काम सिर्फ ओपचारिक भर रह गया है । गाडी के समय की पुछ्ताशके लिए एक घटिया सेवा १३९ की है । जिसमे पुछ्ताश में बहुत समय ख़राब होता है । इसमें सिर्फ कंप्यूटर पर आधारित जानकारी ही दी जा रही है , अनुमानित आगमन समय बता दिया जाता है जबकि गाडी वास्तिविकता में लेट चल रही होती है । हर रेलवे स्टेशन से अब सामान्य पुछ्ताश सेवा समाप्त होती जा रही है और सिर्फ १३९ को ही रेलवे चलन में लाना चाह रहा है । इस समस्या से यात्री रोजाना सामना करते है लेकिन रेलवे अपनी मन मानी कर रहा है । यह तो सिर्फ एक उदहारण भर है यह बताने का की रेलवे मंत्रालय अनाथ हो गया है इसलिए अब यात्रिओ को समस्याओ का सामना करने की आदत डालनी चाहिए .

दो बोल मीठे

दो बोल मीठे बोल के सुख सबको दिया करे ..जीवन बड़ा अनमोल है इसे हर पल जिया करे ..बोली बने मधुर अगर मन में मिठास हो ..करनी व कथनी एक हो, वो जीवन जिया करे ..दो बोल मीठे बोल के सुख सबको दिया करे ।